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बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने पर पक्ष-विपक्ष में बंटे दल, जानें क्या चाहती हैं पार्टियां

बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने पर पक्ष-विपक्ष में दल बंट गए हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार में पंचायत चुनाव नहीं होने की हालत में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सत्ता और विपक्ष के आधार पर मतभेद है। विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि 15 जून के बाद भी पंचायतों के संचालन की जिम्मेदाी मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को दे दी जाए।

Akshay PandeyMon, 17 May 2021 06:07 AM (IST)

राज्य ब्यूरो, पटना: पंचायत चुनाव नहीं होने की हालत में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सत्ता और विपक्ष के आधार पर मतभेद है। विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि 15 जून के बाद भी पंचायतों के संचालन की जिम्मेदाी मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को दे दी जाए। इधर सत्तारूढ़ दलों (भाजपा और जदयू) की राय है कि सरकार बेहतर निर्णय ले सकती है।

भाजपा मौजूदा जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को पूूरा पांच साल काम करने का मौका मिला है। उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया होगा। अगर कुछ बच गया है तो उसे सरकार अपने स्तर से पूरा कर लेगी। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि हम सबके सामने कोरोना से निबटने की बड़ी चुनौती है। पंचायतों का कार्यकाल 15 जून तक है। समय आने पर राज्य सरकार उचित निर्णय लेगी। हालांकि सत्तारूढ़ ङ्क्षहदुस्तानी अवाम मोर्चा का रुख थोड़ा अलग है। वह कार्यकाल में विस्तार के पक्ष में है।

पंचायतों की अवधि का विस्तार करे सरकारः राजद

राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि सरकार बिना किसी दूसरे विकल्प पर विचार किए पंचायतों की अवधि का विस्तार करे। यह लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है, जिसमें गांव के हरेक वार्ड का प्रतिनिधित्व होता है। व्यापक जन भागीदारी की वजह से यह पारदर्शी भी है।

कोरोना संकट के कम होते ही पंचायत चुनाव कराएः कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि किसी जनतांत्रिक निकाय में अफसरशाही का न्यूनतम हस्तक्षेप हो, यह आदर्श स्थिति है। सरकार वर्तमान प्रतिनिधियों के कार्यकाल को विस्तार दे। कोरोना संकट के कम होते ही पंचायत चुनाव कराए। 

पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल अगले चुनाव तक बढ़ाने के लिए सरकार जरूरी कानूनी प्रक्रिया जल्द शुरू करे।

- अवधेश कुमार, राज्य सचिव, माकपा

आरक्षण के कारण समाज के अंतिम वर्ग को त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। सरकार इसका हरण न करे। अगले चुनाव तक वर्तमान प्रतिनिधियों को ही काम करने का अवसर दे।

- रामनरेश पांडेय, राज्य सचिव, भाकपा

कई राज्यों में चुनाव नहीं होने की हालत में पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया है। बिहार सरकार भी उस पर अमल करे।

- धीरेंद्र झा, पोलित ब्यूरो, सदस्य, भाकपा माले

वर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। सरकार के अधिकारी निर्वाचित पदाधिकारियों के साथ समन्वय बना कर विकास कार्यों को अंजाम दें।

दानिश रिजवान, प्रवक्ता, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा

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