बिहार में अब किसानों की फसल नहीं खराब कर पाएगी नीलगाय, सरकार ने ढूंढ़ लिया उपाय

नीलगायों पर अंकुश लगाने की कवायद में सरकार जुट गई है।

नीलगायों पर अंकुश लगाने की कवायद में सरकार जुट गई है। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बिहार में नीलगायों की संख्या कम करने के लिए नसबंदी अभियान चलाएगा। अब नसबंदी के बाद नीलगायों को जंगल में छोड़ा जाएगा।

Akshay PandeyFri, 05 Mar 2021 04:52 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, पटना: किसानों की एकड़ की एकड़ रातों-रात फसल चट करने वाली नीलगायों पर अंकुश लगाने की कवायद में सरकार जुट गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बिहार में नीलगायों की संख्या कम करने के लिए नसबंदी अभियान चलाएगा। प्रजनन नहीं होने से आगे उनकी जनसंख्या में वृद्धि नहीं होगी। यही नहीं, नसबंदी के बाद नीलगायों को जंगल में छोड़ा जाएगा। इसकी बड़ी योजना बन रही है। 

विधान परिषद में की नीरज कुमार बबलू  ने घोषणा

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज कुमार बबलू ने गुरुवार यह घोषणा विधान परिषद में की। मंत्री सदन में भाजपा के विधान पार्षद रजनीश कुमार के तारांकित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सदन को बताया कि अभी सौ और पांच सौ की संख्या में नीलगायों को मारने का अधिकार अलग-अलग अधिकारियों को दिया गया है। इसके लिए किसानों को आवेदन करना होता है। 

नीलगायों को मारना या नसबंदी समस्या का निराकरण

मंत्री के जवाब पर पूरक सवाल के जरिए रजनीश ने कहा कि नीलगायों को मारना या नसबंदी समस्या का निराकरण नहीं है। नीलगाय रातों-रात एकड़ के एकड़ खेतों में खड़ी फसल चट कर जाते हैं या बर्बाद कर देते हैं। हाथी और जंगली सुअर से फसल को होने वाले नुकसान पर मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन नीलगायों के मामले में नहीं है। ऐसे में सरकार कानून में संशोधन कर नीलगायों से होने वाले फसल नुकसान में मुआवजा देने का प्रविधान करे।

मारना भी नहीं है आसान

मंत्री के जवाब असंतोष व्यक्त करते हुए नवल किशोर यादव ने कहा कि उनकी संख्या इतनी अधिक होती है कि उन्हें मारना आसान नहीं है। लिहाजा सरकार से आग्रह किया कि मुआवजा के प्रविधान में नीलगाय से फसल नष्ट होने को भी जोड़ा जाए। सदस्यों के अनुरोध पर मंत्री ने कहा कि सरकार समस्या को लेकर गंभीर है। शीघ्र ही व्यापक योजना तैयार कर सरकार घोषित करेगी।

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