पटना में खतरनाक हुआ डेंगू, एक बुजुर्ग की मौत; 100 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती

सिविल सर्जन डा. विभा कुमारी सिंह ने बताया कि बुधवार को जिले में 12 नए डेंगू संक्रमित मिले हैं। इसके साथ ही डेंगू संक्रमितों की संख्या 125 हो गई है। मंगलवार को जिले में 14 नए डेंगू रोगी मिले थे।

Akshay PandeyThu, 28 Oct 2021 05:46 PM (IST)
पटना में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं। सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, पटना: फागिंग और लार्वासाइडल छिड़काव में लापरवाही के कारण आखिर डेंगू जान पर भारी पड़ने लगा है। मंगलवार रात बिरला कालोनी निवासी 63 वर्षीय राजेंद्र मिश्र की डेंगू से मौत हो गई। एलाइजा रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद से वे एम्स पटना में भर्ती थे। वहीं सिविल सर्जन डा. विभा कुमारी सिंह ने बताया कि बुधवार को जिले में 12 नए डेंगू संक्रमित मिले हैं। इसके साथ ही डेंगू संक्रमितों की संख्या 125 हो गई है। मंगलवार को जिले में 14 नए डेंगू रोगी मिले थे।

सिविल सर्जन ने बताया कि बिरला कालोनी निवासी 63 वर्षीय राजेंद्र मिश्र की मौत की सूचना पर वहां जिला मलेरिया पदाधिकारी समेत टीम को भेजा गया था। स्वजन शव लेकर समस्तीपुर स्थित गांव चले गए थे। घर के पांच सौ मीटर के दायरे में फागिंग आदि कराई गई है। वहीं मलेरिया पदाधिकारी डा. विनोद कुमार ने बताया कि सेवानिवृत्त व्यक्ति के दो दिन पूर्व सचिवालय जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में डेंगू से अचानक मौत की बात समझ में नहीं आ रही है। स्वजन के लौटने पर जांच की जाएगी। 

पीएमसीएच में कसा डेंगू का शिकंजा 


पीएमसीएच में डेंगू संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंगलवार को जूनियर डाक्टर की रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद बुधवार को मदर टेरेसा हास्टल की एक छात्रा और एक अन्य कर्मचारी की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। बुधवार को यहां डेंगू के आठ और मंगलवार को छह लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। इसके अलावा एक डाक्टर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनके पति आइजीआइएमएस में डाक्टर हैं। 

बुखार होने पर पारासिटामोल छोड़ खुद से न लें कोई दूसरी दवा 


न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल के निदेशक डा. मनोज कुमार सिन्हा ने कहा कि इस वर्ष डेंगू के मामले कम हैं। हालांकि, लोगों को एहतियातन बताया जा रहा है कि वे बुखार होने पर पारासिटामोल के अलावा दूसरी कोई दवा बिना डाक्टर के परामर्श के नहीं लें। उन्होंने बताया कि डेंगू होने पर दर्द निवारक एस्प्रिन या अन्य दवाओं से डेंगू संक्रमित की हालत बिगड़ सकती है। चूंकि, मौसमी और डेंगू बुखार के लक्षण एक समान हैं, ऐसे में लोग अपनी मर्जी से दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। हालांकि, गत दो वर्षों से डेंगू का प्रकोप कम हैं और अस्पतालों में रोगियों को भर्ती करने की नौबत कम ही आ रही है। रोगियों को चाहिए कि बुखार के साथ बदन में दर्द, शरीर में चकत्ते, आंखों के पीछे व जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी, मसूड़ों से खून आदि आए तो डेंगू की जांच जरूर करा लें।

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