नालंदा में बेड तक पाइप लाइन से आक्सीजन सप्लाई शुरू, अब बनेगा प्लांट

बिहारशरीफ। आज से नौ साल पहले राजगीर के अंतर्राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखकर अनुमंडलीय अस्पताल की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री ने खुद इसका उद्घाटन किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि राजगीर में देश - विदेश के पर्यटकों का आना - जाना लगा रहता है इस अस्पताल भी विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला होना चाहिए।

JagranSat, 24 Jul 2021 11:41 PM (IST)
नालंदा में बेड तक पाइप लाइन से आक्सीजन सप्लाई शुरू, अब बनेगा प्लांट

बिहारशरीफ। आज से नौ साल पहले राजगीर के अंतर्राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखकर अनुमंडलीय अस्पताल की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री ने खुद इसका उद्घाटन किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि राजगीर में देश - विदेश के पर्यटकों का आना - जाना लगा रहता है, इस अस्पताल भी विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला होना चाहिए। परंतु, जवाबदेह अफसरों ने बाद में सीएम की इच्छा को भुला दिया। आज न तो यह अस्पताल प्रविधान के अनुसार सौ बेड का बन सका, न जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली की गई। संसाधन भी बेहद कम हैं। अब जाकर वार्ड में बेड तक आक्सीजन सप्लाई शुरू की जा सकी है। नवजात शिशुओं के लिए एमएनसीयू का निर्माण किया जा रहा है। परंतु इसके पूरा होने में वक्त लगेगा।

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लगेगा आक्सीजन जेनरेशन प्लांट

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अस्पताल परिसर में बीएमएसआइसीएल द्वारा आक्सीजन जेनरेशन प्लांट की स्थापना की जानी है। इसके लिए स्थल का चयन कर लिया गया है। जल्द ही कोविड मरीजों के अलावा अन्य गंभीर मरीजों को आक्सीजन मुहैया कराने को लेकर अस्पताल स्वावलंबी हो जाएगा।

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केवल 10 बेड का है कोविड वार्ड

कोविड 19 के मरीजों के लिए अलग से 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। लेकिन, अभी तक भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या उतनी नहीं बढ़ी। इससे कुल 32 बेड का यह अस्पताल सवालों के घेरे में आए।

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फिजियोट्रिक वेंटिलेशन मशीन नहीं, कोविड मरीजों को होगी दिक्कत

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कोविड की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के इलाज के लिए यहां समुचित व्यवस्था की जा रही है। मगर फिजियोट्रिक वेंटिलेशन मशीन तथा इस आपरेट करने के लिए विशेषज्ञ टीम के नहीं रहने से कठिनाई होगी। इस बाबत शिशुरोग विशेषज्ञ डा. स्वेश चंद्र ने बताया कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो मरीजों को सबसे ज्यादा सांस लेने में तकलीफ होगी। इसके लिए अस्पताल में आक्सीजन की उपलब्धता तो है लेकिन फिजियोट्रिक वेंटिलेशन मशीन के साथ वेंटिलेशन आपरेशन की टीम नहीं है। अनुमंडलीय अस्पताल में यह टीम नहीं है। इस कारण मरीजों को रेफर करने की नौबत आ जाती है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर के साथ बच्चों के मौसम जनित रोग डायरिया व इंसेफेलाइटिस आदि बीमारियों के लिए हम तैयार हैं। इसके लिए जरूरी सभी दवाएं उपलब्ध हैं।

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कोविड की दूसरी लहर में अस्पताल प्रबंधन ने निभाई अहम भूमिका

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में

अनुमंडलीय अस्पताल राजगीर की भूमिका अहम रही है। अस्पताल और रेलवे स्टेशन पर लोगों की नियमित कोरोना जांच की गई। जिससे संक्रमण का प्रसार रोकने में मदद मिली। जिसमें अनुमंडलीय प्रभारी चिकित्सा उपाधीक्षक डा. विपिन कुमार, अनुमंडलीय कोविड नोडल चिकित्सा पदाधिकारी डा. मनोज कांत भारतीयम, हेल्थ मैनेजर शेषमणि सहित सभी चिकित्सा कर्मी योद्धा की तरह डटे रहे। संक्रमित मरीजों की पहचान करने, दवाई देने, होम आइसोलेशन की सलाह से लेकर उनके स्वस्थ होने तक अस्पताल प्रबंधन ने नजर बनाए रखी।

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नवजात शिशुओं के लिए बन रहा एमएनसीयू

अस्पताल परिसर में एमएनसीयू (मदर न्यूबार्न केयर यूनिट) बन रहा है। यह अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल सुविधाओं से लैस होगा। जिसमें 12 बेड का शिशु आईसीयू वार्ड तथा अटेंडेंट माताओं के लिए 11 बेड की सुविधा होगी। हर बेड तक आक्सीजन आपूर्ति होगी। मेडिकल आफिसर तथा स्टाफ के लिए क्वार्टर बनेंगे।

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16 की बजाए 10 चिकित्सक, आइसीयू भी नहीं

अनुमंडलीय अस्पताल में प्रविधान के हिसाब से चिकित्सकों की संख्या 22 होनी चाहिए। लेकिन, यहां 16 चिकित्सकों के पद सृजित हैं। अभी मात्र 10 चिकित्सक कार्यरत हैं। जिनमें एक प्रभारी चिकित्सा उपाधीक्षक, सर्जन, महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक मूर्छा सहित अन्य डाक्टर शामिल हैं।

