वैशाली के ये डॉक्‍टर कर रहे थे कोरोना मरीज का इलाज, मरने के बाद कोई नहीं आया तो खुद किया अंतिम संस्‍कार

बिहार के वैशाली जिले के इस डॉक्‍टर ने पेश की मिसाल। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

Bihar CoronaVirus News महनार के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनोरंजन कुमार सिंह के साथ स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की है। उन्होंने फौजी उदय सिंह के 65 वर्षीय पिता राम उद्गार सिंह की कोरोना संक्रमण से मौत के बाद उन्हें अपने कंधे पर लादकर दाह संस्कार किया।

Shubh Narayan PathakMon, 10 May 2021 06:57 AM (IST)

महनार (वैशाली), संवाद सहयोगी। कोरोना वायरस महामारी के आपदा काल में डॉक्‍टर साक्षात भगवान बन कर लोगों की सेवा कर रहे हैं। अपनी जान को खतरे में डालकर इलाज में जुटे डॉक्‍टरों की बदौलत ही लाखों लोगों की जान बचाई जा सकी है। आइएमए बिहार की ओर से जारी सूचना के लिहाज से कोरोना की दूसरी लहर में अब तक 42 से अधिक डॉक्‍टर अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में वैशाली जिले के इस डॉक्‍टर ने जो किया, उसे जानकर आप भी उन्‍हें सलाम करेंगे।

डॉक्‍टर और मुखिया मिलकर शव को ले गए गंगा घाट

वैशाली जिले के महनार प्रखंड की हसनपुर दक्षिणी पंचायत के मुखिया मुकेश कुमार सिंह एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महनार के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनोरंजन कुमार सिंह के साथ स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की है। उन्होंने फौजी उदय सिंह के 65 वर्षीय पिता राम उद्गार सिंह की कोरोना संक्रमण से मौत के बाद उन्हें अपने कंधे पर लादकर दाह संस्कार किया। डॉ. मनोरंजन एवं मुखिया मुकेश ने पीपीई किट पहनकर स्वयं शव को उठाकर गंगा घाट पर ले गए, जहां अंतिम संस्कार किया गया।

कोरोना के कारण कोई नहीं आया अंतिम संस्‍कार के लिए

जानकारी के अनुसार हसनपुर दक्षिणी गांव में एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई थी। उसका बेटा सेना में कार्यरत है और घर पर कोई पुरुष सदस्य नहीं था। समाज ने संक्रमण के डर से शवदाह करने से स्वयं को किनारा कर लिया। मुखिया ने बताया की सूचना मिलने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी गांव में पहुंचे और कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शव को प्लास्टिक में लपेटकर दाह संस्कार के लिए ले जाया गया।

कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम संस्‍कार

डॉक्‍टर ने बताया कि मृतक कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज चल रहा था। चिकित्सक ने स्वयं कंधा देकर शव को गंगा किनारे तक ले गए। जहां उनका कोरोना प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मानवता के मिसाल पेश करने पर आसपास के लोग काफी सराहना कर रहे हैं। 

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