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बिहार में सरकारी कर्मियों को रिटायरमेंट के पहले ही देना होगा आवेदन, फिर आगे भी नहीं होगी पैसों की दिक्‍कत

संविदा नियुक्तियों का लेकर बड़ा फैसला। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

राज्य स्तरीय चयन समिति की बैठक में एक महत्‍वपूर्ण फैसला लिया गया है। यह फैसला सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति को लेकर है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय चयन समिति की बैठक में हुआ निर्णय

Shubh Narayan PathakThu, 06 May 2021 12:35 PM (IST)

पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Government Decision: बिहार सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला सरकारी अधिकारी और कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद उसी विभाग में संविदा पर नियुक्ति को लेकर है। अब सरकार केवल वैसे प्रस्‍तावों पर ही विचार करेगी, जिनमें सेवानिवृत्ति के पहले ही सरकारी कर्मियों ने संविदा पर नियुक्ति के लिए अपना आवेदन दे रखा है। राज्‍य के नए मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय चयन समिति की बैठक में इस आशय का फैसला बुधवार को लिया गया।

मेडिकल कॉलेजों में भी होगा ऐसे प्रस्‍तावों पर विचार

चिकित्सा महाविद्यालयों में सामान्य चिकित्सा पदाधिकारियों के पद पर नियोजन के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यदि चयन समिति द्वारा विशेष परिस्थिति में प्रोन्नत पदों पर नियोजन के लिए अनुशंसा की जाती है तो ऐसी स्थिति में फीडर कैडर से प्रोन्नति होते ही ऐसे नियोजन को समाप्त कर दिए जाने का अधिकार संबंधित संवर्ग के नियुक्ति प्राधिकार का होगा।

किसी आरोप की सूचना पर होगा नियोजन रद करने का अधिकार

सरकारी कार्य को देखते हुए यदि किसी अभ्यर्थी का विशेष परिस्थिति में संविदा पर नियोजन होता है और बाद में उसके बारे में नियंत्री विभाग को उस पर किसी आरोप के बारे में सूचना मिलती है तो ऐसी स्थिति में नियोजन रद किए जाने का अधिकार नियुक्ति प्राधिकार को होगा। इसी शर्त पर नियोजन भी होगा।

संविदा पर नियुक्‍त‍ि का बढ़ा है चलन

राज्‍य में ही नहीं पूरे देश में संविदा पर नियुक्ति का चलन काफी बढ़ गया है। सरकार रिटायर कर्मियों को महत्‍वपूर्ण पदों पर रिटायरमेंट के बाद भी संविदा नियुक्ति में इसलिए प्राथमिकता देती है कि उन्‍हें किसी प्रशिक्षण की आवश्‍यकता नहीं होती। नए उम्‍मीदवारों की चयन के अपेक्षा रिटायर कर्मियों से उनके अनुभव का लाभ भी विभाग को मिलता है। बिहार सरकार नियमित नियुक्तियों की बजाय संविदा नियुक्‍तियों को प्राथमिकता दे रही है।

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