Bihar Assembly Election 2020: यह बक्सा तय करेगा भाजपा में टिकट के दावेदारों का भविष्य

राजनीतिक दल बीजेपी का चुनाव चिन्‍ह, सांकेतिक तस्‍वीर।
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 07:19 PM (IST) Author: Sumita Jaiswal

पटना, रमण शुक्ला। Bihar Assembly Election 2020:  बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन में भाजपा कोई खोट छोडऩा नहीं चाहती है। जिलास्तर पर संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने के बाद अब पार्टी मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं से उम्मीदवारों का फीडबैक जुटा रही है। इसके लिए शीर्ष नेताओं की अगुवाई में मंडलस्तरीय बैठक आयोजित कर बक्से में लिखित सुझाव मांगा जाएगा। इन तमाम नवाचार के जरिए पार्टी जनता और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना है कि भाजपा एक परिवार की पार्टी नहीं है, बल्कि इसके लिए कार्यकर्ता और संगठन सर्वोपरि हैं।

फिलहाल पार्टी ने प्रदेश में सभी 11 सौ मंडलों में बैठक का कार्यक्रम भी तय कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने दो दिन के बिहार दौरे में रोडमैप तय कर दिया है। अब आगे की मॉनीटरिंग के लिए बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव पहुंच गए हैं।

तमाम सर्वे के साथ कार्यकर्ताओं की इच्छा व भावना का भी ख्याल 

दरअसल, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कोशिश है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा और भावना के आधार पर प्रत्याशी का चयन सुनिश्चित किया जाए। 2015 के चुनाव से सबक लेते हुए पार्टी बकायदा जमीनी पड़ताल पर जोर दे रही है। पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को भी रणनीति पर लगाया गया है। इसके साथ ही पार्टी सरकार की नीतियों और योजनाओं के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विभिन्न पहलुओं पर फीडबैक जुटा रही है। इसमें भावी प्रत्याशियों और मौजूदा विधायकों के अलावा टिकट के दावेदारों और गठबंधन बारे में भी राय ली जाएगी। अहम यह है कि लिखित सुझाव पर प्रदेश नेतृत्व के बजाय सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व विचार करेगा। उल्लेखनीय है कि चुनाव में उतरने से पहले भाजपा अलग-अलग तरीकों से सर्वे कराती रही है। तमाम रिपोर्ट और सुझाव के आधार पर संगठन व कार्यकर्ताओं से मिले बहुमत को ध्यान में रखकर पार्टी निर्णय करेगी।

गुप्त मतदान से चयन, बंद होगी गुटबाजी 

भाजपा में टिकट के दावेदारों की सूची लंबी है। पुराने नेताओं के साथ ही पार्टी में कुछ समय पहले शामिल होने वाले कार्यकर्ता भी चुनाव लडऩा चाहते हैं। इसके साथ ही कई सांसद और बड़े नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसके कारण गुटबाजी के साथ बगावत की भी आशंका है। इस तरह के विवाद से बचने के लिए पार्टी ने विधानसभा क्षेत्रों में आंतरिक मतदान कराने का निर्णय लिया है। इसमें स्थानीय पार्षद, पार्टी के पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्ता आदि भाग लेंगे। वह अपनी राय लिखकर पेटी में डाल देंगे और वोट के आधार पर दावेदारी तय की जाएगी। पार्टी के रणनीतिकारों ने प्रत्याशियों के चयन में पारदर्शिता लाने और किसी तरह के विवाद से बचने के लिए यह कदम उठाया है। उन्हें लगता है कि इस प्रक्रिया से चुनावी समर में योग्य नेता उतर सकेंगे और किसी तरह की गुटबाजी भी नहीं होगी।

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