पटनाः कोरोना संक्रमितों में नई समस्या, मिर्गी-सिरदर्द के साथ इन शिकायतों को ले अस्पताल पहुंच रहे मरीज

संक्रमितों में अब लकवा मिर्गी से लेकर सिरदर्द चक्कर आना आंखों के आगे अंधेरा छाना जैसी समस्याएं परेशान कर रही हैं। विभिन्न अध्ययन से यह साबित हो चुका है कि कोरोना के कारण आइसीयू में पहुंचे तीन प्रतिशत मरीजों को लकवे की शिकायत हो रही है।

Akshay PandeyThu, 02 Dec 2021 04:20 PM (IST)
कोरोना संक्रमितों में अब नई समस्या सामने आ रही है। सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, पटना : कोरोना की पहली या दूसरी लहर में अस्पताल में भर्ती हुए गंभीर संक्रमितों में अब लकवा, मिर्गी से लेकर सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना जैसी समस्याएं परेशान कर रही हैं। विभिन्न अध्ययन से यह साबित हो चुका है कि कोरोना के कारण आइसीयू में पहुंचे तीन प्रतिशत मरीजों को लकवे की शिकायत हो रही है। इसमें से दो प्रतिशत को चेहरे का लकवा हो रहा है। वहीं, दो प्रतिशत अन्य रोगियों को मिर्गी की शिकायत हो गई है। 

ये बातें एसोसिएशन आफ न्यूरो साइंटिस्ट पूर्वी भारत के 34वें तीन दिवसीय आनलाइन सम्मेलन में वरिष्ठ न्यूरो चिकित्सक सह आइजीआइएमएस के पूर्व निदेशक डा. एके सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि अब साबित हो गया है कि कोरोना के दुष्प्रभाव में मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं। सम्मेलन में विदेश के 11 और देश के 40 प्रख्यात विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। पीएमसीएच में न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डा. एके अग्रवाल, सहायक प्राध्यपाक डा. गुंजन कुमार, डा. रविभूषण शर्मा, डा. केएम झा आदि की आयोजन में अहम भूमिका रही। 

स्वाद-गंध न मिले तो तुरंत कराएं कोरोना जांच  

डा. एके सिंह ने कहा कि कई बार लोगों को सर्दी-खांसी, बुखार नहीं होता, लेकिन स्वाद व गंध गायब हो जाती है। ऐसे तमाम रोगी आए जिनमें इसके अलावा कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे लेकिन जांच में रिपोर्ट पाजिटिव आई। ऐसे में लोगों को खाना बेस्वाद लगने या सुगंध नहीं मिलने पर तुरंत कोरोना जांच करानी चाहिए। लकवा, मिर्गी आदि की शिकायत होने पर भी कोरोना की जांच करानी चाहिए। पीएमसीएच के डा. गुंजन कुमार ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के मस्तिष्क पर हमले की समस्या आटोइम्यून इंसेफेलाइटिस पर प्रकाश डाला। अब इसके मरीज बढ़े हैं। कोरोना की साइटोस्टार्म स्थिति आटो इम्यून सिस्टम के अनियंत्रित होने से ही होता है। ऐसे में न्यूरो के मरीजों को कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा मूवमेंट्स डिस्आर्डर, फिजियोथेरेपी की नई पद्धतियों, रिहैबिलिटेशन सुविधाओं आदि पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।

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