बिहार में बहुमत के आधार पर तय होगा जमीन का मालिक, पुश्तैनी भूमि के बंटवारे को बन रहा कानून

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इसका प्रारूप बना रहा है। विभागीय मंत्री रामसूरत राय ने मंगलवार को बताया कि प्रारूप के संबंध में अधिकारियों से उनकी बातचीत हो रही है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द यह तैयार होगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो सकती है।

Akshay PandeyTue, 26 Oct 2021 10:22 PM (IST)
बिहार में बहुमत के आधार पर तय होगा पुश्तैनी जमीन का मालिक। सांकेतिक तस्वीर।

राज्य ब्यूरो, पटना : बहुमत के आधार पर पारिवारिक जमीन के बंटवारा के लिए राज्य सरकार कानून बनाने जा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इसका प्रारूप बना रहा है। विभागीय मंत्री रामसूरत राय ने मंगलवार को बताया कि प्रारूप के संबंध में अधिकारियों से उनकी बातचीत हो रही है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द यह तैयार होगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो सकती है। 

मालूम हो कि रामसूरत राय ने इस साल जुलाई में घोषणा की थी कि राज्य सरकार पुश्तैनी जमीन के पारिवारिक बंटवारा के लिए नया कानून बनाने पर विचार कर रही है। सरकार चाहती है कि सहमति आधारित जमीन बंटवारा को कानूनी मान्यता दी जाए, क्योंकि जमीन से जुड़े विवादों का अध्ययन बताता है कि पुश्तैनी बंटवारा में लोगों को अधिक परेशानी होती है। परिवार के सभी सदस्य हिस्सेदारी को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि परिवार के अधिसंख्य सदस्य बंटवारा के किसी फार्मूला पर सहमत होते हैं, लेकिन किसी एक सदस्य की असहमति के चलते बंटवारा नहीं हो पाता है। विवाद लंबे समय तक चलता रहता है। 

क्या होगा प्रारूप

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पुश्तैनी जमीन के बंटवारा के लिए कानून बनाने के जिस प्रारूप पर विचार कर रहा है, उसमें बहुमत को प्राथमिकता दी जाएगी। किसी परिवार में पुश्तैनी जमीन के पांच हकदार हैं, उनमें से तीन अगर किसी एक प्रारूप पर सहमत हैं तो उसे कानूनी मान्यता दे दी जाएगी। उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री हो जाएगी।

दूसरे पक्ष के लिए बाध्यकारी होगा

मंत्री ने बताया कि बंटवारा के मसौदे के मानना सभी सदस्यों के लिए बाध्यकारी होगा। असहमत सदस्य भी इसे मानने के लिए बाध्य होंगे। मसौदे को सामाजिक मान्यता देने के लिए पंचायत के मुखिया और चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे उम्मीदवार के अलावा वार्ड सदस्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी दस्तखत करेंगे। कानून के जरिए मसौदे को सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रारूप विधि विभाग में जाएगा। वहां से लौटने के बाद उसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कोशिश यह है कि चकबंदी से पहले जमीन से जुड़े सभी तरह के विवाद निपट जाएं। 

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