भाजपा ने बिहार के संगठन में किया बड़ा बदलाव, आरएसएस से जुड़े रत्‍नाकर को भेजा गया गुजरात

भाजपा ने मूलरूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी रत्नाकर को बिहार से हटाकर गुजरात का संगठन मंत्री नियुक्त करने के साथ बड़ा संदेश देने का काम किया है। पार्टी ने एक साथ तीन राज्यों को साधा है। फिलवक्त रत्नाकर बिहार के सह संगठन मंत्री के पद पर थे।

Shubh Narayan PathakMon, 02 Aug 2021 06:22 AM (IST)
भाजपा ने बिहार संगठन में किया बड़ा बदलाव। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना, राज्य ब्यूरो। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अहम बदलाव करते हुए बिहार के सह संगठन महामंत्री रत्नाकर को बड़ी जिम्मेदारी दी है। आरएसएस ने अगले वर्ष गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह अहम बदलाव किया है। डेढ़ दशक से गुजरात भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे भीखू भाई दलसानिया को हटा कर रत्नाकर की ताजपोशी की गई है। इसके साथ ही भाजपा में तेजी से उभरने वाले युवा रणनीतिकारों में रत्नाकर का नाम शुमार हो गया है।

दरअसल, भाजपा ने मूलरूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी रत्नाकर को बिहार से हटाकर गुजरात का संगठन मंत्री नियुक्त करने के साथ बड़ा संदेश देने का काम किया है। पार्टी ने एक साथ तीन राज्यों को साधा है। फिलवक्त रत्नाकर बिहार के सह संगठन मंत्री के पद पर थे। रत्नाकर का केंद्र उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर था। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद रत्नाकर को बिहार भेजा गया था। इससे पहले प्रदेश में अभी तक केवल शिवनारायण महतो ही भाजपा के एकमात्र सह संगठन महामंत्री थे। लेकिन भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के उद्देश्य से एक और सह संगठन महामंत्री के पद का गठन कर इसकी जिम्मेदारी रत्नाकर को दी थी।

2018 में काशी के साथ गोरखपुर क्षेत्र की मिली थी जिम्मेदारी

वर्ष 2018 में गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी ने संगठन के स्तर पर अहम फैसला लिया था। काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री रत्नाकर को गोरखपुर क्षेत्र का कार्यभार भी सौंप दिया गया था। मूल रूप से देवरिया जिले के रहने वाले रत्नाकर को इन दोनों क्षेत्रों का संगठन मंत्री बनाए जाने का परिणाम 2019 लोकसभा चुनाव में भी नजर आया था। इन्हीं बदलावों को देखते हुए काशी और गोरखपुर क्षेत्र के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी देख रहे रत्नाकर को बिहार का सह संगठन मंत्री बनाया गया। साथ ही रत्नाकर के कंधों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर तक संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी थी।

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