पारस को लोजपा संसदीय दल का नेता बनाने के विरोध में राजद, शिवानंद बोले- चिराग के सामने नहीं टिकेंगे

Bihar Politics लोजपा प्रकरण में राजद ने भी हस्तक्षेप किया है। पशुपति कुमार पारस को संसदीय दल के नेता बनाए जाने को लोकसभा में गलत परंपरा की शुरुआत बताया है। कहा कि लोकसभा के फैसले से लोकतंत्र कमजोर होगा और लोकसभा की गरिमा को भी ठेस पहुंचेगी।

Shubh Narayan PathakWed, 16 Jun 2021 09:39 PM (IST)
लालू प्रसाद यादव और चिराग पासवान। फाइल फोटो

पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Politics: लोजपा प्रकरण में राजद ने भी हस्तक्षेप किया है। पशुपति कुमार पारस को संसदीय दल के नेता बनाए जाने को लोकसभा में गलत परंपरा की शुरुआत बताया है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि लोजपा के बागियों को अलग गुट की मान्यता दी जा सकती थी। किसी पार्टी के संसदीय दल का नेता कौन होगा, यह उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को सूचित किया जाता है। भले ही लोजपा के छह में से पांच सदस्यों ने पारस को नेता चुन लिया हो, लेकिन बगैर राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुशंसा के उन्हें लोजपा संसदीय दल का नेता बनाना संसदीय परंपरा के विरुद्ध है।

लोकसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला फैसला

राजद के प्रवक्‍ता ने कहा कि लोकसभा के फैसले से लोकतंत्र कमजोर होगा और लोकसभा की गरिमा को भी ठेस पहुंचेगी। राजद नेता ने कहा कि संसदीय दल का नेता और सांसदों को न तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने और न राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का अधिकार है।

चिराग के सामने पारस टिक नहीं पाएंगे : शिवानंद

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने पशुपति कुमार पारस की चिराग पासवान से तुलना की है। उन्होंने कहा कि चिराग ने जिस तरह की आक्रामक शुरुआत की है, उससे लगता है कि उनके सामने पारस टिक नहीं पाएंगे।

रामविलास को पहले से रही होगी आशंका

लोजपा के बागियों को राजद नेता ने टहनियां करार दिया है और चिराग को जड़ और तना बताया है। उन्होंने कहा कि लोजपा की टहनियां छंट गई हैं। रामविलास को आशंका रही होगी कि भविष्य में नेतृत्व को लेकर विवाद होगा। इसलिए उन्होंने अपने जीवन में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज चिराग को दे दिया था। उन्हें यकीन था कि उन्होंने जो आधार बनाया है वह चिराग के ही साथ रहेगा।

चिराग की मां से आगे आने की अपील

शिवानंद ने कहा कि अपने भाइयों से रामविलास को गजब का लगाव था। राजनीति में उन्हें पाला-पोसा और आसमान में पहुंचा दिया। ऐसी नजीर अपवाद है, मगर चिराग की चिट्ठी से जो खुलासा हुआ वह आश्चर्यजनक है। पारस ने पिता समान बड़े भाई के श्राद्ध खर्च के लिए अपनी भाभी से पैसे लिए यह तो अति है! उम्मीद है कि चिराग की मां सच्चाई को उजागर करेंगी। 

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