कोरोना के बाद फेफड़े की मजबूती पर दें ध्यान, नहीं तो फंगस का खतरा; बता रहे हैं पटना के विशेषज्ञ डाक्‍टर

Patna CoronaVirus News कोरोना के बाद मरीजों में कमजोरी व सीने में दर्द की शिकायत हो रही है। मरीज अब पोस्ट कोविड में डाक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। वहां डाक्टर भी मरीजों को फेफड़े की मजबूती के लिए योग व्यायाम पर जोर दे रहे हैं।

Shubh Narayan PathakMon, 21 Jun 2021 11:50 AM (IST)
कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद भी सावधानी जरूरी। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना, जागरण संवाददाता। Patna CoronaVirus News: कोरोना के बाद मरीजों में कमजोरी व सीने में दर्द की शिकायत हो रही है। मरीज अब पोस्ट कोविड में डाक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। वहां डाक्टर भी मरीजों को फेफड़े की मजबूती के लिए योग, व्यायाम पर जोर दे रहे हैं। एम्स व आइजीआइएमएस के विशेषज्ञ बताते हैं कि कोविड संक्रमित हो चुके 50 फीसद से अधिक मरीजों में फेफड़े की परेशानी है। आवश्यक सावधानी से पूरी तरह अपने को सुरक्षित रख सकते हैं।  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (बीपीएससी) प्लमोनरी मेडिसीन विभाग के डा. सौरभ करमकार ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के एक-डेढ़ महीने बाद काफी मरीज पहुंच रहे हैं।

फिलहाल फंगल इंफेक्शन के काफी मरीज आ रहे हैं। ये वे मरीज हैं, जो अप्रैल में संक्रमित हुए हैं। अभी बुखार, खांसी व खांसी में ब्लड आने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जहां इनका एचआरसीटी थोरैक्स कराया जाता है। इसमें लंग्स में गोल-गोल कैविटी है। इसका फाइबर आप्टिक ब्रांकोस्कोपी करने के बाद नमूना जांच करने पर पाया जाता है कि इनमें म्यूकर माइकोसिस के फंगल हैं।

खांसी में ब्लड या आक्सीजन लेवल कमने पर तुरंत पहुंचें अस्पताल

डा. सौरव करमाकर ने बताया कि कोरोना ठीक होने के बाद घर लौटने पर खांसी, बुखार, खांसी में ब्लड आने या आक्सीजन लेवल 94 से कम होने पर अविलंब डाक्टर से परामर्श कर सीटी स्कैन व ब्रोंकोस्कोपी कराएं। यह बीमारी अधिकांश लंग्स में फंगस के संक्रमण के कारण हो रहा है। बुजुर्ग मरीज या अनियंत्रित शुगर वाले मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

ठंड से बचें, पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जियां लें

आइजीआइएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डा. मनीष मंडल ने बताया कि लगातार फेफड़े की परेशानी वाले मरीज आ रहे हैं। फेफड़े को मजबूत करने के लिए हल्का व्यायाम, शारीरिक गतिविधि एवं घर के आसपास टहलना जरूरी है। साफ सुधरी हवा में रहें। ठंड से बचें। पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जियां लें। ठंडा पानी आदि का सेवन नहीं करें। दमा के रोगी नियमित इन्हेलर जरूर लें। साथ ही घर में बैलून फुलाएं। यदि संभव हो तो एसपाइरोमीटर का भी उपयोग कर सकते हैं।

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