बिहार में पहली बार तीन विश्‍वविद्यालयों के कुलाधिपति बने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, राज्‍यपाल ने दे दी मंजूरी

Bihar Education विधेयक पर राज्यपाल के दस्तखत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तीन नए विवि के विधिवत चांसलर बने विधि विभाग ने अधिसूचित किया अधिनियम सभी आठ विधयेक दस्तखत के साथ लौटे मेडिकल इंजीनियरिंग और खेल विवि की जिम्मेवारी

Shubh Narayan PathakWed, 01 Sep 2021 09:17 AM (IST)
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार। फाइल फोटो

पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Education News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) अब कानूनी तौर पर बिहार के तीन नवसृजित विश्वविद्यालयों के चांसलर (Chancellor of Universities in Bihar) बन गए। राज्यपाल फागू चौहान (Governor Fagu Chauhan) ने इससे संबंधित अलग-अलग तीन विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी। विधि विभाग (Law Department) ने इसे अधिसूचित भी कर दिया। विधानसभा के मानसून सत्र में इन्हें पारित किया गया था। राज्यपाल की मंजूरी वाले विधेयकों की प्रति विधानसभा, विधान परिषद, विधि विभाग, स्वास्थ्य, युवा, खेल एवं कला संस्कृति और विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग को मिल गई है।

मालूम हो कि राज्य में मेडिकल, इंजीनियरिंग और खेल की शिक्षा के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालय बनाए जा रहे हैं। परंपरा से अलग हटकर इन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल के बदले मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। इसके लिए नए अधिनियम की जरूरत थी। सो, विधानमंडल के दोनों सदनों में विधेयक पारित किए गए। इस बदलाव के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय और उनके आवासीय कार्यालय में इन विश्वविद्यालयों के लिए अलग कोषांग बनेगा। अलग अधिकारी भी तैनात किए जाएंगे।

खेल विवि का मुख्यालय राजगीर में होगा। मेडिकल और इंजीनियरिंग विवि का मुख्यालय पटना में रहेगा। विधानसभा में मुख्यमंत्री को चांसलर बनाने वाले एक विधेयक का विपक्षी दलों ने विरोध किया था। विधेयक पर संशोधन का प्रस्ताव दिया था। मतदान की नौबत आई। विपक्ष का संशोधन बहुमत के सामने नहीं टिक पाया। विधान परिषद ने तीनों विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया था।

विधानसभा सूत्रों ने बताया कि मानसून सत्र में विनियोग विधेयक सहित कुल आठ विधेयक पारित हुए थे। राजभवन से हस्ताक्षर होकर सभी विधेयक लौट आए हैं। विधि विभाग ने इन्हें अधिसूचित भी कर दिया है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री की हैसियत से नीतीश कुमार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर ही रहे हैं। चांसलर की भूमिका में भी वे इन विश्वविद्यालयों की गरिमा बढ़ाएंगे।

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