CEC बोले- EVM को कोई फुटबॉल न समझे, बिहार के सभी बूथों पर VVPAT की सुविधा

पटना, जेएनएन। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने साफ कहा है कि वे निष्‍पक्ष चुनाव कराने को कृतसंकल्पित हैं। इसके लिए उन्‍होंने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिया है। 2019 में होनेवाले लोकसभा चुनाव में माइक्रो पर्यवेक्षक नियुक्‍त किये जाएंगे। साथ ही सी विजिट की भी सुविधा दी जाएगी, ताकि कोई भी वोटर आसानी से शिकायत कर सके। इतना ही नहीं इस बार बिहार के सभी बूथों पर वीवीपैट (VVPAT) की सुविधा दी जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा शुक्रवार को पटना में पीसी में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। 

उन्‍होंने कहा कि वीवीपैट की सुविधा देने की कई राजनीतिक दलों ने मांग की थी। राजनीतिक दलों ने यह भी मांग की है कि मतदाता पर्ची को सुधारा जाए। डोर टू डोर जाकर वोटरों को चिह्नित किया जाए। बीएलओ की व्यवस्था ठीक की जाए। उन्‍होंने अधिकारियों को लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सजग किया। कहा कि आने वाले वक्त में आचार संहिता को तोड़ने वालों पर और भी सख्ती अपनाई जाएगी। 

3 साल से ज्‍यादा समय वाले अधिकारियों का हाे तबादला 
इसके साथ ही उन्‍होंने बिहार सरकार को भी आदेश दिया है कि तीन साल से अधिक समय से तैनात रहनेवाले अधिकारियों का तबादला किया जाए। इसके लिए बिहार के मुख्‍य सचिव को कई आवश्‍यक निर्देश दिये गये हैं। वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने की भी कवायद चल रही है, लेकिन यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्‍होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल ज्यादा से ज्यादा बीएलए लगाएं। वोटरों को जागरूक करने के लिए 1950 हेल्पलाइन को एक्टिव किया गया है। साथ ही वोटरों को चिह्नित करके ही प्रचारित किया जाएगा तथा वोटर लिस्‍ट को आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी।

इवीएम को कोई फुटबॉल ना बनाएं 
सुनील अरोड़ा ने कहा कि चुनाव के बारे में फेंक न्यूज प्रचारित करने वाले पर कार्रवाई की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि इवीएम (EVM) पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर सकता है। यह बिल्कुल निष्पक्ष काम करता  है। ये सभी से आग्रह है कि इवीएम को कोई फुटबॉल ना बनाएं। हर हाल में निष्‍पक्ष चुनाव कराए जाएंगे। इसके लिए चुनाव आयोग कृतसंकल्पित है। 

सूबे के डीएम-एसपी संग बैठक 
बता दें कि लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दो दिवसीय बिहार दौरे पर पटना आए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने दूसरे दिन शुक्रवार को पीसी से पहले पटना में अफसरों के साथ बैठक की। उनके साथ चुनाव आयोग की टीम भी बैठक में शामिल हुई। पूर्वाह्न में सूबे के डीएम-एसपी, जबकि दोपहर बाद बिहार के मुख्य सचिव दीपक और डीजीपी केएस द्विवेदी के साथ के साथ उन्होंने बैठक की। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनावी तैयारियों का जायजा लिया और कई आवश्‍यक निर्देश दिए। 

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव तैयारियों को लेकर बिहार दौरे पर पटना आए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने गुरुवार को पटना पहुंचते ही राज्य में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें डीजीपी केएस द्विवेदी और एडीजी पुलिस मुख्यालय कुंदन कृष्णन के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसके बाद राजनीतिक दलों के नुमाइंदों से मुलाकात कर उनकी राय जानी।

आयोग की टीम में शमिल अधिकारी 

चुनाव आयोग के टीम में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा, उप चुनाव आयुक्त चंद्र भूषण कुमार, संदीप जैन, महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, दिलीप शर्मा और आइटी निदेशक वीएन शुक्ला के अलावा एडीजी शेफाली शरण आईं हैं। 

