बिहार के विश्‍वविद्यालयों में एक साथ संचालित होंगे शैक्षणिक सत्र, शिक्षा विभाग ने जारी किया यह आदेश

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने कुलपतियों को सत्रकी लेटलतीफी दूर करने का दिया आदेश। विश्‍वविद्यालयों को जल्द मिलेंगे 4638 सहायक प्रोफेसर आयोग से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया। कहा कि सत्रों की लेटलतीफी छात्रों के साथ नाइंसाफी।

Vyas ChandraWed, 22 Sep 2021 02:24 PM (IST)
बिहार के विवि में नियमित होंगे सत्र। सांकेतिक तस्‍वीर

पटना, राज्य ब्यूरो। प्रदेश के विभिन्न विश्‍वविद्यालयों (Universities in Bihar) में शैक्षणिक सत्र और परीक्षा संचालन (Academic Session and Examination) की लेटलतीफी को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उच्च शिक्षा का विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देने में जुटी सरकार ने विश्‍वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र की एकरूपता लाने का आदेश कुलपतियों को दिया है। इसके लिए एकेडमिक कैलेंडर का सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, विद्यालयों की तर्ज पर सभी कालेजों में शिक्षण कार्य को लेकर निरीक्षण करना अनिवार्य कर दिया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार (Additional Chief Secretary Sanjay Kumar) ने इस संबंध में विश्‍वविद्यालयों को निर्देश जारी किया है। 

विद्यार्थि‍यों के साथ यह नाइंसाफी  

अपर मुख्य सचिव ने कुलपतियों से साफतौर से कहा है कि विलंबित परीक्षाएं एक तय समय सीमा में कराएं और नए सत्र से परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रकाशन में एकरूपता लाएं। मौजूदा वक्त में विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षाएं डेढ़ से दो साल विलंबित चल रही हैं। यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ नाइंसाफी है। साथ ही गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा की दिशा में भी यह बाधक है। तीन वर्ष का पाठ्यक्रम तय अवधि में ही पूरा होना चाहिए। इसी तरह यदि दो वर्ष का कोर्स है तो उसे तय अवधि में पूरा कराना चाहिए। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से नियुक्ति प्रक्रियाधीन है और नए सत्र में 4,638 सहायक प्रोफेसर विश्वविद्यालयों को उपलब्ध हो जाएंगे। 

बता दें कि बिहार के विश्‍वविद्यालयों में सत्र का विलंब से चलना एक गंभीर समस्‍या है। अमूमन हर विवि में सत्रों का विलंब से चलना सामान्‍य सी बात हो गई है। इस कारण से अध्‍ययनरत छात्रों को काफी परेशानी होती है। खासकर दूसरे राज्‍योंं के विश्‍वविद्यालयों में नामांकन लेने अथवा प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अपर मुख्‍य सचिव का यह आदेश यदि प्रभावी हो जाए तो यह छात्रों के लिए वरदान से कम नहीं होगा।  

 

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