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गलवन घाटी में खूनखराबे पर आंसू बहा रही बिहार की चीनी बहू, कहा: चीन-भारत की लड़ाई मायके-ससुराल जैसी

नालंदा, प्रशांत सिंह। यीन ह मूल रूप से चीनी हैं, अभी हिंदी ठीक से बोल नहीं पातीं। समझती जरूर हैं, भारतीय बहू बनकर खुश हैं। तीन साल के बेटे की मां हैं। भारत-चीन मित्रता की हिमायती हैं, इसीलिए बेटे का नाम मैत्रेय रखा है। कहती हैं, जिस दिन गलवन घाटी में दोनों देशों के 'भरोसे' का खून बहा, मैं फूट-फूटकर रोई। ऐसा लगा जैसे मेरे माता-पिता और सास-ससुर झगड़ रहे हों। यह मेरे लिए सदमे की तरह है। मैं बुद्ध को मानती हूं। भारत से ही उनके शांति व अहिंसा का संदेश चीन गया। सांस्कृतिक और वैचारिक तौर पर चीन भारत के सबसे करीब है। एशिया की ये दोनों ताकतें एक हो जाएं तो विश्व का परिदृश्य बदल जाएगा।

दोनों ही देश महान 

यीन ह ने कहा कि चीन में पैदा हुई और शादी भारतीय से हुई। इंसानियत व शांति दोनों देशों का मूलमंत्र है। राजनीतिक व सामरिक कारणों से भले ही विवाद है। मुझे यहां खूब सम्मान मिल रहा है, चीन के लोग भी भारतीयों की इज्जत करते हैं। हां, भारत की खूबी है कि यहां लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं। 

दूरी के कारण स्वजन चिंतित थे

यीन ह के पति अरुण कुमार यादव डीम्ड यूनिवर्सिटी नव नालंदा महाविहार में पॉली भाषा के असिस्टेंट लेक्चरर हैं। बताया कि 2011-12 में इंडो-चाइनीज स्कॉलरशिप मिली। तब वे चीन के विवि में मंदारिन भाषा की पढ़ाई करने गए। वहीं बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई कर रही यीन ह से मुलाकात हुई और दोस्ती प्यार में बदल गई। हमने शादी का फैसला कर लिया। यीन के घर बीजिंग में उसके पिता बिहार की दूरी को लेकर चिंतित थे। समझाया तो सहमत हो गए। 2016 में हम परिणय सूत्र में बंध गए। मेरी खातिर यीन ने 6 हजार युआन यानी 60 हजार रुपए की नौकरी छोड़ दी। अभी नव नालंदा महाविहार से पॉली भाषा में डॉक्टरेट कर रही हैं। अरुण मूलत: यूपी के वाराणसी के बाशिंदे हैं। 

बौद्ध लिटरेचर का अनुवाद करेंगी

अरुण व यीन को यह बात चुभती है कि प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग नालंदा विवि से 637 पुस्तकों के रूप में बौद्ध लिटरेचर चीन ले गए। यीन ने कहा कि डॉक्टरेट लेने के बाद पति संग मिलकर उन सभी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद करूंगी, ताकि भारत की थाती लौट जाए।

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