पटना के सदर अस्‍पताल को केंद्र सरकार से मिलेंगे 30 करोड़ रुपए, मिलेगी इलाज की हर बुनियादी सुविधा

यहां कई नए विभाग खुलेंगे तथा बंद विभागों को चालू किया जाएगा। मरीजों के लिए इमरजेंसी और आइसीयू विकसित की जाएगी। जांच के लिए सीटी स्कैन एमआरआइ कंप्यूटरीकृत एक्सरे अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होगी। सभी तरह की पैथोलॉजिकल जांच होगी।

Shubh Narayan PathakWed, 09 Jun 2021 05:26 PM (IST)
पटना सिटी का सदर अस्‍पताल। फाइल फोटो

पटना सिटी, जागरण संवाददाता। एक सौ बेड वाले श्री गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल की बदहाली दूर कर इसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने हाथ बढ़ाया है। इस अस्पताल को  30 करोड़ 42 लाख और सात हजार रुपये से मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कई नए विभाग खुलेंगे तथा बंद विभागों को चालू किया जाएगा। मरीजों के लिए इमरजेंसी और आइसीयू विकसित की जाएगी। जांच के लिए सीटी स्कैन, एमआरआइ, कंप्यूटरीकृत एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होगी। सभी तरह की पैथोलॉजिकल जांच होगी।

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. पशुपति प्रसाद सिंह ने बताया कि चहारदीवारी कर अस्पताल को सुरक्षित और अतिक्रमण से मुक्त किया जाएगा। ओपीडी, इनडोर तथा प्रशासनिक भवन अलग होगा। डॉक्टरों एवं कर्मियों के लिए सुविधाओं से सुसज्जित आवास का निर्माण होगा। फिलहाल यहां डॉक्टरों की बेहद कमी के कारण कई विभागों पर सालों से ताला लटका है। इमरजेंसी में आने वाले दुर्घटनाग्रस्त एवं गोली-चाकू लगे मरीज का मरहम-पट्टी ही हो पाता है। यहां आइसीयू नहीं है। बेहोशी के केवल एक डॉक्टर और गायनी में दो महिला डॉक्टर होने के कारण कई महीनों से मरीजों का ऑपरेशन बंद है।

सदर अस्पताल की बदहाली दूर कर यहां चौबीस घंटे और सातों दिन इलाज व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए यहां की रोगी कल्याण समिति के सदस्य आवाज बुलंद करते रहे हैं। अस्पताल सुधार समिति के अध्यक्ष विजय कुमार यादव, महासचिव बलराम चौधरी, सचिव मो. जावेद समेत अन्य समाजसेवी इस अस्पताल के विकास की मांग को लेकर दर्जनों बार आंदोलन कर स्वास्थ्य मंत्री एवं आला अधिकारियों से मिले हैं।

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार द्वारा बिहार राज्य चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड को पत्र लिख कर भारत सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति मांगे जाने की जानकारी दी गयी है। पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित राशि की स्वीकृति मिलने के उपरांत ही विकास कार्यों के लिए निविदा निकाल कर विकास कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

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