घर बैठे मिल रही नौकरी, एक हफ्ते की 30 हजार सैलरी, आपको भी पसंद है तो जरूर पढ़ लें ये खबर

पार्ट टाइम जॉब के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

फुल टाइम या पार्ट टाइम जॉब खाेज रहे युवाओं को एक अनजान नंबर से फोन आता है। फोन करने वाला पूछता है कि क्‍या आप घर बैठे वर्क फ्रॉम होम से कुछ पैसे कमाना चाहते हैं। ऐसी कंपनियां बिना किसी इंटरव्‍यू के सीधे चयन कर लेती हैं।

Shubh Narayan PathakTue, 02 Mar 2021 02:05 PM (IST)

पटना, बिहार ऑनलाइन डेस्‍क। Online Job Fraud Scam: कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण ढेरों युवा बेरोजगार हो गए। इसी बीच वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा। आजकल ढेरों बेरोजगार युवा रोजगार के लिए और रोजगार वाले अतिरिक्‍त आमदनी के लिए वर्क फ्रॉम होम के लिए पार्ट टाइम विकल्‍प तलाश रहे हैं। ठगों को इसकी खबर लग गई है और नतीजा है कि बिहार सहित देश के तमाम राज्‍यों और शहरों के युवा लगातार ठगी और ब्‍लैकमेलिंग का शिकार हो रहे हैं। इन युवाओं को एक दिन पार्ट टाइम जॉब के लिए एक कॉल आई थी और अब वहीं कॉल इनके जी का जंजाल बन गई है। आपको भी ऐसे खतरे से बचा रहना है तो ये रिपोर्ट जरूर पढ़नी चाहिए।

क्‍या आपको भी आया था इस तरह का फोन

फुल टाइम या पार्ट टाइम जॉब खाेज रहे युवाओं को एक अनजान नंबर से फोन आता है। फोन करने वाला पूछता है कि क्‍या आप घर बैठे वर्क फ्रॉम होम से कुछ पैसे कमाना चाहते हैं। या फिर कई बार ऐसा भी कहा जाता है कि फलाना जॉब सर्च वेबसाइट पर आपके रिज्‍यूमे के आधार पर आपका सेलेक्‍शन हो गया है। कॉल करने वाला बताता है कि आप घर बैठे लैपटॉप या कंप्‍यूटर पर काम करते हुए केवल एक हफ्ते में ही 30 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। इसके लिए आपको बस 600 रिज्‍यूमे को फिल करना होगा। कई बार ऐसे ठग कैप्‍चा फिलिंग का भी काम भी बताते हैं। उनके बातचीत का अंदाज ऐसा होता है कि सामने वाले को लगता है कि यह तो बेहद आसान सा काम है।

केवल एक पहचान पत्र और ईमेल आइडी बताने की जरूरत

ठग युवाओं को बताते हैं कि इस जॉब के लिए उन्‍हें न तो एक रुपया खर्च करना है और न हीं कहीं जाने की जरूरत है। केवल एक ईमेल आइडी और एक पहचान पत्र उपलब्‍ध कराते ही जॉब के लिए रजिस्‍ट्रेशन हो जाएगा। इसके बाद आपको एक वेबसाइट का एड्रेस, यूजर आइडी और पासवर्ड दे दिया जाएगा। इसी वेबसाइट पर आपको 600 रिज्‍यूमे दिए जाएंगे। वेबसाइट पर एक साथ दो विंडो खुलेगी। एक विंडो में आपको वह रिज्‍यूमे दिखाई देगा जिसे तैयार करना है, दूसरी विंडो में दिए गए फॉर्मेट में रिज्‍यूमे से डाटा कॉपी करते हुए फिल (Form filling) करना होगा।

जरा सा झांसे में आए तो फंसना तय

नौकरी और पार्ट टाइम जॉब के नाम पर ठगी करने वाले इन गिरोहों को एक बार आपने अपनी ईमेल आइडी और एक पहचान पत्र वाट्सएप या मेल के जरिये भेज दिया तो इसके बाद इन्‍हें और किसी चीज की जरूरत नहीं होती। इतना मिल जाने के बाद आप हां करें या ना, वे आपको बता देंगे कि आपका एग्रीमेंट हो गया है और कल से आपको काम शुरू कर देना होगा। इसके बाद आपके पास दो विकल्‍प हैं। एक तो यह कि आप काम शुरू कर दें, जैसा कि ज्‍यादातर लोग करते हैं और दूसरा यह कि आप मना कर दें। दोनों ही स्थितियों में आपके लिए नतीजा एक ही रहेगा।

