हड्डियों के लिए साइलेंट किलर है ऑस्टियोपोरोसिस

पटना फुलवारीशरीफ। विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस पर एम्स पटना में आर्थो विभाग द्वारा रविवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में चिकित्सकों ने ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव और उसके इलाज पर चर्चा की गई। साथ ही मरीजों को सर्जरी की नौबत नहीं पड़े इसके लिए हमेशा अपनी हड्डियों में होने वाले बदलाव पर नजर रखने की नसीहत दी गई।

सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि ऑस्टयोपोरोसिस हड्डियों की एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डी का ऊपरी सतह तो बिल्कु़ल स्वस्थ दिखता है, लेकिन हड्डियों का अंदरूनी भाग अंदर-अंदर खोखला होने लगता है। इस बीमारी का पता लगने तक मरीज का हड्डी खोखला हो चुका होता है और मरीज अपंगता का शिकार हो चुका होता है। इस स्थिति में इसका इलाज दवा के माध्यम से करना बहुत कठिन हो जाता है और चिकित्सक के पास एक मात्र उपाय हड्डी ट्रासप्लाट का होता है। इसलिए ऑस्टियोपोरोसिस को साईलेंट कीलर कहा जाता है। यह बीमारी हड्डी में हल्की दर्द से शुरू होता है। इस दर्द को नजरअंदाज करना ही घातक हो सकता है। शुरुआती दौर में जाच के द्वारा इसका इलाज ज्यादा हड्डी बनाने वाली दवा व इंजेक्शन से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।

सेमिनार में आए डॉक्टरों ने हड्डी बनाने की अत्याधुनिक दवा व समय रहते तकनीक संतुलित आहार और रहन-सहन में बदलाव पर चर्चा की।

सेमिनार में शामिल मेडिकल छात्रों के बीच क्विज आयोजित की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को विशेषज्ञों ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर डॉ. सुदीप कुमार, डॉ. अविनाश, डॉ. प्रभात, डॉ. दिवेंदु भूषण, डॉ. मुक्ता अग्रवाल, डॉ. शमशाद अहमद, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. प्रणव संथानिया ने भी सेमिनार को संबोधित किया।

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण- हड्डियों में दर्द, थकावट, कमजोरी महसूस होना। इस स्थित में चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

बचाव : व्यायाम, संतुलित आहार, हल्की धूप में रहना, कैल्शियम, बीटामीन-डी, पनीर, हरा सब्जी, सीता फल, सोयाबीन व मरूआ आटा का सेवन।

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