बिहार में एक मार्च से कॉमन सर्विस सेंटर पर मुफ्त में बनेंगे आयुष्मान कार्ड, अभी लगते हैं 30 रुपये

आयुष्‍यमान भारत योजना में होता है गरीबों का मुफ्त इलाज। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

बिहार के सभी जिलों में सीएससी पर आयुष्मान कार्ड बनाने को 30 रुपये नहीं देना होगा शुल्क नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और सीएससी ई-गवर्नेंस ने किये एमओयू पर हस्ताक्षर बिहार सहित देश के 10 राज्यों में लागू हुई योजना

Shubh Narayan PathakSat, 27 Feb 2021 12:14 PM (IST)

पटना, जागरण संवाददाता। एक मार्च से कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर मुफ्त में आयुष्मान भारत कार्ड बनेंगे। वर्तमान में इस कार्ड को बनाने के लिए गांवों में लोगों को 30 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी तथा कॉमन सर्विस सेंटर के बीच इसके लिए एमओयू किया गया है। यह एमओयू बिहार सहित 10 राज्यों के लिए प्रभावी होगा। 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' के तहत इन राज्यों के लाभुकों को पीवीसी (पॉलिविनाइल क्लोराइड) प्रिंटेड आयुष्मान कार्ड मुफ्त मिलेगा।

सभी ग्राम स्‍तरीय उद्यमी को किया गया  निर्देशित

इसको लेकर पहले चरण में 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसमें बिहार सहित मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा, नगालैंड, चंडीगढ़, पुदुचेरी, छत्तीसगढ़ तथा मध्यप्रदेश आदि शामिल हैं। सीएससी के राज्य प्रमुख संतोष तिवारी ने बताया कि इस बाबत सभी सीएससी वीएलई (ग्राम स्तरीय उद्यमी) को निर्देशित किया जा रहा है। कार्ड बनाने के लिए आम लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर से मिलेगा कार्ड

नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान भारत के लाभुकों को पहले पेपर आधारित कार्ड दिया जायेगा। फिर इसके बाद एक पीवीसी प्रिंट हुआ कार्ड दिया जायेगा। पीवीसी आयुष्मान कार्ड किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर से प्राप्त किया जा सकेगा।

पांच लाख रुपये तक के इलाज की व्यवस्था

'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना' एक मुख्य कार्यक्रम है। इस योजना के तहत सालाना प्रति परिवार पांच लाख रुपये के इलाज की सुविधा दी गई है। इसमें 10.74 करोड़ लाभुकों, यानी लगभग 53 लाख परिवारों, को दूसरे एवं तीसरे स्तर की चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया है। योजना लाभुक को कैश या पेपर आदि नहीं होने के बावजूद   स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराती है। इस योजना के तहत 937 हेल्थ पैकेज हैं। देश के 32 प्रदेशों के 24000 से अधिक सरकारी व गैरसरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है.

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