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Chandra Grahan Update: साल का तीसरा चंद्रग्रहण खत्‍म, जानिए बिहार में क्‍या रहा असर

पटना, जेएनएन। Chandra Grahan Update: रविवार को चंद्रग्रहण लगा! हालांकि यह बिहार में नहीं दिखा। ज्‍योतिषियों का कहना है कि जब ग्रहण ही नहीं दिखा तो सूतक कैसा। जब दिखता है तभी सूतक लगता है। बता दें कि यह एक ही साल में लगने वाला चौथा ग्रहण और तीसरा चंद्रग्रहण था। वहीं एक ही माह में लगने वाला तीसरा ग्रहण भी। ज्‍योतिष की मानें तो एक माह ही दो या दो से अधिक ग्रहण लगना आम जनमानस के लिए कष्‍टकारी होता है। ऐसे में इस चंद्रग्रहण को ज्‍योतिष कष्‍टकारी मान रहे हैं और उन्‍होंने लोगों को गंगा स्‍नान व दान करने की सलाह दी। आज चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार 8.38 बजे शुरू हुआ जो 11.21 बजे खत्‍म हो गया। यह ग्रहण धनु राशि में लगा था। 

बता दें कि आज से ठीक 15 दिन पहले रविवार को सूर्यग्रहण लगा था। सूर्यग्रहण के दिन हिंदी मास आषाढ़ की अमावस तिथि थी तो आज आषाढ़ का ही पूर्णिमा है। पटना के ज्‍याेतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि रविवार को लगा चंद्रग्रहण उपछाया ग्रहण है। अर्थात़् चंद्रमा के सामने धूल जैसी हल्‍की परत दिखाई देगी। बिहार की बात करें तो यह दिखाई नहीं देगा। इस कारण कोई सूतक काल भी नहीं होगा। वहीं, कुछ ज्‍योतिष मानते हैं कि इसका असर रहेगा।  

गुरु पूर्णिमा व उपछाया चंद्रग्रहण एक साथ

पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही साल का तीसरा उपछाया चंद्रग्रहण लग रहा है , लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण जहां दिखता है, सूतक भी वही मान्य होता है। इस ग्रहण को अमेरिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया में देखा जाएगा I यह दो घंटे 48 मिनट और 24 सेकेंड का होगा। भारतीय समयानुसार 8.38 बजे शुरू होकर यह 11.21 मिनट तक रहेगा।

तीसरे चंद्रग्रहण का पड़ सकता यह प्रभाव

पंडित झा ने बृहद् संहिता के हवाले से बताया कि किसी भी मास में दो या दो से अधिक ग्रहण होना आम जनमानस के लिए कष्टकारी होता है। ऐसे ग्रहण आर्थिक मंदी, अतिवृष्टि, राजनैतिक उथल-पुथल, महंगाई, विपदा, बेरोजगारी आदि लेकर आते हैं। इनसे बचने के लिए स्नान-दान धर्म सूर्य उपासना गायत्री मंत्र का जाप तथा आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना श्रेयष्कर रहेगा।

मंगलकारी होगी श्रीहरि की पूजा

यह ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन श्रद्धा भाव से गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देते थे। आज के दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करके श्रीहरि विष्णु की पूजा करते हैं। आषाढ़ की पूर्णिमा के दिन  भगवान सत्यनारायण पूजन, शंख पूजन के बाद शंख ध्वनि से घरो में सुख-समृद्धि का आगमन होता है एवं निरोग काया की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है I

 

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