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Bihar Lockdown Again: फिर लगे लॉकडाउन में हो रहे बोर? नो प्रॉब्‍लम- पटना की इन विरासतों का करिए वर्चुअल दीदार

पटना, जेएनएन। कोरोना संक्रमण व उसके कारण एक बार फिर जगह-जगह लॉकडाउन ने लोगों को घरों तक सिमटने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अगर आप बोर हो रहे हों तो पर्यटन स्‍थ्‍ालों की वर्चुअल सैर कर सकते हैं। राजधानी पटना की बात करें तो यह प्राचीन शहर इस मामले में काफी समृद्ध है। इनमें हजारों साल पुराने स्‍थलों से लेकर आधुनिक इमारतें तक शामिल हैं। बिहार पर्यटन विभाग की वेबसाइट और बिहार विरासत समिति ऐसे स्‍थलों की जानकारी देने में लगी हैं।

पटना के स्‍थल इतिहास के अलग-अलग दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं। पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर इनकी जानकारी दी गई है। बिहार विरासत समिति व सोसाइटी की वेबसाइट्स पर भी इनकी जानकारी उपलब्‍ध है। बिहार सरकार की वेबसाइट (http://www.bihartourism.gov.in/home.html) पर आप पटना सहित बिहार के तमाम पर्यटक स्थलों का वर्चुअल टूर कर सकते है। बिहार राज्य पर्यटन निगम की वेबसाइट (http://bstdc.bih.nic.in/) पर भी इन स्थलों की जानकारी दी गई है।

आखिर पटना के गोलघर को कौन नहीं जानता?

पटना की बात करें तो यहां के गोलघर को कौन नहीं जानता? 1786 में पटना में गांधी मैदान के पास बनी यह इमारत एक गोदाम है, जिसे ब्रिटिश फौज के लिए अनाज़ भंडारण के लिए बनवाया गया था। एक वक्‍त था, जब इसकी छत से पूरे शहर व गंगा को निहारा जा सकता था। अब अनेक बहुमंजिली इमारतों के कारण ऐसा संभव नहीं। इसमें कहीं भी स्तंभ नहीं है। गोलघर के अंदर आवाज 27 से 32 बार प्रतिध्वनित होती है। सवाल यह है कि क्‍या पटना गोलघर जैसी कुछ धरोहरों तक सीमित है? आखिर यहां क्‍या है खास, जो हम कम या नहीं जानते हैं?

कुआं, जिसमें दफन हैं सम्राट अशोक के 99 भाई

मौर्य-गुप्तकालीन स्थलों की बात करें तो पटना के गुलजारबाग में स्थित अगम कुआं का जिक्र जरूरी है। कहा जाता है कि मगध की सत्‍ता हासिल करने के लिए अशोक ने अपने 99 भाईयों को मरवाकर इसी कुएं में फेंक दिया था। इसके अलावा पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल से कुछ किमी दूर कंकड़बाग-बाइपास रोड पर स्थित कुम्‍हरार में मौर्य कालीन अवशेष हैं।

अलाउद्दीन, शेरश्‍ााह व शाहजहां काल की मस्‍िजदें

पटना सिटी क्षेत्र में पटना में बनी सबसे बड़ी मस्जिद है, जिसका निर्माण 1489 में बंगाल के शासक अलाउद्दीन शाह ने कराया था, लेकिन इसे बेगम हज्जाम की मस्जिद कहते हैं। कारण यह कि इसका जीर्णोद्धार बेगू हज्जाम ने कराया था। पटना में दो और प्राचीन मस्जिदें है- शेरशाह की मस्जिद और पत्थर की मस्जिद। उन्‍हें क्रमश: शेरशाह सूरी व मुगल शासक जहांगीर के पुत्र तथा शाहजहां के बड़े भाई शाह परवेज ने बनवाए थे।

यहां रहकर मदर टेरेसा ने पायी थी नर्सिंग शिक्षा

पटना सिटी स्थित 1713 में स्थापित संत मेरी चर्च कालक्रम में पादरी की हवेली नाम से जाना गया। बिहार का यह प्राचीन चर्च को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी तथा बंगाल के नवाब मीर कासिम की जंग तथा 1857 की क्रांति के दौरान क्षति पहुंचाई गई थी। नोबेल पुरस्‍कार प्राप्‍त मदर टेरेसा ने 1948 में इसी र्च में रहकर नर्सिंग का प्रशिक्षण लिया था।

 

पवित्र गुरुद्वारा, जहां हैं गुरु गोविंद सिंह की यादें

पटना का तख्त श्रीहरमंदिर साहिब सिखों का पवित्र स्‍थल है। यह सिखों के 10वें और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह के जन्‍म-स्‍थल से जुड़ा है। गुरु गोविन्द सिंह के बचपन के कुछ साल पटना सिटी में बीते थे। यहां गुरु गोविंद सिंह से संबंधित अनेक स्‍मृतियां संजोकर रखी गईं हैं। यहां हर साल गुरु गोविंद सिंह प्रकाशोत्‍सव के अवसर पर सिख श्रद्धालु व पर्यटक दूर-दूर से आते हैं।

मंदिर जहां रखा राम सेतु का तैरने वाला पत्थर

पटना सिटी इलाके में देवी दुर्गा के दो प्राचीन पाटन देवी मंदिर हैं- बड़ी पाटन देवी मंदिर और छोटी पाटन देवी मंदिर। यह मां दुर्गा का निवास स्थान माना जाता है। यहां की मूर्तियां काले पत्थर से बनी हुई हैं। पटना जंक्‍शन के पास स्थित हनुमान मंदिर भी उल्‍लेखनीय है। आजादी के दौर में पंजाब से आए हिंदू शरणार्थियों ने पहले से स्थित इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 1987 में इसे वर्तमान स्‍वरूप मिला। यहां राम सेतु का 15 किलाे का पानी मेंं तैरने वाला एक पत्थर रखा हुआ है। इसके पास ही एक मस्जिद भी है। मस्जिद के साथ खड़ा यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी माना जाता है।