काम शुरू कर दिया तो दो बातें होंगी

अगर आपने ठग के झांसे में आकर काम शुरू कर दिया तो आपके साथ दो बातें होंगी। काम शुरू करते ही आपको पता चल जाएगा कि यह काम आसान तो बिल्‍कुल ही नहीं है और यह कोई पार्ट टाइम का काम भी नहीं। इसे करने के लिए आपको रोजाना 10 से 12 घंटे तक समय देना पड़ सकता है। वह भी तब, जब आप कंप्‍यूटर चलाने और टाइपिंग में म‍ाहिर हों। ज्‍यादातर लोग इस काम को एक से दो दिन में छोड़ देते हैं। रुपये कमाने के मोह या फिर एग्रीमेंट टूटने के डर में अगर आप इसे किसी तरह पूरा कर भी लें तो आपका हाल उनसे बुरा होगा, जिन्‍होंने काम पहले ही छोड़ दिया।

इसके बाद शुरू होता है डराने और ब्‍लैकमेलिंग का धंधा

ठग की ओर से आपको भेजे गए एग्रीमेंट की कॉपी के आठवें दिन से डराने और ब्‍लैकमेलिंग का धंधा शुरू हो जाता है। ठग आपको फोन कर कहता है कि आप सात दिन में काम पूरा नहीं कर पाए। इसके चलते कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। अब आपको एग्रीमेंट की शर्त के मुताबिक 6000 से 35-40 हजार तक हर्जाना देना होगा। अलग-अलग ठगों ने अलग-अलग रेट फिक्‍स कर रखा है। इसके लिए वे आपको फोन करेंगे, किसी वकील के जरिये फोन कराएंगे, आपको मैसेज भेजेंगे और ईमेल पर लिगल नोटिस जैसा भी कुछ भेजेंगे। कहा जाता है कि रुपये शाम तक नहीं देने पर प्राथमिकी दर्ज करा दी जाएगी। इसके बाद सूरत कोर्ट में आकर मुकदमे के खर्च के साथ ही पूरा हर्जाना देना होगा। कई बार तो ठग मुकदमे का नंबर और अगली तारीख पर उपस्थित होने का फर्जी नोटिस तक भेज देते हैं। यह पूरी साजिश इतनी गहरी है कि ज्‍यादातर लोग डरकर खुद ही ठग के खाते में रुपये भेज देते हैं।

जिन्‍होंने काम पूरा कर लिया, उनका क्‍या हुआ

आपको क्‍या लगता है कि जिस आदमी ने एक हफ्ते में उस ठग का मुश्किल टास्‍क पूरा कर लिया, उसे ढेरों रुपये मिलेंगे। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो यह गलत है। ठग आपको बताएगा कि आपने जो काम किया है, उसमें काफी गलतियां हैं। इसके चलते काफी नुकसान हो गया है। एग्रीमेंट के मुताबिक आप 10 फीसद से अधिक गलतियां नहीं कर सकते। अब आपको हर्जाना देना होगा। मेल, मैसेज और कॉल का सिलसिला ठीक पहले की तरह ही इनके साथ भी होता है।

ज्‍यादातर मामलों में नहीं दर्ज होती कोई शिकायत

इस तरह की ठगी के ज्‍यादातर मामलों में कोई शिकायत दर्ज नहीं होती। इसके पीछे वजह यह है कि ठगों के निशाने पर ज्‍यादातर बेरोजगार युवा और छात्र होते हैं। ऐसे लोग ठगों के जाल में फंसने के बाद केवल दो चीजें करते हैं। कई युवा ठग को रुपये देकर अपनी जान छुड़ा लेते हैं, तो कई ठग के झांसे में नहीं आकर उसे इग्‍नोर करते हैं और बाद में ठग उन्‍हें परेशान करना छोड़ देता है। कानूनी पचड़े में पड़ने के डर से ऐसे लोग प्राथमिकी या मुकदमा दर्ज नहीं कराते हैं।

ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर भरी पड़ी हैं शिकायतें

गूगल और अन्‍य ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर ऐसी शिकायतें भरी पड़ी हैं, लेकिन अधिकांश शिकायत करने वाले वहीं हैं, जो ऐसे ठगों के जाल में फंस गए। ऐसी शिकायतों को हर कोई गूगल में सर्च कर देख सकता है। लेकिन लोग इसे देखते और ढूंढते तब हैं, जब उन्‍हें लगता है कि वे फंस गया। हमने खुद ही Google पर Resume Search Review सर्च कर देखा तो ऐसी तमाम शिकायतों पर हमारी नजर पड़ी और पता चला कि ऐसे ठग कई अलग-अलग नामों से अपना धंधा चला रहे हैं।

