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बिहारः लॉकडाउन में अधिकांश बाजारों को झटका, फिर भी सरिया की मांग बरकरार

बिहार में लॉकडाउन के दौरान सरिया की मांग बनी हुई है। प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार में लॉकडाउन ने अधिकांश बाजारों को झटका दिया है। सरिया पर दोतरफा मार पड़ी है। एक तो लॉकडाउन का असर वहीं दूसरा कीमत भी पांच माह के अंदर 18 से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।

Akshay PandeyTue, 11 May 2021 12:51 PM (IST)

दिलीप ओझा, पटना। बिहार में लॉकडाउन ने अधिकांश बाजारों को झटका दिया है। इसके बावजूद कुछ सेगमेंट में कारोबार संतोषजनक दिखाई दे रहा है। सरिया भी इसमें शामिल है। सरिया पर दोतरफा मार पड़ी है। एक तो लॉकडाउन का असर वहीं, दूसरा कीमत भी पांच माह के अंदर 18 से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। हालांकि, सुकून की बात यह कि इसके बावजूद 80 फीसद तक मांग बरकरार है। उम्मीद यह भी कि कोरोना महामारी का प्रकोप थमते ही इसकी मांग सामान्य की तुलना में 40 से 50 फीसद तक बढ़ सकती है। 

क्यों बढ़ी कीमत

सरिया (टीएमटी) का कच्चा माल आयरन ओर (लौह अयस्क) होता है। आयरन ओर से स्पंज आयरन व पिग आयरन और इससे बिल्लेट व इसके बाद सरिया बनता है। आयरन ओर की कीमत बढ़ने से सभी की कीमत बढ़ती गई है। केंद्र सरकार ने आयरन ओर पर ड्यूटी भी बढ़ाई है। खानों से इसकी नीलामी में भी रेट उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसका निर्यात भी बढ़ा है। इसके कारण बीते पांच माह में सरिया की कीमत 18 रुपये प्रति किलो बढ़कर 44 से 62 रुपये किलो हो गई है। कुछ बड़ी कंपनियों का टीएमटी तो 75 से 80 रुपये किलो पर पहुंच गया है।

सरिया की राज्य में खपत

बिहार में सरिया, एंगल, चैनल, पट्टी आदि का एक से सवा लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। ऐसे उत्पादों को बनाने वाली करीब 15 यूनिटें हैं। बाजार के जानकार और दादीजी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रमेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि दूसरे प्रदेशों से भी एक से सवा लाख मीट्रिक टन सरिया आदि की आवक होती है। इस तरह से बिहार में करीब दो से ढाई लाख मीट्रिक टन की खपत है। बिहार में उत्पादन और बढ़ाया जा सकता है लेकिन औद्योगिक बिजली की दर में कमी करनी होगी। बिहार में यह दर 7.50 रुपये, जबकि बंगाल, झारखंड जैसे पडोसी राज्यों में 4.50 रुपये प्रति यूनिट है।

कोरोना का बाजार पर असर 


कोरोना का बाजार पर असर तो है लेकिन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए इसे संतोषजनक कहा जाएगा। रमेश गुप्ता ने कहा कि सामान्य की तुलना में सरिया की मांग 80 फीसद बनी हुई है। मात्र 20 से 25  फीसद की गिरावट आई है। यह हाल तब है जबकि मजदूरों की कमी है और निर्माण कार्य भी कम हो रहे हैं।

आगे तेजी से बढ़ेगी मांग 


जानकारों का कहना है कि कोरोना का प्रकोप थमते ही सरिया की मांग तेजी से बढ़ेगी। क्रेडाई के बिहार अध्यक्ष मणिकांत का कहना है कि कोरोना काल में दूसरे शहरों में पढ़ने वाले छात्रों और नौकरी करने वालों की घर वापसी हुई है। ऐसे में उन्हें बड़े मकान की जरूरत है। लिहाजा, निर्माण सेक्टर में ग्रोथ संभावित है। जाहिर है ऐसे में सरिया की मांग में आगे 40 से 50 फीसद तक का ग्रोथ दिखाई दे सकता है।

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