बिहार में ऑक्‍सीजन प्‍लांट लगाने में बाधक है सरकार की नीति, आइएम के अध्‍यक्ष ने कही बड़ी बात

बिहार के अस्‍पतालों में ऑक्‍सीजन सिलेंडर की कमी। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

बिहार के बड़े अस्पतालों में उद्योग एक्ट ने लगाया ऑक्सीजन प्लांट पर ग्रहण ऑक्सीजन गैस प्लांट लगने के बाद अस्पताल पर भी लागू हो जाता है उद्योग एक्ट प्लांट लगाने में लगभग एक दर्जन दफ्तरों से लेना पड़ता है अनापत्ति प्रमाणपत्र

Shubh Narayan PathakSun, 18 Apr 2021 11:35 AM (IST)

पटना, जागरण संवाददाता। Bihar Coronavirus Update Oxygen Cylinder Crisis: बिहार में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच ऑक्‍सीजन सिलेंडर की कमी ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। राजधानी पटना के कमोबेश सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर का संकट है। कई अस्पतालों में बीते वर्ष कोरोना की पहली लहर के बाद ही ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद की गई थी, लेकिन उद्योग एक्ट रोड़ा बन रहा है। इसे लगाने के लिए उद्योग विभाग की नीति को अस्पतालों पर मानना होगा। इन्हीं नियमों के कारण कई बड़े अस्पताल भी प्लांट लगाने से पीछे हट गए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने भी सरकार की नीतियों को गलत बताया है।

उद्योग विभाग की शर्त के कारण पीछे हट रहे अस्‍पताल

आइएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह ने बताया कि कोविड की पहली लहर आने बाद कई अस्पतालों की ओर से अपने यहां भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद शुरू की गई। प्लांट लगाने के लिए उद्योग विभाग की एक दर्जन से अधिक प्रक्रिया से गुजरने की मजबूरी के साथ-साथ उनकी शर्तों को भी मानने की बाध्यता हो रही थी। पूरा खर्च भी उसी के अनुसार तय हो रहा था। अस्पताल क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट से चलता है।

तकनीकी बाधा और तामझाम के चलते परहेज

पटना न्यूरोलॉजिकल सोसायटी के डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में उनके द्वारा पाटलिपुत्र स्थित अस्पताल में प्लांट लगाने की कवायद की गई। इसे लगाने में तकनीकी बाधा एवं उद्योग एक्ट के तामझाम बढऩे के कारण प्लांट नहीं लग पाया। सामान्य अस्पताल के पास मैनपावर की कमी होती है, जबकि कॉरपोरेट अस्पताल के पूरी विंग प्रबंधन की होती है। साथ ही, पहले आसानी से ऑक्सीजन सिलेंडर मिल भी जा रहे थे।

एक ऑक्‍सीजन

इसी कारण से बिहार के अस्‍पताल ऑक्सीजन के लिए दूसरे पर निर्भर हैं। वर्तमान में किसी भी अस्पताल को प्लांट लगाने के लिए 25-30 अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। सरकार इन सभी बाधाओं को सिंगल विंडो से दूर करने की कोशिश करे तो अस्पतालों को अपने संसाधन मजबूत करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

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