Lok Sabha Election: चौथे चरण में गिरिराज-कन्हैया की अग्निपरीक्षा, अनंत का भी दिखेगा दम

पटना [अमित आलोक]। बिहार में लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में पांच सीटों (दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय एवं मुंगेर के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। चौथे चरण के इस मतदान में कई दिग्‍गजों व बाहुबलियों की प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी है। इस चरण में बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का दम भी दिखेगा।
चौथे चरण के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फायरब्रांड नेता व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तथा जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष व भारतीय कम्‍युनिष्‍ट पार्टी (भाकपा) नेता कन्हैया कुमार आमने-समाने हैं। इस चरण में बिहार प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष नित्यानंद राय, राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के के ललन सिंह तथा राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) के अब्दुल बारी सिद्दीकी की किस्‍मत का भी फैसला हो जाएगा। चौथे चरण में मुंगेर से बाहुबली निर्दलीय विधायक अनंत सिंह की पत्‍नी नीलम देवी भी मैदान में हैं।

बेगूसराय: कन्‍हैया को ले पूरे देश की नजर, गिरिराज को दे रहे टक्‍कर
जवाहरलाल नेहरू छात्रसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष एवं भाकपा प्रत्‍याशी कन्‍हैया कुमार के कारण बेगूसराय लोकसभा सीट की पूरे देश में चर्चा है। वे यहां भाजपा के फायरब्रांड नेताव केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को टक्‍कर दे रहे हैं। यहां महागठबंधन के राजद प्रत्‍याशी तनवीर हसन भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। मुकाबला इन्‍हीं तीनों के बीच बताया जा रहा है।
बीते लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा के भोला सिंह विजयी रहे थे। उन्‍होंने तनवीर हसन को 58,000 वोटों से पराजित किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों तथा भाजपा विरोध के आइकॉन बन चुके कन्हैया कुमार बेगूसराय से अपनी सियासी शुरूआत कर रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के दिग्‍गज गिरिराज सिंह से है। दोनों भूमिहार समुदाय से हैं, जिसकी यहां अच्‍छी तादाद है। इस लड़ाई में कन्‍हैया को भाजपा विरोधी वोटों पर भरोसा है। गिरिराज के खिलाफ उन्‍होंने स्‍थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा भी उठाया है। कन्‍हैया बेगूसराय के ही रहने वाले हैं। जबकि, गिरिराज सिंह बाहर से आकर बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे हैं। उधर, तनवीर हसन को राजद के परंपरागत एम-वाइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण के वोट मिलने की उम्‍मीद है। यहां यादव और मुसलमान वोटर निर्णायक हैसियत में हैं।

दरभंगा: बेटिकट हुए कीर्ति, भाजपा के गोपालजी के खिलाफ मैदान में सिद्दीकी
यहां बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीते वर्तमान सांसद कीर्ति आजाद अब कांग्रेस में हैं। महागठबंधन में सीट शेयरिंग में कांग्रेस को दरभंगा सीट नहीं मिली, इस कारण वे यहां मुकाबले से बाहर हैं। कीर्ति झारखंड के धनबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां महागठबंधन की ओर से राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी ताल ठोक रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी गोपालजी ठाकुर से है।

दरभंगा सीट पर आपातकाल से पहले तक हुए सभी चुनावों में कांग्रेस की जीत हुई थी। लेकिन आपातकाल के बाद कांग्रेस विरोध की लहर के कारण 1977 के चुनाव में भारतीय लोक दल के सुरेंद्र झा सांसद बने। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उठी सहानुभूति लहर में कांग्रेस के हरि नाथ मिश्रा यहां से चुनाव जीते थे। आगे 1989 में जनता दल के शकीउल रहमान तथा 1991 में अली अशरफ फातमी विजयी रहे।
सन् 1999 में कीर्ति आजाद ने दरभंगा में भाजपा का खाता खोला। कीर्ति आजाद यहां से 2009 और 2014 के चुनाव में भी विजयी रहे। तीनों बार उन्‍होंने अली अशरफ फातमी को ही हराया।
दरभंगा में छह विधानसभा क्षेत्र हैं- दरभंगा, दरभंगा ग्रामीण, गौरा बौरम, बेनीपुर, अलीनगर और बहादुरपुर। बीते विधानसभा चुनाव में इनमें से तीन सीटों पर राजद, जबकि दो पर जदयू ले जीत दर्ज की थी। तब राजद व जदयू महागठबंधन में एक साथ थे। भाजपा एक सीट पर विजयी रही थी।
दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम समुदाय के वोट निर्णायक हैसियत रखते हैं। राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी को लालू के एम-वाइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण का लाभ मिलता दिख रहा है। उनके मुकाबले में खड़े भाजपा प्रत्याशी गोपालजी ठाकुर के साथ राजग के घटक दलों के परंपरागत वोट बैंक का लाभ तो मिलेगा ही, ब्राह्मण समुदाय के साथ कथित अन्‍य सवर्ण वोट भी मिल सकते हैं।

