बिहार विधानसभा में बार-बार विद्वान और काबिल कहे जाने से आजिज आए शिक्षा मंत्री, दिया ये जवाब

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राजद विधायक ललित यादव से कहा-अगर मेरे बारे में कोई गलतफहमी है तो इसमें शिक्षा विभाग का क्या दोष है। असल में ललित यादव हरेक वाक्य में शिक्षा मंत्री को विद्वान और काबिल बता रहे थे।

Akshay PandeyThu, 02 Dec 2021 07:59 PM (IST)
बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी। जागरण आर्काइव।

राज्य ब्यूरो, पटना : बार-बार विद्वान और काबिल कहे जाने से आजिज शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राजद विधायक ललित यादव से कहा-अगर मेरे बारे में कोई गलतफहमी है, तो इसमें शिक्षा विभाग का क्या दोष है। असल में ललित यादव हरेक वाक्य में शिक्षा मंत्री को विद्वान और काबिल बता रहे थे। लेकिन, शिक्षा विभाग की आलोचना भी कर रहे थे। उनका कहना था कि हरेक मानक पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है। ललित ने कहा-हम तो बोलेंगे ही। जनता हमें यहां घंटी बजाने के लिए नहीं भेजती है। चौधरी ने कहा कि वे नीति आयोग की रिपोर्ट पर भी जवाब देंगे। आपके राज में साढ़़े 12 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। अब सिर्फ 0.5 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर हैं।  

हम आपसे उम्र में बड़े हैं

ललित यादव और भाजपा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू के बीच भी नोंक झोंक हुई। ज्ञानू ने ललित के आरोपों का विरोध किया। ललित का कहना था कि ज्ञानूजी का संसदीय ज्ञान कमजोर है। वह हमारे बाद विधायक बनें। ज्ञानू ने जवाब दिया-हम आपसे उम्र में बड़े हैं। 62 साल के हम हो गए हैं।

विनोद मिश्र का पुत्र विदेश में

सदन में आज भाकपा माले के नेता स्व. विनोद मिश्र की भी चर्चा हो गई। भाकपा माले के विधायक सत्यदेव राम कह रहे थे कि विधायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में दाखिला लें तो स्कूलों की हालत अपने आप सुधर जाएगी। भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भाकपा माले के नेता विनोद मिश्र के पुत्र विदेश में पढ़ते हैं। सत्यदेव राम ने उन्हें चुनौती थी। आरोप को बड़ा झूठ बताया। कहा कि सच यह है कि विनोद मिश्र का कोई पुत्र है ही नहीं। 

90 हजार भूमिहीन, 52 एकड़ जमीन

सत्यदेव राम ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत कुमार के दावे का मजाक उड़ाया-मंत्रीजी का बयान छपा है कि 90 हजार गरीबों को घर बनाने के लिए पांच-पांच डिसमिल जमीन दी गई है। दी गई जमीन का कुल रकबा 52 एकड़ बता रहे हैं। यह कैसे संभव है कि इसी रकबा में 90 हजार भूमिहीनों को पांच-पांच डिसमिल जमीन दे दी गई। 

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