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आतंकी फंडिंग करने वाले गुलाम मुस्‍तफा का है बिहार कनेक्‍शन, अवैध ई-टिकटिंग का करता था धंधा

पटना [चन्द्रशेखर/ रजनीश]। ई-टिकट के काले कारोबार में गिरफ्तार झारखंड निवासी गुलाम मुस्तफा का बिहार कनेक्‍शन है। गुलाम मुस्तफा 2015 से ही यूपी के बस्ती निवासी हामिद अंसारी से जुड़ा है। हामिद ने कुछ दिनों तक पटना में रहकर ई-टिकट बुक करने वाले अपने सॉफ्टवेयर को बेचने का कारोबार शुरू किया था। गुलाम मुस्तफा के माध्यम से ही उसने बिहार में नेटवर्क शुरू किया था। इतना ही नहीं, अवैध रूप से रेलवे में ई-टिकट काटकर हवाला के जरिए आतंकी फंडिंग करने वाले बेंगलुरु में गिरफ्तार किए गए गुलाम मुस्तफा का भागलपुर से भी वर्षों पुराना कनेक्शन सामने आया है।  

बस्ती के हामिद अंसारी को पहले भी टिकट की दलाली में आरपीएफ गिरफ्तार कर चुकी है। जेल से छूटने के बाद उसने तत्काल टिकट बुक करने वाले सॉफ्टवेयर निर्माण की कोशिश शुरू कर दी। इंटरनेट के माध्यम से इजरायल की एक सॉफ्टवेयर कंपनी के संपर्क में आया। उसने सबसे पहले ब्लैक टीएस के नाम से डोमेन बनाया। इससे एक बार में 500 टिकट बुक होने लगे। शुरू में इसकी मार्केटिंग बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, मुंबई व दिल्ली में करने लगा। धंधा बढऩे पर आरपीएफ की टीम भी सक्रिय हो गई। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह नेपाल से धंधा संचालित करने लगा। गुलाम मुस्तफा उसके धंधे को भारत में देखने लगा। 

मुस्‍तफा के गिरोह में जहानाबाद के भी थे दो लोग

गुलाम मुस्तफा के गिरोह में जहानाबाद के महबूब एवं दाउद भी आ गए। उसने ब्लैक टीएस के साथ ही रेड मिर्ची के नाम से सॉफ्टवेयर बनाकर इसकी मार्केटिंग शुरू कर दी। 2018 में ही हामिद अंसारी चर्चा में आया। मुंबई आरपीएफ की विशेष टीम भी उसके गिरोह के दो लोगों को गिरफ्तार करने पटना पहुंची थी। जहानाबाद निवासी मो. महबूब एवं मो. दाउद को गिरफ्तार कर दोनों को अपने साथ मुंबई ले गई। दोनों ने पूछताछ के दौरान ही नेपाल में बैठे आका मो. हामिद अंसारी एवं गुलाम मुस्तफा का नाम बताया। 

रेड मिर्ची के पैसे डाले जाते थे मुस्‍तफा के अकाउंट में

महबूब व दाउद ने बताया कि रेड मिर्ची से मिले सारे पैसे गुलाम मुस्तफा के बैंक खातों में डाले जाते थे। हर शहर में उसने खाता खोल रखा था। 2019 में रेड मिर्ची काफी चर्चा में आ गई। आरपीएफ की विशेष टीम यह मानकर चल रही है कि हामिद अंसारी ही हामिद अशरफ के नाम से नेपाल के बाद दुबई में जाकर बैठ गया है। इसके बाद उसने रेड मिर्ची को बंदकर इजरायल की सॉफ्टवेयर कंपनी से ही एएनएमएस नाम से नई कंपनी खोल दी। इसके नाम से सॉफ्टवेयर बाजार में आ गया। गुलाम मुस्तफा ने देश के कोने-कोने में एजेंट रखा था। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान यह बात उभरकर सामने आई है कि उनका मजबूत नेटवर्क कोलकाता में भी है। अकेले कोलकाता में प्रतिदिन 5000 से अधिक तत्काल टिकटों की बुकिंग हो रही है।

भागलपुर से भी रहा है मुस्‍तफा का जुड़ाव

इतना ही नहीं, गुलाम मुस्तफा का भागलपुर से भी वर्षों पुराना कनेक्शन सामने आया है। यहां के कई साइबर संचालकों से उसके अच्छे संबंध थे। जिले से हर महीने मोटी रकम उसे भेजी जाती थी। 20 जनवरी को अवैध रूप से ई-टिकट का धंधा करने के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की गिरफ्त में आए मो. जुनैद राज और मो. इमरान ने पूछताछ में यह स्वीकार किया है। अब आरपीएफ उन दोनों के बैंक अकाउंट खंगालने में जुट गई है। अकाउंट डिटेल आने के बाद स्पष्ट होगा कि उन दोनों ने मुस्तफा को अब तक कितनी फंडिंग की है। 

भागलपुर के दो लोगों के नाम लिये थे

बेंगलुरु में पांच दिन पूर्व आरपीएफ की छापेमारी में गुलाम मुस्तफा का नाम सामने आया था। इसके बाद भुवनेश्वर से उसकी गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तारी के दौरान मुस्तफा ने भागलपुर के दो लोगोंं मो. जुनैद राज और मो. इमरान के नाम लिये थे। उसकी निशानदेही पर भागलपुर आरपीएफ इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह ने स्थानीय मोजाहादिपुर थाना क्षेत्र से जुनैद राज और जगदीशपुर थाना क्षेत्र के पुरैनी गांव से इमरान को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन दोनों ने बताया कि मुस्तफा से कई वर्षों से उनके संबंध हैं। ई-टिकट के धंधे से आने वाले पैसों को मुस्तफा के अकाउंट में भेजा जाता था। 

मुस्तफा को एक टिकट पर एक हजार देता था  

आरपीएफ की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे एक टिकट  (पीएनआर) पर मुस्तफा को एक हजार रुपये दिया करते थे। दोनों अमूमन महीने में सौ से डेढ़ सौ टिकटें काटते थे। हर महीने मोटी रकम भेजी जाती थी। आरपीएफ इन दोनों की सभी आइडी की जांच कर रही है। 

मुस्तफा ने ही 'एएनएमएस' सॉफ्टवेयर कराया था उपलब्ध 

हवाला और आंतकियों को फंडिंग करने वाले गुलाम मुस्तफा ने ही भागलपुर के दोनों साइबर संचालकों को 'एएनएमएस' सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए थे। लेकिन उसके इस्तेमाल का तरीका पता नहीं होने के कारण मो. जुनैद राज और मो. इमरान उस सॉफ्टवेयर से टिकटें नहीं काट सके। आरपीएफ ने यह कार्रवाई इस संबंध में बेंगलुरु की आरपीएफ से मिली इनपुट के आधार पर की। 

घर पर साइबर कैफे की आड़ में चल रहा था धंधा  

जुैनद और इमरान साइबर कैफे की आड़ में ई-टिकट का धंधा करते थे। उन दोनों ने कई फर्जी नामों से ई-टिकट काटने के लिए कई आइडी बना रखी थी। गुलाम मुस्तफा ही उसे आइडी बनाकर उपलब्ध कराता था। वे दोनों घर से ही वर्षों से यह धंधा चला रहे थे। आरपीएफ ने दोनों के पास से कटे हुए कई आरक्षित टिकट, लैपटॉप, मोबाइल और एक सॉफ्टवेयर जब्त किए। रेल पुलिस ने उन दोनों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। 

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