जनगणना में जाति पर अकेले पड़ी भाजपा, क्‍या बिहार में बदलने वाली है सियासत; RJD और JDU के सुर एक होने से उठा सवाल

Bihar Politics सवाल यह है कि क्‍या यह मसला नए राजनीतिक समीकरणों की बुनियाद साबित हो सकता है। यह सवाल इसलिए है क्‍योंकि राजद के प्रवक्‍ता और विधायक भाई वीरेंद्र ने कह दिया है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को अब एनडीए में बने रहने पर सोचना चाहिए।

Shubh Narayan PathakSat, 25 Sep 2021 09:48 AM (IST)
मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तेजस्‍वी यादव। फाइल फोटो

पटना, जागरण टीम। Bihar Politics: बिहार की सियासत एक बार फिर जाति के नाम पर धधकने के लिए तैयार है। जाति आधारित जनगणना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए शपथपत्र के बाद इस मसले पर राजनीति दोबारा तेज हो गई है। राजद के नेतृत्‍व में बिहार के तमाम विपक्षी दलों ने इस मसले पर आंदोलन करने की चेतावनी दे दी है तो वहीं बिहार की सरकार में शामिल चार में से तीन दल भी इस मसले पर केंद्र सरकार के रुख के विरोध में हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि 2011 की जनगणना में तमाम तरह की विसंगतियां आने के बाद यह तय है कि फिलहाल जनगणना में जातियों की गणना नहीं कराई जा सकती है। बिहार में सक्रिय राजनीतिक दलों में केवल एक भाजपा ही केंद्र सरकार की इस राय से इत्‍तेफाक रखती है।

सवाल यह है कि क्‍या यह मसला नए राजनीतिक समीकरणों की बुनियाद साबित हो सकता है। यह सवाल इसलिए है क्‍योंकि राजद के प्रवक्‍ता और विधायक भाई वीरेंद्र ने कह दिया है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को अब एनडीए में बने रहने पर सोचना चाहिए। आपको बता दें कि तेजस्‍वी यादव के कहने पर ही नीतीश कुमार पिछले दिनों बिहार के सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनि‍धिमंडल को साथ लेकर नई दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। प्रधानमंत्री से मिलकर जाति जगगणना की मांग करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वे तेजस्‍वी यादव के आग्रह पर मिलने आए हैं।

जदयू चाहता है जनगणना में जरूर हो जातियों की गिनती

जदयू की ओर से संसदीय कार्य एवं शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि जातिगत जनगणना अब भी संभव है। यह बात किसी ने नहीं कही है कि 2011 में जो जनगणना हुई वह गलत है। कहा गया था कि उसमें बड़े स्तर पर त्रुटियां हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार ने इस संबंध में पनगढिय़ा कमेटी का गठन किया था। उसने भी नहीं कहा कि यह गलत है। कहा गया कि इसके आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। केंद्र ने भी आंकड़े की त्रुटियों की बात कही है।

राजद को अपनी जमीन लौटाने के लिए चाहिए मसला

बिहार के प्रमुख राजनीतिक दल राजद को यह मसला राज्‍य में अपनी खोई राजनीतिक जमीन पाने का मौका लग रहा है। राजद सुप्रीमो लालू यादव के अलावा उनके बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने केंद्र के रवैये का विरोध किया है। लालू का कहना है कि भाजपा एवं आरएसएस को पिछड़ों एवं अति पिछड़ों से नफरत है। सांप-बिच्छू, तोता-मैना, हाथी-घोड़ा, कुत्ता-बिल्ली सबको गिन लेंगे। यहां तक पेड़-पौधे और पशु-पक्षी भी गिन लिए जाएंगे, लेकिन पिछड़े-अति पिछड़े वर्ग के इनसानों की गिनती नहीं होगी। लालू ने कहा कि यह बहुत बड़ी छल है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। जातिगत जनगणना से सबका भला होगा। सबकी आबादी पता चल सकेगी। अगर केंद्र सरकार जनगणना फार्म में एक अतिरिक्त कालम जोड़कर लोगों की जातियों का पता नहीं कर सकती है तो ऐसी सरकार और सांसदों व मंत्रियों को धिक्कार है।

मुकेश सहनी तो दो कदम और आगे बढ़ गए

विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के प्रमुख एवं मंत्री मुकेश सहनी ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हम लोग काफी उम्मीद लेकर प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। अब वे सर्वोच्च न्यायालय में जाकर जातिगत जनगणना से इन्कार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को राज्य में जातिगत जनगणना करना चाहिए। वीआइपी पार्टी उनकी मदद करेगी। पार्टी फंड से राज्य में जातिगत जनगणना के लिए चार करोड़ रुपये दिए जाएंगे, साथ ही मैं व्यक्तिगत बचत से एक करोड़ रुपये दूंगा। जातिगत जनगणना सबके हित में है, यह होनी चाहिए।

पीएम पर भरोसा, विपक्ष धैर्य रखे : जनक

भाजपा नेता एवं खान भू-तत्व मंत्री जनक राम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आश्वासन पर हमें पूरा भरोसा है। विपक्ष को धैर्य रखना चाहिए। तीन घंटे के फिल्म की पूरी कहानी महज तीन मिनट की कास्टिंग में पता चल जाता है। यह तो संकेत है। सर्वोच्च न्यायालय का जो आदेश होता है, वह सर्वमान्य होता है। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष संजय जायसवाल ने जातीय जनगणना की मांग को पूरी तरह अव्‍यवहारिक बताया है और उन्‍होंने इसकी विसंगतियां भी गिनाई हैं।

पीएम ने धोखा दिया : अजीत

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने प्रधानमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 में दो करोड़ रोजगार का झूठ बोला, 2020 में 19 लाख रोजगार का झूठ बोला। अब जातिगत जनगणना पर झूठ बोल रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने आश्वस्त किया था विचार करेंगे, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय में जाकर असमर्थता जता रहे हैं। उन्हें प्रतिनिधिमंडल से साफ कहना चाहिए था कि जातिगत जनगणना उनकी नीति के खिलाफ है। प्रधानमंत्री ने पूरे देश को धोखा दिया है।

अपने स्तर से कराए राज्य सरकार : वामदल

जातिगत जनगणना के मसले पर केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे पर वामदल संतुष्ट नहीं है। भाकपा विधायक सूर्यकांत पासवान ने कहा कि राज्य सरकार जातिगत जनगणना अपने स्तर से कराए। इसके लिए मुख्यमंत्री को पहल करनी चाहिए। सर्वदलीय कमेटी के साथ जब प्रधानमंत्री से पिछले महीने मुलाकात हुई थी तब उन्होंने सकारात्मक संकेत दिया था, लेकिन अब केंद्र पक्ष में नहीं दिख रहा है। वैसे भी भाजपा का पहले से स्टैंड रहा है कि जातिगत जनगणना देश में नहीं होनी चाहिए।

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