तेज प्रताप व तेजस्‍वी के बीच सुलह कराने में राबड़ी फेल, लालू यादव से उम्‍मीद पर अभी नहीं आ रहे बिहार

तेजस्वी यादव एवं तेज प्रताप यादव के शीतयुद्ध के सतह पर आए कई दिन बीत चुके हैं। को मनाने में मां राबड़ी देवी विफल रहीं हैं। अब पिता लालू प्रसाद यादव से हीं अंतिम उम्‍मीद बची है लेकिन फिलहाल वे बिहार नहीं आ रहे हैं।

Amit AlokWed, 13 Oct 2021 01:44 PM (IST)
तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव तथा पिता लालू प्रसाद यादव के साथ तेज प्रताप यादव। फाइल तस्‍वीरें।

पटना, अरविंद शर्मा। Tejashwi-Tej Pratap News लालू परिवार (Lalu Family) में दोनों भाइयों के बीच सियासी विरासत का घमासान लगातार गहराता जा रहा है। तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) परिवार व पार्टी में अपना जो महत्‍व चाहते हैं, वह उन्‍हें मिलता हीं दिख रहा। इससे उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस विवाद को सुलझाने के सारे प्रयास अभी तक निरर्थक साबित हुए हैं। यहां तक कि मां राबड़ी देवी (Rabri Devi) के प्रयास भी कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं। तेज प्रताप राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के अंकुश और परिवार के बंधन को मानने को तैयार नहीं हैं। माना जा रहा था कि 20 अक्‍टूबर को लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) पटना आएंग तो वे हीं इस विवाद को सुलझाने का कोई फार्मूला निकलेंगे, लेकिन गुरुवार को राबड़ी देवी के दिल्‍ली लौटने के साथ इसपर ग्रहण लग गया है। राबड़ी ने यह भी कहा है कि लालू बीमार हैं और फिलहाल बिहार नहीं आ सकते हैं।

लालू के सामने पार्टी व परिवार की हिफाजत की चुनौती

दिल्ली में मीसा भारती (Misa Bharti) के सरकारी आवास पर रहकर 16 तरह की बीमारियों से लड़ रहे लालू के सामने पार्टी और परिवार की हिफाजत की बड़ी चुनौती है। जनता दल से अलग होकर करीब 24 वर्ष पहले 1997 में बनाई गई पार्टी (आरजेडी) को बचाने के लिए योग्य उत्तराधिकारी की तलाश में उन्होंने 2015 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पहले छोटे पुत्र तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को आगे किया। लालू का यह फैसला उनके बड़े पुत्र तेज प्रताप को रास नहीं आ रहा है। प्रारंभ के चार-पांच वर्ष तो वह चुप रहे, लेकिन अब स्वयं को दूसरा लालू (Second Lalu) बताकर विरासत पर कब्जे की कोशिश में हैं।

समझाने को पटना पहुंचीं राबड़ी, नहीं मिले तेज प्रताप

परिवार की एकजुटता के लिए तेज प्रताप को पटरी पर लाना लालू की दूसरी प्राथमिकता है। लालू को अहसास था कि 11 अक्टूबर को जेपी जयंती (JP Jayanti) के मौके पर जनशक्ति मार्च (Jan Shakti March) के दौरान तेज प्रताप पार्टी और परिवार के खिलाफ उल-जलूल बोल सकते हैं। इसी आशंका को भांपकर उन्होंने आनन-फानन में जनशक्ति मार्च से महज कुछ घंटे पहले राबड़ी देवी को पटना भेजा, ताकि वे समझा-बुझाकर बेटे को रास्ते पर ला सकें। राबड़ी पटना हवाई अड्डे से सीधे तेज प्रताप के सरकारी आवास पर पहुंची, लेकिन उनके आने की भनक तेज प्रताप को पहले ही लग गई थी। लिहाजा उन्होंने पहले ही घर छोड़ दिया था। ऐसे में मां-बेटे की मुलाकात नहीं हो सकी और लालू का यह प्लान फेल कर गया। गुरुवार को राबड़ी देवी दिल्‍ली लौट गईं।

अब लालू यादव से हीं बची उम्‍मीद, जारी है इंतजार

तेज प्रताप यादव के बात-व्यवहार को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे केवल अपने पिता की बात ही मान सकते हैं। वे खुद को सेकेंड लालू बताते रहे हैं। उन्‍होंने लालू प्रसाद यादव के नाम पर हीं अपना एलपी मूवमेंट (Lalu Prasad Movement) शुरू किया है। उन्होंने कहा भी है कि आरजेडी प्रमुख के पटना आने पर वे सबकी पोल खोलेंगे। सबके बारे में बताएंगे कि पार्टी और परिवार के लिए कौन-कितना घातक है। ऐसे में अंतिम उम्‍मीद लालू प्रसाद यादव पर हीं जा टिकी है। उनके आने के पहले तेज प्रताप यादव काे मानना किसी के वश की बात नहीं लग रही है।

फिलहाल सुलझता नहीं दिख हा तेज प्रताप का विवाद

तेज प्रताप यादव को समझाने को लेकर परिवार व पार्टी की उम्‍मीद भले हीं लालू पर टिकी हो, लेकिन उनके बिहार आने पर ग्रहण लगता दिख रहा है। गुरुवार को राबड़ी देवी लालू यादव के पास दिल्‍ली लौट गईं। इसके पहले पटना में उन्‍हाेंने स्‍पष्‍ट कहा कि लालू अभी बीतार हैं और अभी बिहार नहीं लौट सकते हैं। ऐसे में तेज प्रताप का विवाद फिलहाल सुलझता नहीं दिख रहा है।

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