फिजिशियन, दंत रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। रेडियोलाजिस्ट, हेल्थ मैनेजर, ईएनटी टेक्नीशियन, सर्जरी रूम असिस्टेंट, मेडिकल रिकार्ड केयर स्टाफ, वार्ड अटेंडेंट, इलेक्ट्रिशियन, ड्राइवर, आदेशपाल, रसोई सेवक व सेविका, माली, प्लंबर भी नहीं हैं। वहीं, आइसीयू (इन्टेंसिव केयर यूनिट) भी नहीं है।

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जान का संकट खड़ा कर देती है एंबुलेंस की कमी

राजगीर अनुमंडल अस्पताल के पास दो एम्बुलेंस हैं। इसमें एक रनिग मोड में है तो दूसरा खराब पड़ा है। एकमात्र एंबुलेंस का उपयोग प्रसव के लिए महिलाओं को घर से लाने व जाने में किया जाता है। दुर्घटना में घायलों को लाने के काम में भी इसी एंबुलेंस को लगाया जाता है। जाहिर है, इससे बड़ी मुश्किल होती है। कभी-कभी एंबुलेंस के बिना जान बचाने का संकट खड़ा हो जाता है। अतिविशिष्ट लोगों के राजगीर आगमन पर एम्बुलेंस की व्यवस्था दूसरी जगह से करनी पड़ती है। आउटसोर्सिंग से यहां की साफ सफाई, विद्युत आपूर्ति व गार्ड की व्यवस्था की गई है।

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पैथोलाजी में सहायक कर्मी की कमी से रिपोर्ट में देरी

यहां आउटसोर्सिंग व अस्पताल की व्यवस्था के तहत एक्स रे व अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नि:शुल्क है। ब्लड ग्रुप जांच, पीसीडीसी, इएसआर, हीमोग्लोबिन, एचआइवी, ब्लड शुगर, सीबीसी, क्रिटनेन, बीटीसीटी आदि की जांच भी होती है। परंतु, रिपोर्ट तैयार करने में काफी देर होती है। अकेले एक जांच विशेषज्ञ हैं, उनके लिए रोजाना पचास रोगियों की रिपोर्ट तैयार करना मुश्किल है। इनके लिए एक सहायक कर्मी की नितांत आवश्यकता है।

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वीवीआइपी आगमन पर बनता है वैकल्पिक आइसीयू

इस अस्पताल में आईसीयू का ना होना बड़ा दुर्भाग्य है। वीवीआइपी के आगमन पर ही वैकल्पिक आइसीयू की व्यवस्था होती है। आए दिन राजगीर में मुख्यमंत्री का आगमन होता रहता है। गाहे- बगाहे राष्ट्रपति, राज्यपाल, दूसरे देशों के राजनयिक भी आते हैं। उस समय आइसीयू की वैकल्पिक व्यवस्था में काफी समय की बर्बादी होती है। अत: यहां कार्डियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट व पैथोलाजिस्ट से लैस एक स्थाई आइसीयू की व्यवस्था की जरूरत है, ताकि इसका लाभ आम मरीजों को भी प्राप्त हो सके।

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रोजाना होता है औसतन चार सौ मरीजों का इलाज

इस अस्पताल में रोजाना औसतन 3 से चार सौ मरीज आते हैं। जबकि, गर्मियों में मरीजों की संख्या लगभग पांच सौ हो जाती है। रोजाना लगभग 10 प्रसव कराया जाता है।

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उपाधीक्षक ने कहा, तीसरी लहर से निपटने को तैयार हैं हम

अस्पताल के उपाधीक्षक डा विपिन कुमार ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बल पर मरीजों को चिकित्सीय सुविधा दी जा रही है। यहां सामान्य प्रसव, कुष्ठ, टीबी, सिजेरियन प्रसव के साथ डिजिटल एक्स-रे, पाइप लाइन से आक्सीजन आपूर्ति, पैथोलाजी जांच नि:शुल्क की जाती है। बताया कि कोविड 19 की तीसरी लहर से निपटने को हम तैयार हैं। अस्पताल के हर बेड तक पाइप लाइन से आक्सीजन आपूर्ति की सुविधा बहाल हो गई है। आक्सीजन प्लांट की भी स्थापना की जा रही है। इससे जल्द ही यह अस्पताल आक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।

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अस्पताल की वर्तमान सुविधाएं व संसाधन

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वर्तमान में मात्र 32 प्रकार की दवाएं ओपीडी में हैं। अन्य सुविधाओं में नियो नेटल केयर यूनिट, अर्श क्लिनिक, विसंक्रमण कक्ष, पोस्ट आपरेटिव केयर रुम, डेंगू वार्ड, नर्स कर्तव्य कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, पेईंग वार्ड, सामान्य कक्ष, इमरजेंसी वार्ड, आकस्मिक कक्ष, चिकित्सिकीय कर्तव्य कक्ष, महिला परिचायिका कक्ष, नेत्र विभाग, टीकाकरण कक्ष, एक्स रे, डिजिटल एक्स-रे कक्ष, पैथालाजी जांच घर, कुष्ठ कक्ष, टी बी यूनिट, यक्ष्मा प्रयोगशाला, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, कोल्ड चेन, यूनिट, दवा भंडार कक्ष, दवा वितरण कक्ष, आक्सीजन सिलेंडर आदि के अलावा अस्पताल के फ‌र्स्ट फ्लोर पर स्ट्रेचर ट्राली से ले जाने के लिए रैंप भी उपलब्ध है।

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