बिहार के चार हाथ व चार पैर वाले दीपक को मिली नई जिंदगी, स्वजन बाेले- थैंक्‍यू जागरण, नहीं भूलेंगे एहसान

बिहार के बक्‍सर के दीपक को मिली नई जिंदगी। तस्‍वीर: जागरण।

बिहार के बक्‍सर में सातवीं के मेधावी छात्र दीपक को देखकर कोई नहीं कह सकता कि कुछ साल पहले तक वह चार हाथ व चार पैर वाला उपहास का पात्र बच्‍चा था। दैनिक जागरण की पहल पर उसका ऑपरेशन हुआ। आइए जानते हैं उसकी कहानी।

Amit AlokFri, 19 Feb 2021 03:29 PM (IST)

बक्‍सर, रंजीत कुमार पांडेय। एक मां के लिए इससे बड़ी टीस क्या होगी कि उसके ढाई साल के बच्चे को देखकर लोग हंसे, दूसरे बच्चे देख कर उसका मजाक उड़ाएं। बक्सर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर सिकरौल के बेलहरी गांव की इन्दु देवी इसी दुख के साए में जी रही थी। तीन बच्चों में उसके सबसे छोटे बेटे दीपक को शारीरिक दोष था। उसके पेट से अतिरिक्त दो हाथ और दो पैर निकले थे। लोग उसे देखते तो गरीब पिता वीरेश और उसके परिवार को सांत्वना देते, लेकिन पीठ पीछे बच्चे पर हंसते थे।

करीब 10 साल पहले, जब दीपक ढ़ाई साल का रहा होगा, जनहित पत्रकारिता के वाहक दैनिक जागरण की नजर उसपर पड़ी। जागरण ने परिवार के दर्द को उजागर करते हुए बच्चे की स्थिति पर खबर दी। उसे देखकर इंग्लैंड में भारतीय लोगों के लिए एनजीओ संचालित करने वाली एक संस्था सहयता के लिए आगे आई। इलाज के बाद साल 2012 में दीपक जब स्वस्थ्य होकर घर लौटा, तब उसके घर में दिवाली मनी। आज 13 साल का दीपक सातवीं कक्षा में पढ़ता है। वह पढ़-लिख कर अफसर बनना चाहता है।

दैनिक जागरण में छपी खबर से मिली नई जिंदगी

बात 07 मार्च 2010 की है। डुमरांव स्थित हरियाणा फॉर्म में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आए थे। उसी दिन दैनिक जागरण ने "जलते दीपक को खिलखिलाने का इंतजार" शीर्षक से खबर दी। इंटरनेट मीडिया में इंग्‍लैंड में भारतीय लोगों के लिए संचालित एक एनजीओ ने इसे गंभीरता से लिया। उसकी पहल पर वहां से डॉ. लूसी बक्‍सर पहुंचीं। एनजीओ के सहयोग से बंगलोर में बच्‍चे का सफल ऑपरेशन हुआ। इसके बाद आगे भी कई महीने इलाज चला। दीपक 2012 में पूरी तरह स्‍वस्‍थ्‍य होकर घर आया तो फिर जागरण में 'मजाक का पात्र बना दीपक खिलखिलाया' शीर्षक से खबर छपी।

माता-पिता ने छोड़ दी थी उम्‍मीद, नहीं भूलेंगे एहसान

एक सप्ताह पूर्व क्षेत्र भ्रमण के दौरान जागरण के संवाददाता को देखकर दीपक के माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बच्चे के पिता और मजदूर बीरेश पासवान ने कहा कि जागरण की बदौलत ही उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है। दीपक की मां इन्दु देवी ने कहा कि 10 साल पहले इतना पैसा नहीं था कि 18-20 लाख रुपये खर्च कर अपने जिगर के टुकड़े का आपरेशन करा सकें। जागरण के चलते दीपक को नई जिंदगी मिली है। माता-पिता ने कहा कि उन्‍होंने तो उम्‍मीद छोड़ दी थी। यह एहसान वे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।

लोगों ने भी कहा जागरण ने किया नेक काम

कचहरी बेलहरी के सरपंच वीरेंद्र पासवान ने कहा कि मजाक के पात्र बने दीपक के चेहरे पर जो मुस्कान लौटी है, वह दैनिक जागरण की देन है। पंचायत के पूर्व मुखिया सुनील पासवान तथा भारतीय जनता पार्टी के नेता संतोष कुमार दुबे के साथ-साथ पंचायत क्षेत्र के परसागंडा निवासी नवीन प्रधान सहित कई अन्‍य ग्रामीणों ने भी दीपक को नई जिंदगी दिलाने के लिए जागरण का आभार जताया।

पढ़ लिख कर अधिकारी बनना चाहता है दीपक

बहरहाल, बचपन में अपने गांव में लोगों के लिए जीता-जागता खिलौना बना दीपक अब सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी जी रहा है। वह पढ़-लिख कर बड़ा अधिकारी बनना चाहता है। वह बड़ा होकर अपनी तरह गरीब व बेबस लोगों के लिए काम करना चाहता है। कभी बच्‍चों के चिढ़ाने के भय से स्‍कूल जाने से इनकार करने वाला यह बच्‍चा अब अपने गांव के मध्‍य विद्यालय का होनहार छात्र है। मध्‍य विद्यालय बेलहरी के प्रधानाचार्य संजय भारती के अनुसार दीपक एक अनुशासित छात्र है, जिसपर विद्यालय परिवार को पूरा भरोसा है। वह भविष्य में जरूर बेहतर करेगा।

 

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