पार्क, जहां रखे छह देशों से लाए बुद्ध के अवशेष

पटना जंक्‍शन के पास ही 22 एकड़ भूमि पर बुद्ध स्‍मृति पार्क है। इसमें बनाए गए दो सौ मीटर ऊंचे स्तूप में छह देशों से लाए गए भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष रखे गए हैं।  27 मई 2010 को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने इसका लोकार्पण किया था। यह पूरी दुनिया के बौद्ध पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

दरगाह, जहां सभी धर्मों के अनुयायी रखते आस्‍था

पटना शहर से करीब 30 किमी दूर मनेरश्‍ारीफ में दो मजारें हैं। सूफी संत मखदमू याहिया मनेरी की मजार 'बड़ी दरगाह' तथा शाह दौलत या मखदमू दौलत की तजार 'छोटी दरगाह। यहां सभी धर्मों के अनुयायी आस्‍था रखते हैं। यहां की बड़ी दरगाह 1180 की बनी है।

यहां से जुड़ीं 1942 व कारगिल शहीदों की यादें

पटना में बिहार विधान सभा के मुख्य द्वार के सामने एक शहीद स्‍मारक है। साल 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान विधान सभा भवन के पर तिरंगा फहराने के प्रयास में शहीद हुए युवकों की याद में पहले राज्यपाल जयरामदास दौलतराम ने 15 अगस्त 1947 को इसका शिलान्‍यास किया था। इसके अलावा कारगिल युद्ध के शहीदों की याद में पटना के गांधी मैदान इलाके में कारगिल स्‍मारक भी है।

कम नहीं ये संग्रहालय, चिडि़याघर व विज्ञान केंद्र

पटना में और भी बहुत कुछ हैं। साल 1973 में बना संजय गांधी जैविक उद्यान भी है। यहां बाघ, तेंदुए, हिप्पोपोटामस, मगरमच्छ, हाथी, काले भालू, काले हिरन, जंगली बिल्ली, घडि़याल, चिम्पांजी, जेब्रा, जिराफ आदि अन्य जीव-जंतु देखने को मिलते हैं। पटना में 1917 में बना पटना संग्रहालय एक छत के नीचे अनेक प्राचीन धरोहरों को समेटे हुए है। यहां नव पाषाणकालीन पुरावशेष व चित्र, दुर्लभ सिक्के, कलाकृतियां व पांडुलिपियां हैं। यहां वैशाली में लिच्छवियों द्वारा भगवान बुद्ध की मृत्यु के बाद बनवाए गए प्राचीनतम मिट्टी के स्तूप से प्राप्त बुद्ध के दुर्लभ अस्थि अवशेष भी रखे हैं। यहां चीड़ के एक पेड़ का जीवाश्म भी रखा है। इसके अलावा पटना के बेली रोड पर एक और आधुनिक संग्रहालय बनवाया गया है।

अगर आपकी विज्ञान में रूचि है तो गांधी मैदान के पास श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र है। यहां साइंस गैलरी तथा डायनोसोर व जैव विकास दिखाते पार्क हैं तो साइंस शो भी होते हैं। इसमें चित्रों, मॉडल तथा फिल्‍मों से जरिए विज्ञान के विभिन्न पहलूओं को समझाया गया है। विज्ञान केंद्रों में पटना का इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर (तारामंडल) भी उल्‍लेखनीय है। यहां अंतरिक्ष पर आधारित कार्यक्रम दिखाए जाते हैं।

वेबसाइट्स पर तमाम पर्यटन स्‍थलों की जानकारी

पर्यटन विभाग की वेबसाइट पटना सहित बिहार के अन्‍य पर्यटन स्‍थलों की जानकारी दी गई है। बिहार विरासत समिति की ओर से भी बिहार की विरासतों की जानकारी वेबसाइट पर दी गई है। हेरिटेज सोसाइटी की वेबसाइट पर भी पटना के साथ ही अलग-अलग जिलों की जानकारी उपलब्‍ध है। हेरिटेज सोसाइटी के डॉ. अनंताशुतोष कहते हैं कि सोसाइटी की ओर से प्रमुख विरासतों को बचाने के लिए पहल जारी है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान विरासत से जोडऩे के लिए सोसाइटी की ओर से 'मेमरी विथ हेरिटेज' नाम से अभियान की शुरुआत की गई है। पर्यटन विभाग के अनुसार सरकार की वेबसाइट (http://www.bihartourism.gov.in/home.html) पर बिहार के तमाम विरासत स्थलों की जानकारी उपलब्ध है। इस साइट के जरिए आप न सिर्फ विरासतों के बारे में जानकारी ले सकते हैं, बल्कि यहां वर्चुअल टूर का मौका भी मिलता है। बिहार राज्य पर्यटन निगम की वेबसाइट (http://bstdc.bih.nic.in/) से भी आप पर्यटन स्थलों को जान सकते हैं।

विरासतों को जानने के ये हैं ऑनलाइन ठिकाने

- www.heritagesociety.in

- http://www.bihartourism.gov.in/home.html

- http://bstdc.bih.nic.in/

- www.incredibleindia.org

- tourism.gov.in

- https://archive.org/

- http://asi.nic.in/

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