देवशयनी एकादशी आज, यहां जानें पारण का समय; अगले चार महीने ये काम करने से होगा नुकसान

आज से चार महीने तक भगवान विष्णु करेंगे विश्राम आज है देवशयनी एकादशी घर में ही करें स्नान पूजा और व्रत इस दिन से भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवता योग निद्रा में चले जाते हैं और इस सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं

Shubh Narayan PathakTue, 20 Jul 2021 12:02 PM (IST)
आज है देवशयनी एकादशी, चातुर्मास हुआ शुरू। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

बक्सर, जागरण संवाददाता। आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी इसलिए भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि इस दिन से ही चातुर्मास व्रत प्रारंभ होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवता योग निद्रा में चले जाते हैं और इस सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। यही वजह है की इस चातुर्मास के समय में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा होती है। कर्मकांड केसरी आचार्य मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री ने बताया कि सोमवार की शाम 6 बजकर 57 मिनट से ही एकादशी तिथि प्रारंभ हो गई है जो आज मंगलवार की अपराह्न 4 बजकर 28 मिनट तक है। अत: उदया तिथि में होने के कारण एकादशी व्रत का स्नान-ध्यान, पूजन आज मंगलवार को ही करना लाभकारी होगा।

उन्होंने बताया कि व्रती श्रद्धालुओं को द्वादशी तिथि के समापन से पूर्व पारण बुधवार को प्रात: 5 बजकर 36 मिनट से दोपहर 2 बजे के बीच कर लेना बेहतर होगा। आचार्य ने कहा कि धर्मशास्त्र के अनुसार वर्षाकाल का चार महीना चातुर्मास कहलाता है। जो देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवोत्थान एकादशी के दिन तक रहता है। इस चातुर्मास व्रत में भगवान विष्णु सभी देवी देवताओं के साथ पाताल लोक में शयन करते हैं। जिसके चलते इस दौरान विवाह आदि कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसमें वर्जित कार्यों को करने से देवता नाराज हो जाते हैं।

चातुर्मास के दौरान वर्जित कार्य

चातुर्मास में विवाह, मुण्डन, जनेऊ आदि जैसे मांगलिक कार्य नहीं किये जाने चाहिए। सात्विक भोजन ही करें। गैर सात्विक भोजन करने से भगवान की अशुभता मिलती है। चातुर्मास महीनों के श्रावण मास में साग और पत्तेदार सब्जी, भादो में बैंगन, दही व अगहन में दूध तथा कार्तिक में लहसुन और उड़द की दाल खाना शुभ नहीं होता है। चातुर्मास व्रत में वर्षा ऋतु होने के कारण मसालेदार और तेलयुक्त भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए। इससे सेहत प्रभावित होता है। चातुर्मास व्रत में व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर नियमित रूप से व्रत और संयम का पालन करना चाहिए, देर तक सोना नुकसानदायक होता है। वर्षा ऋतु के कारण इस दौरान सूर्य और चंद्रमा की शक्ति कमजोर होती है। परिणाम स्वरूप व्यक्तियों में भी शक्ति का ह्रास होता है। शरीर की ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखने हेतु नियमित व्यायाम करें। चातुर्मास में मांगलिक कार्य तो वर्जित हैं पर यह काल धार्मिक कार्यों, व्रत एवं पूजा पाठ के लिए उत्तम होता है। चातुर्मास व्रत में व्यक्ति को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। आवश्यकता से अधिक बोलना नुकसान दायक साबित हो सकता है।

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