बिहार विधानसभा में दिख रही गुंजाइश, पिछली बार के तुम से गोद लेने तक आ गई है बात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। जागरण आर्काइव।

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा कार्यवाही स्थगन की घोषणा अचानक नहीं करते हैं। एक पंक्ति की घोषणा से पहले तीन बार रुकते हैं। ताकि कोई गुंजाइश निकल आए। पक्ष और विपक्ष की यह कोशिश भी साफ नजर आ रही है कि बैठक चले।

Akshay PandeySat, 27 Feb 2021 06:21 PM (IST)

अरुण अशेष, पटना: अध्यक्ष के आसन ग्रहण करते ही हंगामा शुरू हो गया...17वीं विधानसभा की कार्यवाही इस पंक्ति से शुरू नहीं हो रही है। हंगामा हो रहा है। शोर शराबा हो रहा है। इसके चलते बैठकें बीच में स्थगित भी हो रही हैं। लेकिन, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा कार्यवाही स्थगन की घोषणा अचानक नहीं करते हैं। एक पंक्ति की घोषणा से पहले तीन बार रुकते हैं। ताकि कोई गुंजाइश निकल आए। पक्ष और विपक्ष की यह कोशिश भी साफ नजर आ रही है कि बैठक चले। पिछली बार नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को 'तुम' कहकर संबोधित कर दिए थे, इस बार गोद में खिलाने की याद दिला चुके हैं। 

खेद जाहिर करना शालीन तरीका है...

इस सप्ताह मंत्री मदन सहनी की एक टिप्पणी को लेकर विपक्ष आहत हुआ। शोर हुआ तो संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक ने खेद जाहिर किया। विपक्ष की जिद पर सहनी भी खेद जाहिर करने के लिए उठे। खेद जाहिर करना शालीन तरीका है। इसे बोलचाल में माफी मांगना भी कह सकते हैं। इस मामले में सरकार की ओर से उदारता का परिचय दिया गया। पहले ऐसा कम ही होता था। सरकार इस ताव में रहती थी कि उससे गलती हो ही नहीं सकती है। 17वीं विधानसभा की बैठक में नीतीश सरकार का यह रुख नया है। 

तेजस्वी का बदला है रुख

पिछली विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को 'तुम' कह दिया था। खूब हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता वही हैं। एक दूसरे के प्रति दोनों का व्यवहार बदला हुआ है। परिवार के किसी बड़े सदस्य की तरह मुख्यमंत्री की मीठी झिड़की-हम आपको गोद न उठाए हैं और सम्मान के साथ उसे स्वीकार करने का विपक्ष के नेता का अंदाज राजनीति के जानकारों को कुछ सोचने की सलाह दे रहा है। समग्रता में तेजस्वी पिछले कार्यकाल की तुलना में अधिक परिपक्व नजर आ रहे हैं। दोनों के व्यवहार का असर उनके दलों के विधायकों पर भी पड़ रहा है। वे आक्रामक होने से बच रहे हैं। विधानसभा में नए सदस्यों की संख्या बहुत अधिक है। वे सीख रहे हैं। उन्हें ढंग की पाठय सामग्री मिल रही है।

आधुनिक तकनीक का सहारा

आधुनिक तकनीक ने प्रश्नोत्तर काल को सहज बना दिया गया है। अल्पसूचित और तारांकित प्रश्नों के 90 प्रतिशत जवाब सदस्यों को ऑनलाइन मिल रहे हैं। फायदा है कि सदस्य सदन में सिर्फ पूरक प्रश्न पूछते हैं। समय बचता है। प्रश्नों की संख्या बढ़ रही है। हां, कुछ नए मंत्रियों को लेकर परेशानी हो रही है। उनका आवरण आकर्षक रहता है। लेकिन, मुंह खुलता है तो पता चलता है कि होम वर्क निहायत कमजोर है। शायद हाथ में रखे कागजात भी पढ़कर सदन में नहीं आते हैं। नया होने के नाम पर उन्हें फिलहाल राहत मिल रही है। अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो जवाब देने के समय ये हंगामा का कारण बन सकते हैं।

शक्ति संतुलन का भी असर

शांति का एक कारण सत्ता और विपक्ष के बीच संख्या बल का शक्ति संतुलन भी है। 243 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ दलों और उनके समर्थक विधायकों की संख्या 128 है। विपक्ष में 115 है। एआइएमआइएम के पांच सदस्य हमेशा विपक्ष के साथ नहीं रहते हैं। फिर भी राजद, कांग्रेस और वाम दलों के 110 विधायक सदन में एकसाथ रहते हैं। यह संख्या सरकार को हमेशा सतर्क रखती है। हालांकि पिछली विधानसभा में भी सदस्य संख्या के लिहाज से विपक्ष लगभग इतना ही मजबूत था। लेकिन, उस समय उनके बीच बेहतर समन्वय का अभाव था। वह अब साफ नजर आ रहा है।

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