लॉकडाउन में चल रहा था फर्जी ई पास का खेल, एसडीओ के जाल में ऐसे फंसे रोहतास के धंधेबाज

इस तरह का ई पास जारी करते थे धंधेबाज। जागरण

लॉकडाउन में वाहनों के लिए ई पास अनिवार्य है। ऐसे में रोहतास के डेहरी ऑन सोन में साइबर कैसे से फर्जी ई पास का धंधा चल रहा था। डीएम-एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से जारी किया जा रहा फर्जी ई-वाहन पास।

Vyas ChandraSat, 15 May 2021 07:32 PM (IST)

डेहरी ऑन-सोन  (रोहतास), संवाद सहयोगी। लॉकडाउन के दौरान वाहनों से आवाजाही के लिए ई-पास अनिवार्य किए जाने के बाद धंधेबाजों ने फर्जी ई पास (Fake E Pass) जारी करना शुरू कर दिया है। डीएम और एसडीओ के फर्जी हस्‍ताक्षर (Fake Signature) वाले ई पास के लिए धंधेबाज दो हजार रुपये प्रति पास तक वसूल करते थे। पूर्व डीएम व अनुमंडलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से ई पास निर्गत किया जाता था। शनिवार को इस मामले का भंडाफोड़ होने के बाद एएसपी व एसडीएम ने तीन साइबर कैफे की जांच कर पांच धंधेबाजों को गिरफ्तार किया है।गिरफ्तार धंधेबाज सुभाषनगर निवासी दीपक कुमार, विनोद कुमार एव डेहरी बाजार निवासी हिमांशु कुमार,अविषेक कुमार व विष्णु गुप्ता शामिल है।

एसडीओ ने मधुबनी व गोपालगंज के लिए बनवाया पास

धंधेबाजों ने अनुमंडलाधिकारी के भी दो वाहनों का पास दो-दो हजार रुपए में मधुबनी और गोपालगंज जाने के लिए बना दिया। एसडीएम सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अन्य जिले एव अन्य प्रांतों में जाने के लिए फर्जी ई पास बनाने वाले गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। तब गुरुवार को अपने दोनों सरकारी वाहनों का पास बनवाने के चालक को भेजा। एक मधुबनी जाने के लिए और दूसरा गोपालगंज जाने के लिए। ई पास बनवाने को थाना चौक स्थित साइबर कैफे एवं सुभाषनगर साइबर कैफे में चालक गया। थाना चौक वाले ने शुक्रवार को ही फोन किया कि पास ले जाइए। लेकिन सुभाषनगर वाले ने शनिवार को देने की बात कही थी। इसलिए पास मिलते ही दोनों साइबर कैफे में एएसपी संजय कुमार के साथ छापेमारी की गई ।

(छापेमारी करने पहुंचे अधिकारी। जागरण)

कई पदाधिकारियों का करते थे फर्जी हस्‍ताक्षर  

छापेमारी के क्रम में सुभाषनगर निवासी दीपक कुमार ने पकड़े जाने पर बताया कि मेरे बगल वाला भी यह कार्य करता है। उसकी निशानदेही पर उसके बगल के साइबर कैफे संचालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। बताते चलें कि सभी ई पास पर पूर्व जिला पदाधिकारी का फर्जी हस्ताक्षर धंधेबाज द्वारा किया जाता था। साथ में अनुमंडल पदाधिकारी के भी फर्जी हस्ताक्षर किए जाते थे। छापेमारी में इनके साथ नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक,अंचलाधिकारी अनामिका कुमारी, नगर थानाध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद गुप्ता भी शामिल थे।

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