जॉब साइटों से हासिल करते हैं रिज्‍यूम और फोन नंबर

ऐसे ठग प्रचलित जॉब साइटों से वैसे युवाओं का रिज्‍यूमे और फोन नंबर हासिल करते हैं जो पार्ट टाइम वर्क के लिए सर्च कर रहे हैं। यहां से नंबर लेने के बाद ये सीधे संबंधित व्‍यक्ति को कॉल करते हैं और उसे जॉब ऑफर करते हैं। इस दौरान वे न तो वे शैक्षणिक योग्‍यता के बारे में पूछते हैं और न ही उम्र के बारे में। वे अपने शिकार से एक भी सवाल शायद ही पूछते हैं। इस तरह बिना किसी साक्षात्‍कार के, बिना किसी परीक्षा, बगैर एक सवाल का जवाब दिए नौकरी मिल जाती है।

हमने करीब 10 दिनों तक पड़ताल की तो सामने आया चौंकाने वाला सच

ऐसे कुछ मामले हमारी जानकारी में आने के बाद हमने इसकी पूरी पड़ताल शुरू की। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ हैरान करने वाली जानकारियां हाथ लगीं। इस तरह के एकाध गिरोह नहीं, बल्कि कई गैंग काम कर रहे हैं। एक और खास बात यह है कि ऐसी ठगी करने वाले ज्‍यादातर ठग अपना पता गुजरात में बताते हैं। इस तरह की ठगी करने में जो दो नाम अभी नंबर एक पर चल रहे हैं, उनमें से एक का पता गुजरात के अहमदाबाद जबकि दूसरे का पता सूरत का है। हमें इन पतों की जानकारी ठगों द्वारा भेजे गए जीएसटी इनवायस के जरिये हुई। इससे पता चला कि ठगों ने प्राेपराइटरशिप वाली एजेंसियां बना रखी हैं।

बिहार ही नहीं, हर राज्‍य में हैं इनके शिकार

ठगों के इस गिरोह का शिकार बेरोजगार युवा केवल बिहार में ही नहीं हैं। हमने पड़ताल शुरू की तो हमारा संपर्क जम्‍मू-कश्‍मीर, उत्‍तरप्रदेश, कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश जैसे राज्‍यों के कई जिलों से युवाओं ने संपर्क कर ऐसी ही ठगी की जानकारी दी। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ एक ईमेल लगी, जिसमें एक कंपनी ने करीब 100 लोगों को एक ही कॉमन मेल भेजकर करीब छह हजार रुपये हर्जाना भरने के लिए धमकाया है। इससे पता चलता है कि ये ठग हर रोज हजारों युवाओं को अपना शिकार बनाते होंगे।

वकीलों के नाम से आते हैं फोन, मैसेज और ईमेल

ठगी का शिकार युवाओं को फोन, मैसेज और ईमेल के जरिये धमकाया जाता है। ऐसा करने वाले खुद को कंपनी का वकील बताते हैं। ठगी का शिकार हुए युवाओं से हासिल ऐसे ही कुछ वकीलों के नाम हमने गुजरात बार एसोसिएशन और सूरत बार एसोसिएशन की ऑनलाइन डायरेक्‍ट्री में सर्च किए, तो उनका कोई ट्रेस नहीं मिला। इसके बाद हमने सूरत जिला अधिवक्‍ता संघ के सचिव नीलेश पटेल से संपर्क किया और उन्‍हें ऐसे कुछ वकीलों के नाम और नंबर उपलब्‍ध कराए, जो खुद को सूरत कोर्ट का वकील बताकर लोगों को धमका रहे थे। नीलेश ने साफ तौर पर बताया कि इन नामों के कोई वकील सूरत जिला अधिवक्‍ता संघ में रजिस्‍टर्ड नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि इन लोगों के बारे में वे कुछ भी नहीं जानते।

अधिकारियों को कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार

हमने ऐसी शिकायतों को लेकर सूरत (गुजरात) में एसीपी (साइबर क्राइम) युवराज सिंह गोहिल से बात की। उन्‍होंने बताया कि इस तरह के कुछ केस उनके संज्ञान में आए हैं, लेकिन ऐसे एक भी मामले की लिखित शिकायत दर्ज होने की जानकारी उन्‍हें नहीं है। ऐसी कंपनियां कुछ फ्रॉड कर रही हैं, लेकिन युवाओं को भी इसमें सावधान रहना चाहिए। बिना सोचे-समझे किसी एग्रीमेंट को साइन करना ठीक नहीं है। अगर ऐसी कंपनियों के खिलाफ कोई शिकायत कहीं भी दर्ज होती है तो सूरत की पुलिस इसमें पूरा सहयोग करेगी।

 

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