गरीबों की थाली से दूर हुआ आलू -प्याज, कीमतें छू रहीं आसमान

गरीबों की थाली से दूर हुआ आलू -प्याज, कीमतें छू रहीं आसमान
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 06:53 PM (IST) Author: Jagran

- सब्जियों की बढ़ती कीमत से बिगड़ रहा घर का बजट

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फोटो - 10

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संसू, वारिसलीगंज: आम आदमी की सब्जी आलू और प्याज एक बार फिर उपभोक्ताओं को परेशान करने लगा है। गांव व शहर के आम घरों खासकर गरीबों की थाली की मुख्य सब्जी के रूप में परोसा जाने वाला आलू-प्याज की कीमत एक महीने में ही दोगुनी से अधिक हो गई है। गरीबों की थाली से हरी सब्जी तो पहले ही दूर थी। अब आलू प्याज भी दूर होने के कगार पर पहुंच चुका है। बता दें कि लॉकडाउन से पहले व लॉक डाउन की अवधि में जो हरी सब्जियां 20 से 30 रुपये प्रति किलो आसानी से मिल रही थी। आज वही हरी सब्जियां 40 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। आसमान छूती कीमतों के कारण गरीब, दिहाड़ी मजदूर व छोटे - मोटे नौकरी कर चौका सजाने वाले लोगो के साथ ही छोटे व्यवसायी सहित आम लोगों को सब्जी की बढ़ती कीमत अब परेशान करने लगी है। जो लोग लॉकडाउन के कारण अपनी नौकरी, म•ादूरी और व्यवसाय गवा कर गांव स्थित घर में बैठे हुए हैं। उन लोगों की थाली से आसमान छूती हरी सब्जियां तो पहले ही पहुंच से बाहर हो चुकी थी। जबकि कुछ दिन पहले तक आलू और प्याज की औसत कीमत काफी कम थी वह कीमत बढ़कर अब गरीबों को रूलानें लगा है। दो सप्ताह पहले तक जो आलू और प्याज 15 से 20 रुपये किलो उपलब्ध हो रही थी। वह अब 35 से 40 रुपये प्रति किलो मिल रही है। इसी प्रकार आम मध्यम वर्गीय घरों की किचन में सब्जी का जायका बढ़ाने में उपयोग में आने वाला महत्वपूर्ण प्याज के साथ ही हरी मिर्च, टमाटर, कोवी अदरख, लहसुन आदि जो पिछले माह तक कम कीमत पर बाजार में मिल रही थी। आज वही प्याज 40 से 45 रुपये प्रति किलो खुदरा दर पर बाजार में बेची जा रही है।

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पानीपुरी, आलूचॉप विक्रेताओं पर पड़ रहा बोझ

- आलू और प्याज की बढ़ती कीमत का असर पानीपुरी और आलूचॉप समेत अन्य आलू से बनने वाले व्यंजनों को बेचकर गुजर बसर करने वाले लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कुछ तो अपनी दुकान बंद कर चुके हैं। जबकि कुछ जो अभी भी दुकान लगा रहे हैं उन्हें मुनाफा कम और मेहनत ज्यादा करना पड़ रहा है। कीमत बढ़ने से उत्पन्न संकट से उबरने को ले दुकानदारों द्वारा आलू और प्याज से बना व्यंजन का कीमत बढ़ा दिया गया है । जिस कारण बिक्री प्रभावित हुई है। साथ ही उपभोक्ताओं के जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगा है।

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