सीएम नीतीश के बाद अब चिराग को झटका देने की तैयारी में भाजपा, 60 से अधिक नेताओं की होगी घर वापसी

भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अमित शाह, सीएम नीतीश कुमार और लोजपा अध्‍यक्ष चिराग पासवान की तस्‍वीर।

रामविलास पासवान की मौत के बाद चिराग मुसीबतों में हैं। बिहार विधानसभा चुनाव-2020 के दौरान लोजपा के साथ गए अपनों को घर बुलाने की तैयारी में है भाजपा। भाजपा के राजेंद्र सिंह रामेश्वर चौरसिया और उषा विद्यार्थी जैसे संगठन गढऩे वाले नेताओं की अब घर वापसी होगी ।

Sumita JaiswalThu, 08 Apr 2021 08:24 PM (IST)

पटना, रमण शुक्ला। बिहार विधानसभा चुनाव-2020 (Bihar Assembly Election 2020) के दौरान भाजपा (BJP) छोड़कर दूसरे दलों में गए नेताओं की घर वापसी की तैयारी है। बंगाल चुनाव (West Bengal Elections) के बाद भाजपा का दरवाजा खुल सकता है। चुनाव के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह, उषा विद्यार्थी, रामेश्वर चौरसिया एवं रवींद्र यादव समेत 60 से अधिक ने पाला बदला था। इनमें से अधिकतर लोजपा (Lok Jan Shakti Party)  का दामन थामकर राजग प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए थे। इससे कई सीटों पर राजग (NDA)  को हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने मामले को सख्ती से लेते हुए बागी नेताओं को छह वर्षों के लिए बाहर का दरवाजा दिखाया था, परंतु अब संगठन को मजबूत करने के अभियान पर काम शुरू होने वाला है। ऐसे में अपनों के लिए दरवाजा फिर से खोलने की तैयारी है।

बता दें कि हाल ही में लोजपा (LJP)  के इकलौते विधायक राजकुमार ने चिराग पासवान (Chirag Paswan) को छोड़कर जदयू (JDU) को दामन थाम लिया। उन्‍हें सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की मौजूदगी में जदयू की सदस्‍यता दिलाई गई। इसके पहले लोजपा के 200 से ज्‍यादा नेता जदयू में शामिल हो चुके हैं।

पार्टी दिखा रही सकारात्मक रुख

भाजपा से दूसरे दलों में गए नेताओं में कुछ ने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ी थी तो कुछ को अनुशासनहीनता के आरोप में निकाला गया था। इनमें कई ऐसे हैं, जिनका क्षेत्र विशेष में ठीक-ठाक जनाधार है। इनमें कुछ पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष और संगठन से जुड़े रहे हैं। पार्टी की नजर ऐसे नेताओं पर भी है, जिन्होंने दूसरे दल में जाने के बावजूद भाजपा के खिलाफ मुंह नहीं खोला। अब वे घर वापसी के भी इच्छुक हैं। यही वजह है कि भाजपा भी उनके प्रति सकारात्मक रुख दिखा रही है।

संगठन गढ़नेवाले इन नेताओं की होगी घर वापसी

राजेंद्र सिंह और रामेश्वर चौरसिया जैसे ढाई दर्जन नेताओं की पहचान संगठन गढऩे वालों में है। संगठन की रीति-नीति को समझने से लेकर विचारधारा को मजबूत करने में भी बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि पार्टी में उनकी वापसी का आधार तैयार किया जाने लगा है। राजेंद्र सिंह करीब दो दशक तक झारखंड से लेकर बिहार तक भाजपा के संगठन महामंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे तमाम शीर्ष पदों पर रह चुके हैं। उषा विद्यार्थी भी जिला महामंत्री से लेकर प्रदेश मंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रवक्ता तक रहीं हैं। वहीं, रामेश्वर चौरसिया भाजपा के चार बार विधायक रह चुके हैं। इससे पहले भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव, उपाध्यक्ष के बाद बिहार भाजपा के प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय संगठन में कई प्रदेशों के प्रभारी रह चुके हैं।

बिहार में अभी से भाजपा मिशन-2024 की तैयारी में लक्ष्य बनाकर संगठन को गढऩे की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि पार्टी तमाम नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोडऩे में जुट गई है। शीघ्र ही गुणदोष के आधार पर विभिन्न कारणों से छिटके या निकाले गए नेताओं की वापसी की जमीन तैयार की जा रही है।

संघ के हस्तक्षेप से होगी वापसी

भाजपा में संगठन के शीर्ष रणनीतिकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वरिष्ठ पद धारक इस पहल को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। इसके पीछे वजह है कि भाजपा से बाहर किए गए कई कार्यकर्ताओं का अरसे तक संघ से गहरा लगाव रहा है। संघ की विचारधारा को मजबूत करने में इनकी अहम भूमिका रही है। इसलिए संघ भी चाहता है कि घर वापसी हो जाए।

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