बोधगया व वर्धमान ब्‍लास्‍ट केस के नौ आतंकियों को NIA ने लिया रिमांड पर, कोलकाता से लाए गए पटना

बिहार के बोधगया और पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए आतंकी ब्‍लास्‍ट मामले में नौ आरोपितों को शुक्रवार को पटना के कोर्ट (NIA Court) में पेश किया गया। एनआइए ने प्रोडक्‍शन वारंट की याचिका दायर की थी। उस आलोक में कड़ी सुरक्षा में सभी आतंकवादियों को कोर्ट लाया गया।

Vyas ChandraFri, 22 Oct 2021 01:28 PM (IST)
बोधगया में 2013 में आतंकवादियों ने किया था ब्‍लास्‍ट। फाइल फोटो

पटना, आनलाइन डेस्‍क। बिहार के बोधगया और पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए आतंकी ब्‍लास्‍ट (Terrorist Blast) मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नौ आतंकवादियों को शुक्रवार को पटना में एनआइए की स्‍पेशल कोर्ट (NIA Special Court) में पेश किया गया। एनआइए ने इसके लिए प्रोडक्‍शन वारंट की याचिका दायर की थी। उस आलोक में कड़ी सुरक्षा में सभी आतंकवादियों को कोर्ट लाया गया। इसको लेकर एयरपोर्ट से लेकर कोर्ट परिसर तक सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किए गए थे। जानकारी के अनुसार सभी आतंकवादी 22 नवंबर तक एनआइए के रिमांड पर रहेंगे। 

उम्रकैद की सजा काट रहे बोधगया ब्‍लास्‍ट के दोषी आतंकवादी

जानकारी के अनुसार सात जुलाई 2013 को बोधगया में ब्‍लास्‍ट हुआ था। छह बजे सुबह में महाबोधि मंदिर और आसपास के क्षेत्र में एक-एक कर नौ विस्‍फोट किए गए थे। उस घटना में बौद्ध भिक्षु एवं तीर्थयात्री घायल हो गए थे। एनआइए की विशेष अदालत ने इन पांच आतंंकवादियों को वर्ष 2018 में 25 मई को दोषी करार दिया था। आतंकवादी हैदर अली उर्फ ब्‍लैक ब्‍यूटी, अजहरुद्दीन, उमर सिद्दीकी, इम्‍तियाज अंसारी और मुजीबुल्‍लाह इस मामले में दोषी ठहराए गए थे। 31 मई 2018 को कोर्ट ने इन्‍हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजायाफ्ता पांच आतंकवादियों को कोर्ट में प्रस्‍तुत किया गया। बताया गया है कि इन सभी को रिमांड पर लेने का आग्रह एनआइए ने किया था। उस आलोक में कोर्ट ने रिमांड की स्‍वीकृ‍ति दे दी है।    

वर्धमान में बम बनाते समय हुआ था ब्‍लास्‍ट  

वहीं वर्धमान मामले की बात करें तो एनआइए की अदालत ने चार आतंकवादियों को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई। वे सभी जेल में हैं। वर्धमान जिले के खगड़ागढ़ में दो अक्‍टूबर 2014 को बम ब्‍लास्‍ट में दो लोगों की मौत हो गई। कुछ घायल हो गए थे। बम बनाते समय यह घटना हुई थी। इसके पीछे बंग्‍लादेश के आतंकवादी संगठन जमातउल मुजाहिदीन का नाम सामने आया था। इस मामले में शेख कौसर को 29 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इस मामले के 33 में 31 को दोषी करार दिया गया था। चार आतंकवादियों को सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी।   

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