मुंगेर: ललन सिंह के मुकाबले खड़ीं बाहुबली अनंत सिंह की पत्‍नी
बिहार की मुंगेर लोकसभा सीट भी इस बार खास बन गई है। यहां राजग के जदयू प्रत्‍याशी राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बिहार सरकार में मंत्री व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी हैं। उनका मुकाबला मोकामा के बाहुबली निर्दलीय विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी से है। नीलम देवी महागठबंधन से कांग्रस के टिकट पर मैदान में हैं।
गत लोकसभा चुनाव में मुंगेर से बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। तब वीणा देवी ने ललन सिंह को एक लाख से अधिक वोटों से हराया था। उस चुनाव में जदयू राजग से अलग था। जबकि इस बार राजग में है। सीट शेयरिंग के दौरान मुंगेर जदयू के खाते में गया, जिससे यहां से वीणा देवी का पत्‍ता कट गया। हालांकि, वे अंत तक इस सीट पर दावा करतीं रहीं।

ललन सिंह को जदयू के आधार वोट के साथ भाजपा व लोजपा के वोट की भी उम्‍मीद है। लेकिन वीणा देवी को टिकट नहीं मिलने से असंतुष्‍ट लोजपा समर्थकों का एक वर्ग भितरघात भी कर सकता है। उधर, बाहुबली अनंत सिंह को यहां के मुस्लिम व यादव वोट मिल सकते हैं। हालांकि, मुंगेर में अनंत सिंह को टिकट दिए जाने का मुखर विरोध करते रहे राजद से भितरघात की भी आशंका है।

उजियारपुर: दिग्‍गजों की प्रतिष्‍ठा दांव पर, नित्‍यानंद की कुशवाहा से टक्‍कर
उजियारपुर लोकसभा सीट पर दो दिग्गजों की प्रतिष्‍ठा दांव पर है। राजग की तरफ से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय हैं तो महागठबंधन से रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ताल ठोक रहे हैं। कुशवाहा काराकाट से भी मैदान में हैं। यहां मार्क्‍सवादी कम्‍युनिष्‍ट पार्टी (माकपा) के अजय राय भी मैदान-ए-जंग में हैं।

भाजपा अध्‍यक्ष नित्‍यानंद राय उजियारपुर से 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद के आलोक कुमार मेहता से 60 हजार वोटों से जीते थे। यहां जदयू की अश्वमेघ देवी तीसरे नंबर पर रहीं थीं। इस बार नित्यानंद राय को जदयू के वोट ट्रांसफर मिल सकते हैं। यहां कुशवाहा व यादव समुदायों की निर्णायक ताकत को देखते मुकाबला कठिन दिख रहा है। ये वोट महागठबंधन के प्रत्‍याशी उपेंद्र कुशवाहा के पक्ष में जा सकते हैं।

समस्तीपुर: यहां पासवान के भाई ठोक रहे ताल, कर्पूरी से भी रहा नाता
समस्‍तीपुर लोकसभा क्षेत्र को 1972 में दरभंगा से अलग किया गया था। यहां लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान चुनाव लड़ रहे हैं। वे यहां से ही 2014 में विजयी रहे थे। उनका मुकाबला महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्‍याशी रामचंद्र पासवान से है।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर बीते चुनाव में भी इन्‍हीं दोनों के बीच मुकाबला हुआ था। उसमें रामचंद्र पासवान केवल 6872 वोटों से जीते थे। इसके पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां जदयू के महेश्वर हजारी ने रामचंद्र पासवान को शिकस्‍त दी थी तो 2004 में राजद के आलोक कुमार मेहता ने जदयू के रामचंद्र सिंह को हरा दिया था। समस्‍तीपुर का पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से खास नाता रहा। उन्‍होंने 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव जीता था।

प्रत्‍याशियों को अच्‍छी वोटिंग की उम्‍मीद
बहरहाल, चौथे चरण के चुनाव के साथ बिहार की 40 में से19 सीटों पर मतदान संपन्‍न हो जाएगा। चुनाव में जीत-हार वोटर तय करेंगे। सभी प्रत्‍याशियों को अच्‍छी वोटिंग की उम्‍मीद है, क्‍यो‍ंकि वोट अच्‍छी वोटिंग सियासी समीकरणों को साधने में मददगार होते रहे हैं। गत लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर अच्छी वोटिंग हुई थी। त‍ब उजियारपुर में 60.2, दरभंगा में 55.4, समस्तीपुर में 57.3, मुंगेर में 53.1 और बेगूसराय में 60.6 फीसद वोट पड़े थे।

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