भाजपा की मांग 

भाजपा के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके साथ आई केंद्रीय चुनाव आयोग टीम से मिलकर उन्हें पार्टी की ओर से पांच सूत्री स्मार-पत्र सौंपा। पार्टी ने आयोग को सुझाव दिया है कि ऐसा देखा गया है कि स्व हस्ताक्षरयुक्त मतदान पर्ची के लिए कोई भी पहचान पत्र अनिवार्य नहीं किया गया है। देखा जाता है कि किसी एक घर में मतदाता पर्ची परिवार के किसी एक सदस्य को दी जाती है, तो वह सदस्य अपने परिवार के अनुपस्थित सदस्य का भी फर्जी मतदान करा देता है। मतदाता पर्ची किसी व्यक्ति विशेष के हाथ लग जाता है तो बड़े पैमाने पर इसका दुरूपयोग होते हुए देखा गया है। जिन मतदाताओं को पहचान पत्र प्राप्त नहीं हुआ है,उन्हें मतदाता पहचान पत्र भी उपलब्ध होना चाहिए। ताकि मतदाता अपने फोटो पहचान पत्र या वैकल्पिक पहचान पत्र के साथ मतदान कर सके। जो मतदाता सूची प्रकाशित की जा रही है उनमें बहुत खामियां है। इसे जल्द से जल्द दुरूस्त करने की जरूरत है।

जदयू की मांग 

जदयू ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि झामुमो या शिवसेना जैसी दूसरे राज्य की पार्टियां अगर बिहार में चुनाव लड़ती हैं तो उन्हें निर्दलीय के लिए आरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएं। इन दोनों का चुनाव चिन्ह तीर-धनुष है। जदयू का तीर है। मिलते-जुलते निशान के चलते वोटर संशय में पड़ जाते हैं। जदयू को मिलने वाला वोट तीर के बदले तीर-धनुष के निशान पर चला जाता है। जदयू ने आग्रह किया है कि पहचान के अधिकतम विकल्पों के आधार पर लोगों को मतदान का अधिकार दिया जाए। सिर्फ बीएलओ की ओर से जारी पर्ची के आधार पर मतदान की इजाजत उचित नहीं है। इवीएम के साथ वीवी पैट की शत प्रतिशत व्यवस्था करने, दिव्यांग जनों के लिए बूथ पर पर्याप्त इंतजाम करने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पारा मिलीट्री फोर्स की तैनाती की मांग शामिल है। 

राजद की मांग 

राजद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन देकर कहा कि चुनाव इवीएम मशीन के बजाए बैलेट पेपर से कराया जाए। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोग मतदान में शामिल हो सकें इसे सुनिश्चित किया जाए। राजद ने मांग की कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या यदि कम भी हो तो उनके मतदान के लिए अलग से मतदान केंद्र की व्यवस्था उनके टोले में ही किया जाए। जिन मतदान केंद्रों पर किसी कारणवश मतदान देर से आरंभ होता है तो वहां अतिरिक्त समय मिलना चाहिए वोटिंग के लिए। राजद ने कहा कि मॉक मतदान के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि को प्रशिक्षण मिले।

कांग्रेस की मांग 

कांग्रेस के नवगठित रिसर्च विभाग के अध्यक्ष आनंद माधव ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पार्टी का ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने मांग की है कि हर प्रखंड में कम से कम पांच पिंक बूथ बने, ताकि महिलाएं सहज रूप से मतदान कर सकें। महिलाओं की सुरक्षा की पूर्ण व्यवस्था हो। अधिक संख्या में मतदाता वोट करें और इसके लिए जागरूकता अभियान जोर-शोर से चलाया जाए। साथ ही सभी बूथों पर वीवीपैट की व्यवस्था की जाए। बूथों पर पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए। दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप, एवं सभी मतदाताओं के लिए पानी-पंखे जैसी सुविधा दी जाए। सभी पोलिंग बूथ पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए एवं 50 बूथ पर एक कंट्रोल रूम बनाकर निगरानी की जाए।

सीपीआई की मांग 

सीपीआई ने चुनाव आयोग को सुझाव पत्र सौंपा है। इसमें पार्टी की ओर से 21 सुझाव दिए गए हैं। सुझावों में एक बूथ पर 800 से अधिक वोटर नहीं हों, कमजोर वर्ग के लिए हो चलंत बूथ बने, पेड न्यूज पर सख्त कार्रवाई हो, सड़कों के बजाय गांवों के अंदर पेट्रोलिंग हो अ‍ादि शामिल हैं।

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