पटना के सरकारी अस्‍पताल में बन रहा है ट्रामा सेंटर, तीन माह बाद शुरू होगी इलाज की व्‍यवस्‍था

पटना के अस्‍पताल में बनाया जा रहा ट्रामा सेंटर। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना के एलएनजेपी में ट्रामा सुविधा के लिए करें अभी तीन माह इंतजार मार्च 2021 शुरू हाेना था 30 बेड का ट्रामा सेंटर 14.76 करोड़ की लागत से निर्माण 123 पद स्वीकृत फिनिशिंग और डॉक्टरों की नियुक्ति के बाद होगा शुरू

Shubh Narayan PathakSun, 21 Feb 2021 06:55 AM (IST)

पटना, जागरण संवाददाता। Bihar Health News: बिहार की राजधानी पटना (Patna) के लोकनायक जयप्रकाश नारायण हड्‌डी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल (Loknayak Jayprakash Narayan Bone Super Speciality Hospital) में बने ट्रामा सेंटर (Trauma Center in Patna) की सेवाएं मिलने में अभी तीन माह से अधिक समय लगेगा। हालांकि, 14.76 करोड़ रुपये से बने 30 बेड के ट्रॉमा सेंटर का भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अभी इसकी फिनिशिंग के अलावा 29 डॉक्टर समेत स्वीकृत 123 पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है। राज्य के इस पहले ट्रामा सेंटर के शहर के मध्य में होने से ट्रामा मामलों के इलाज में काफी सहूलियत होगी। बताते चलें कि ट्रामा सेंटर का भवन जी प्लस टू फ्लोर का है।

अस्‍पताल में होंगी अत्‍याधुनिक सुविधाएं

अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि अभी भवन उन्हें नहीं सौंपा गया है। भवन मिलने के बाद इसे आवश्यक सुविधाओं से सुज्जित किया जाएगा। इसमें वे सभी सुविधाएं होंगी जो कि एक राष्ट्रीय स्तर के ट्रॉमा सेंटर में होती हैं। यह भवन भूकंपरोधी और पूर्णतया वातानुकूलित होगा। इसमें मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, आइसीयू, सीटी स्कैन, अल्ट्रा साउंड , डिजिटल एक्स-रे मशीन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन की व्यवस्था होगी। इस सेंटर को फिजियोथेरेपी, स्पेशिलिस्ट ट्रामा शल्य केंद्र और स्पाइनल यूनिट के रूप में विकसित किया जाएगा।

ट्रामा सेंटर के लिए 123 पद स्‍वीकृत

उन्होंने बताया कि जाे 123 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें दो न्यूरो सर्जन, दो रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ, पांच एनेस्थेटिस्ट, 6 ऑर्थोपेडिक सर्जन, दो जनरल सर्जन, दो जनरल फिजिशियन, दो प्लास्टिक सर्जन, आठ  सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी, 25 स्टॉफ नर्स, 8 फिजियोथेरेपिस्ट और दो स्वास्थ्य प्रबंधक की नियुक्ति की जानी है।

हड्डी अस्‍पताल में उपलब्‍ध होंगे 400 बेड

उन्होंने बताया कि इसके अलावा 227.73 करोड़ से हड्डी अस्पताल  को चार सौ बेड का किया जाएगा। इसका भी शिलान्यास हो चुका है पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसका कारण अस्पताल के सामने की सड़क की कम चौड़ाई को माना जा रहा है। सिर्फ हड्डी के लिए 400 बेड की सुविधा हो जाने के बाद राजधानीवासियों को काफी सहूलियत हो जाएगी। इसके बाद यहां एक छत के नीचे हड्डी संबंधित तमाम रोगों का इलाज हो सकेगा।

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