लोकसभा चुनाव: मुंगेर में आमने-सामने की जंग और नए किरदारों की कथा, जानिए

पटना [भुवनेश्वर वात्स्यायन]। मुंगेर की चुनावी जंग की चर्चा में चटकारे के साथ भले ही किस्म-किस्म की बातें हो रहीं हैं, पर कहानी नए किरदारों की कथा और स्लुईस गेट के साथ तीनफसला हुई टाल की जमीन की भी है। सरकार और सियासत के साथ यहां आधारभूत संरचना पर भी खूब बातें करते हैैं लोग।
वोटर खासकर ग्रामीण वोटरों से आप बात करेंगे तो वे तरह-तरह के तिलस्म, किस्से व व्यक्ति विशेष की छवि से अधिक अपनी सहूलियतों की बात करते हैं। उनकी सोच के केंद्र में प्रत्याशी से अधिक यह विषय है कि नमकहराम नहीं कहें लोग उन्हें। अपने अंदाज में कहते हैैं-जो देगा उसको भजेंगे।
कथा स्लुईस गेट और तीनफसला हुए टाल की
मुंगेर की जंग का एक बड़ा कोण बड़े इलाके में फैले टाल का है। एक जमाने में टाल का इलाका दुर्गम इलाके के रूप में जाना जाता था। एक बार गए तो फिर उस दिन लौट कर नहीं आ सकते। टाल के  भीतर अब सड़क बनी है। जदयू का दावा है कि आवागमन को लेकर सुगम हुए टाल के मूल में नीतीश कुमार हैैं।
टाल के जमा पानी को निकालने व रोकने के लिए स्लुईस गेट पर काम हो रहा है। टाल की जमीन पहले केवल एक फसल मसूर के लिए थी पर अब तीनफसला हो गई है। धान और सब्जी हो रही। संपर्कता और सहूलियत को जदयू अपना प्लस बता रही। वहीं महागठबंधन के लोगों का कहना है कि नेता हमेशा उपलब्ध रहे हर सुख-दुख में यह बात वह अपने वोटरों को बता रहे।
नई कहानी और किरदार कथा
इस बार के आम चुनाव में मुंगेर की जंग नई कहानी व नए किरदार के साथ है। सांसद वीणा देवी चुनाव मैदान में नहीं हैैं। एनडीए का अंग हो चुके जदयू को सीट शेयरिंग के तहत मुंगेर की सीट मिली है। जदयू ने ललन सिंह को ही अपना प्रत्याशी बनाया है।
किरदारों की नई कथा यह है कि राजद के प्रत्याशी प्रगति मेहता को 2014 के आम चुनाव में 1,82,971 वोट मिले थे वह काफी पहले जदयू में शामिल हो चुके हैैं। वर्ष 2009 के आम चुनाव में राजद प्रत्याशी रामबदन राय को 184956 वोट मिले थे अब जदयू में हैैं।
वर्ष 2014 में अशोक कुमार सिंह जदयू से मिलते-जुलते चुनाव चिन्ह पर शिवसेना से मैदान में थे। उन्हें जो पचास हजार वोट आए थे उस बारे में जदयू का दावा था कि उनके  वोटरों ने चुनाव चिन्ह के भ्रम में शिवसेना प्रत्याशी को वोट दे दिया। इस बार यह कोण मुंगेर में नहीं है। 
किरदारों की नई कथा के बाद नई कहानी मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत कुमार सिंह की पत्नी नीलम देवी के चुनाव मैदान में आने की है। एक जमाने में अनंत सिंह सभी तरह की चर्चा के बीच बिना किसी लाग-लपेट के ललन सिंह के साथ थे। आज इस नारे के साथ कांग्रेस के टिकट पर उनकी धर्मपत्नी मैदान में हैैं कि जनता के लिए चौबीस घंटे उनका घर खुला है। मुंगेर का मुकाबला इस बार आमने-सामने का हो गया है।
यह है पुरानी कहानी
मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के दो आम चुनावों की पुरानी कहानी यह है कि वर्ष 2009 के आम चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को वहां सफलता मिली थी। ललन सिंह को 374317 वोट आए थे और निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे राजद के रामबदन राय को 184956 वोट मिले थे।
तीसरे नंबर पर कांग्रेस के रामलखन सिंह थे। उन्हें 27,929 वोट आए थे। वर्ष 2014 के आम चुनाव में ललन सिंह फिर से जदयू के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। उन्हें 2,43,827 वोट मिले थे पर वह चुनाव हार गए थे। लोजपा प्रत्याशी वीणा देवी ने उन्हें पराजित किया था और उन्हें 3,52,911 वोट आए थे।
तीसरे नंबर पर राजद के प्रगति मेहता थे और उन्हें 1,82,971 वोट मिले थे। एक कोण चौथे नंबर का था। जदयू के चुनाव चिन्ह से मिलते-जुलते चिन्ह पर शिव सेना के टिकट पर अशोक कुमार सिंह चुनाव मैदान में थे और उन्हें 50,469 वोट आ गए थे।
पुराने आंकड़े का यथार्थ
पुराने मतों पर दावे का यथार्थ इस तरह से है कि जदयू यह कह रहा पिछले आम चुनाव में लोजपा प्रत्याशी और जदयू प्रत्याशी को मिले वोट को जोड़ दें तो गणित क्या कहेगा यह सभी जानते हैैं। वर्ष 2009 का परिणाम पहले से है। वहीं कांग्रेस का गणित यह है कि उसे राजद, रालोसपा व हम के कोर वोटरों का पूरा साथ है।
जदयू और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी एक जाति के हैैं इसलिए जातिगत वोटों को लेकर बहुत दावे नहीं हैैं। मुुंगेर लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र हैैं। इनमें भाजपा के खाते में बाढ़, लखीसराय, जदयू के पास जमालपुर है तो राजद के पास सूर्यगढ़ा और मुंगेर है। मोकामा से अनंत सिंह ही हैैं। 

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