Delhi Assembly Election: BJP व JDU में संघर्ष तय, आप्रवासी बिहारी वोटों पर CM नीतीश की नजर

पटना [अमित आलोक]। दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में जनता दल यूनाइटेड (JDU) अपने प्रत्याशी उतारेगा। पार्टी सुप्रीमो व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बुधवार को दिल्‍ली में कार्यकर्ता सम्‍मेलन कर चुनावी तैयारियां आरंभ कर दी। बुधवार को दिल्ली के बिहारी बहुल बदरपुर (Badarpur) में उनका कार्यकर्ता शिविर हुआ। खास बात यह कि बिहार में राष्ट्रीेय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) व लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) से तालमेल कर चुनाव लड़ रहा जेडीयू दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रहा है।

चुनाव को ले जेडीयू की तैयारियां आरंभ

दिल्ली विधानसभा चुनाव को ले जेडीयू ने अपनी तैयारियां आरंभ कर दी है। इसी कड़ी में बुधवार को बदरपुर में जेडीयू का कार्यकर्ता शिविर कर आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य बतौर मुख्‍य अतिथि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा विशेष अतिथि पार्टी के दिल्ली प्रभारी व बिहार सरकार में मंत्री संजय कुमार झा (Sanjay Kumar Jha) शामिल रहे। शिविर में केसी त्यागी (KC Tyagi), ललन सिंह (Lalan Singh), पवन वर्मा (Pawan Verma) व संजय झा (Sanjay Jha) सहित दिल्ली प्रदेश जेडीयू अध्यक्ष दयानंद राय (Dayanand Rai) के नेतृत्व में दिल्ली कर सभी विधानसभा सीटों के तीन हजार से अधिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। शिविर में नीतीश कुमार ने जेडीयू के दिल्‍ली प्रभारी संजय झा और दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष दयानंद राय को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अधिकृत किया।

सभी 70 सीटों पर तैयारी कर रही पार्टी

बताया जा रहा है कि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर जेडीयू अपने उम्मीदवार देगा। जेडीयू के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष दयानंद राय कहते हैं कि उनकी पार्टी सभी 70 सीटों पर तैयारी कर रही है। हालांकि, पार्टी के बिहार प्रदेश अध्‍यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह (Vashishtha Narayan Singh) कहते हैं कि पार्टी चुनिंदा सीटों पर उम्‍मीदवार देगी।

27 सीटों पर पूर्वांचल के मतदाताओं का दबदबा

दिल्‍ली की 70 में से करीब 27 सीटों पर बिहार व पूर्वाचल के मतदाताओं का दबदबा है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर चुनिंदा सीटों पर उम्‍मीदवार देने की बात हुई तो बिहार व पूर्वाचंल के मतदाताओं के दबदबा वाली 27 सीटों पर जेडीयू उम्‍मीदवार दे सकता है।

आप्रवासी बिहारियों की समस्‍याओं को मुद्दा बनाएगी पार्टी

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना और अनाधिकृत कॉलोनियों (Unauthorized Colonies) को अधिकृत करना पार्टी के मुख्य मुद्दे थे, लेकिन केंद्र सरकार ने बुधवार को ही अनधिकृत कालोनियों को अधिकृत करने की घोषणा कर नीतीश कुमार से यह मुद्दा छीन लिया है। हालांकि, जेडीयू दिल्ली में रह रहे बिहार व पूर्वांचल के लोगों की समस्‍याओं को विधानसभा चुनाव में प्रमुखता से उठाएगा।

कार्यकर्ता शिविर को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने इसका स्‍पष्‍ट संकेत दिया। उन्‍होंने कहा कि दिल्ली में पहले बिहारियों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था, लेकिन बिहार में अब इतना विकास हुआ है कि बिहारी बाहर में भी अपना परिचय गर्व से देते हैं। बिहार के लोग किसी पर बोझ नहीं हैं। केंद्र सरकार की अनधिकृत कालोनियों को अधिकृत करने की घोषणा के बाद अब नीतीश कुमार ने उन्‍हें अविलंब अधिकृत करने की मांग की तथा कहा इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

नीतीश कुमार ने हाल ही में दिए दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान का भी जवाब दिया, जिसमें उन्‍होंने दिल्‍ली के अस्‍पतालों में बिहारियों के मुफ्त इलाज कराने को ले तंज कसा था। नीतीश कुमार ने कहा कि कोई बिहार से आये या किसी अन्य राज्‍य से, दिल्‍ली सरकार को सस्ता इलाज मुहैया कराना चाहिए। उन्‍होंने बिहार में किए अपने काम गिनाते हुए पूरे देश में शराबबंदी लागू करने की मांग रखी। साथ ही दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य का दर्जा देने कर भी मांग रखी।

बिहारियों के पास प्रमुख दलों की कमान

दिल्ली में बिहार और पूर्वांचल के लोगों की संख्या विधानसभा चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में है। यही कारण है कि बीजेपी और कांग्रेस (Congress) दोनों ने दिल्ली की कमान बिहारियों को दे रखी है। जेडीयू के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष दयानंद राय भी मूलत: बिहार के दरभंगा के निवासी हैं। जेडीयू के दिल्‍ली प्रभारी संजय झा भी बिहार के ही हैं। बीजेपी के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) भी बिहार के कैमूर जिले में पले-बढ़े हैं। कांग्रेस ने भी दिल्‍ली में चुनाव प्रचार कमेटी का अध्‍यक्ष बिहार के दरभंगा से ताल्‍लुक रखने वाले कीर्ति आजाद (Kirti Azad) को बनाया है।

दिल्‍ली में पैठ बनाने की कोशिश में जेडीयू

जेडीयू विधानसभा चुनाव के रास्‍ते दिल्‍ली में पैठ मजबूत करने की कोशिश में है। इसके लिए उसे बीजेपी से भी संघर्ष करना होगा। हालांकि, पार्टी के लिए यह नई बात नहीं। बिहार के बाहर जेडीयू व बीजेपी में चुनावी टक्‍कर होती रही है। बिहार के पड़ोसी राज्‍य झारखंड (Jharkhand) में भी ऐसा ही हुआ है। अब अगली बारी दिल्‍ली की है।

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