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बेकार पड़ी सीडी से अंजलि बनाती हैं कलाकृतियां

प्रभात रंजन, पटना। कहते हैं कि दुनिया में कोई भी चीज बेकार नहीं होती। अगर उसका सही प्रयोग किया जाए तो बेकार सामग्री भी काम की बन जाती है। बदले दौर में सीडी कैसेट का प्रचलन बंद हो गया है। घरों में बेकार पड़ी सीडी किसी काम का नहीं होती है। इसलिए ज्यादातर लोग कचरे में फेंक देते हैं। समुचित तरीके से निस्तारण नहीं होने के कारण यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है।

ऐसे में पटना के काजीपुर की रहनेवाली अंजलि यादव का प्रयोग अनुकरणाीय है। वह बेकार पड़ी सीडी को पेंटिंग के जरिए बेहतरीन कलाकृतियों में ढाल देती हैं। बेकार पड़ी सीडी से बनाई गई कलाकृतियों के जरिए अंजलि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में लगी हैं। वे बीते दिनों ज्ञान भवन में आयोजित महिला उद्योग मेले में अपनी कलाकृतियों की वजह से लोगों के बीच चर्चा में रहीं।

पुरानी सीडी को कम कीमत पर खरीद बनाती हैं कलाकृति - अंजलि एवं उनकी टीम घर में बेकार पड़े पुरानी सीडी को कम कीमत पर खरीदकर कलाकृतिया तैयार करती हैं। विज्ञान की छात्रा रहीं अंजलि बताती हैं कि वे पढ़ाई के दौरान वेस्ट मैनेजमेंट पर शोध कार्य कर रही थीं। उन्होंने शोध के दौरान पता लगाया कि सीडी को जलाने पर बड़े पैमाने पर पर्यावरण के लिए नुकसानदेह गैसें निकलती हैं। सीडी को जमीन में दबाने पर भूमि और जल दोनों प्रदूषित होता है। ऐसे में उन्होंने सीडी का फिर से इस्तेमाल करने के लिए इसपर पेंटिंग बनानी शुरू कर दी। इस आइडिया को लेकर अंजलि, पटना आर्ट कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं के अलावा अपने साथ कई महिलाओं को भी जोड़ा और काम आरंभ कर दीं। अब इनकी कलाकृतियां देशभर में बिकती हैं।

सीडी पर उकेरतीं कई तरह की कलाकृतियां -

सीडी को सुंदर बनाने को लेकर अंजलि इस पर भगवान गणेश, विष्णु और बिहार के साथ ही कई तरह की आकृतियां उकेरती हैं। सबसे ज्यादा आकर्षक पुरानी सीडी से बनी घड़ी है। वे सीडी से खूबसूरत वॉल हैंगिंग, मूर्तियां आदि भी बनाती हैं। उन्होंने हाल के दिनों में चंपारण सत्याग्रह, रामायण से जुड़े पात्र, महाभारत के प्रसंग, भगवान कृष्ण की बाल लीला सहित कई दृश्यों को सीडी पर उकेरा है। वह बताती हैं बीते वर्ष ग्रीस में लगे मेले में उनकी कलाकृति विदेशी लोगों को खूब पसंद आई। 2017 से काम कर रही अंजति बताती हैं कि वे त्रिनेत्रा स्टूडियो के जरिए सीडी का सही उपयोग बताने और पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाने में लगी हैं।

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