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कोविड-अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी

वार्ता विफल

- डॉक्टरों का शिष्टमंडल प्राचार्य के साथ प्रधान सचिव से मिलेगा आज

- मरीजों की परेशानी देख सीनियर डॉक्टरों ने संभाली इलाज की कमान जासं, पटना सिटी : कोविड अस्पताल एनएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार गुरुवार की सुबह सात बजे से ही जारी रहा। मरीजों तक जूनियर डॉक्टर नहीं पहुंचे। इससे अस्पताल में अफरातफरी की स्थिति बनी रही। अस्पताल प्रशासन ने जब कुछ सीनियर डॉक्टरों को ड्यूटी पर तैनात किया, तब स्थिति नियंत्रित हुई।

कॉलेज के लेक्चर हॉल दो में प्राचार्य डॉ. हीरालाल महतो के अलावे डॉ. उमाशंकर प्रसाद, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. रेणु रोहतगी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अखौरी पी के सिन्हा के साथ जूनियर डॉक्टरों की वार्ता हुई। काफी देर तक चली वार्ता विफल रही। प्राचार्य ने अस्पताल पहुंचकर उपाधीक्षक डॉ. गोपाल कृष्ण के कक्ष में भी पीजी डॉक्टरों के साथ बातचीत की। यहां भी कोई नतीजा नहीं निकला।

प्राचार्य ने बताया कि जूनियर डॉक्टरासें की मांग पर उच्चाधिकारी ही निर्णय ले सकते हैं। शुक्रवार को प्रधान सचिव ने बातचीत के लिए पीजी डॉक्टरों को आमंत्रित किया है।

वहीं, पीजी डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. कुशाग्र गर्ग ने बताया कि उनके साथ डॉ. रामचंद्र कुमार, डॉ. दिव्यांशु मारतंड, डॉ. ज्योति कुमारी, डॉ. अजिनका गौतम का शिष्टमंडल प्राचार्य के साथ प्रधान सचिव से मिलेगा।

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि एनएमसीएच को कोविड अस्पताल बनाए जाने के कारण चार महीनों से बेड साइड पठन-पाठन बंद है। सामान्य मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू करने के लिए वह प्रधानसचिव से एक समय निर्धारित कर लिखित में देने की मांग करेंगे। एनएमसीएच में निर्धारित पांच जिलों के अलावा दूसरे जिलों के मरीजों नहीं भर्ती किया जाना चाहिए। संक्रमित होने वाले डॉक्टरों के इलाज के लिए 30 बेड का अलग से वेंटिलेटर और ऑक्सीजन युक्त वार्ड बनाने एवं ए-सिम्टोमेटिक के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाने की मांग की जाएगी।

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