बिहार में भाजपा के पन्ना प्रमुखों से मुकाबले के लिए तैयारी में जुटा लालू-तेजस्वी का राजद

माइक्रो लेवल पर कवायद की जा रही है। जदयू ने ग्राम स्तर पर कमेटियां बनाकर संगठन को विस्तार देने की घोषणा की है तो राजद ने बूथ स्तर की कमेटियों को वैचारिक रूप से सशक्त बनाने की तैयारी कर रखी है।

Akshay PandeyMon, 20 Sep 2021 11:10 PM (IST)
बिहार में बीजेपी और राजद एक दूसरे से मुकाबले को तैयारी कर रहे हैं। सांकेतिक तस्वीर।

राज्य ब्यूरो, पटना: बिहार में चुनाव नहीं है। फिर भी राजनीतिक दलों में संगठन को निचले स्तर तक मजबूत बनाने की बेताबी है। माइक्रो लेवल पर कवायद की जा रही है। जदयू ने ग्राम स्तर पर कमेटियां बनाकर संगठन को विस्तार देने की घोषणा की है तो राजद ने बूथ स्तर की कमेटियों को वैचारिक रूप से सशक्त बनाने की तैयारी कर रखी है। राजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांव-गांव में फैले भाजपा के पन्ना प्रमुख हैं, जिनसे मुकाबले के लिए उसी तरह की संगठनात्मक नीति जरूरी है। राजधानी में मंगलवार से शुरू होने जा रहे राजद के प्रशिक्षण शिविर का मकसद भाजपा-जदयू से मुकाबले की अग्रिम तैयारी का है। इसमें प्रखंड अध्यक्षों की बड़ी भूमिका होगी। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव की अध्यक्षता में प्रशिक्षण का मसौदा तैयार कर लिया गया है। 

बिहार में राजद को कार्यकर्ता आधारित पार्टी माना जाता है, किंतु यह भी सच है कि इसे व्यवस्थित, वैचारिक एवं अनुशासित बनाने के लिए काफी काम करना होगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मंशा अगले चुनाव से पहले राजद को गांव-गांव में भाजपा के बराबर भावनात्मक रूप से प्रभावी बनाना है, ताकि वैचारिक स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाकर शीर्ष नेतृत्व की बात वोटरों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। यह भी सुनिश्चित हो सके कि वोट के दिन राजद के समर्थक बूथों तक पहुंचें और प्रतिबद्धता के साथ मतदान करें। सामान्य दिनों में राजद के बारे में फैलाए जा रहे भ्रम के बारे मेें लोगों को बताए। 

भाजपा से आगे की होगी भूमिका 

राज्य में अभी बूथ स्तर तक किसी दल की कमेटी नहीं है। पहला प्रयोग राजद ने किया है। प्रारंभ तो लोकसभा चुनाव के दौरान कर दिया गया था। अब सशक्त बनाने का प्रयास है। प्रत्येक कमेटी में कम से कम 11 सदस्य होंगे, जिनपर उस बूथ के सभी नए मतदाताओं का पहचान पत्र बनवाना तथा दिवंगत एवं स्थानांतरित वोटरों के नाम सूची से हटवाने की जिम्मेवारी होगी। भाजपा में यही काम पन्ना प्रमुख करते हैैं। पन्ना मतलब पेज यानी मतदाता सूची के एक पन्ने में करीब 30 वोटरों के नाम होते हैं। अपने पन्ने के सभी वोटरों का पूरा हिसाब पन्ना प्रमुख की जानकारी में होता है। वोट के दिन उन्हें बूथों तक ले जाने की जवाबदेही भी होती है। राजद की बूथ स्तर की कमेटियों की भूमिका इससे भी आगे की होगी। सामान्य दिनों में भी वे अपने समर्थकों के संपर्क में रहेंगे। 

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