जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कराया गया 6 माह के उपर के बच्चों का अन्नप्राशन

राज्य से कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसलिए बच्चों को कुपोषण से बचाने तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया दर में कमी लाने के लिए इस पूरे सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है।

JagranMon, 20 Sep 2021 11:28 PM (IST)
जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कराया गया 6 माह के उपर के बच्चों का अन्नप्राशन

जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ : राज्य से कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसलिए बच्चों को कुपोषण से बचाने तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया दर में कमी लाने के लिए इस पूरे सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत सोमवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्रासन दिवस का आयोजन किया गया। जिसका आगाज राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग, पटना की अध्यक्ष डा. प्रमिला कुमारी के हाथों, सदर प्रखण्ड के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 17 पर नन्हें प्रिस कुमार के अन्नप्रासन के साथ हुआ। इस अवसर पर सीडीपीओ नेहा कुमारी, पर्यवेक्षिका अंजली, पल्लवी, केंद्र की सेविका और सहायिका के साथ कई लाभार्थी भी उपस्थित थे।

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क्षेत्रीय भोजन से कुपोषण दूर करने की दी गई जानकारी

डा. प्रमिला ने इस वर्ष के पोषण माह के थीम ''कुपोषण छोड़ पोषण की ओर, थामे क्षेत्रीय भोजन की डोर'' पर चर्चा करते हुए बताया डब्बा बंद आहार की अपेक्षा स्थानीय भोजन पर बल देने की जरूरत है। इससे पोषण स्तर तो बढ़ता है, साथ ही आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता है। आईसीडीएस द्वारा हर महीने की 19 तारीख को अन्नप्रासन दिवस का आयोजन करवाया जाता है। ताकि हर अभिभावक तक सुपोषण का संदेश पहुंचे और हर बच्चा कुपोषण मुक्त हो सके। केंद्र पर उपस्थित माताओं और अभिभावकों से बात करते हुए डा. प्रमिला ने कहा अन्नप्राशन के दिन बच्चों को गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्थानीय मौसमी फल और दूध से बने उत्पाद खिलाएं । साथ ही तरल व पानी वाला भोजन जैसे दाल का पानी या माढ़ आदि न देकर उस मात्रा में अर्धठोस आहार दें।

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6 माह तक स्तनपान, उसके बाद अनुपूरक आहार सीडीपीओ नेहा कुमारी ने बताया कि शिशु के लिए मां का दूध सबसे बड़ा पोषण का स्त्रोत होता है। इसलिए 6 माह तक केवल स्तनपान कराएं। 6 माह पूर्ण होने के बाद शिशु को अधिक उर्जा की जरूरत होती है। इस दौरान उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से होता है। इसके लिए सिर्फ स्तनपान पर्याप्त नहीं होता है। इसलिए 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की भी जरूरत होती है।

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पौष्टिक लड्डू वितरण और रंगोली बना दिया पोषण संदेश

सेविका और सहायिका द्वारा पूरे आंगनबाड़ी केंद्र को कलात्मक रंगोली से सजाया गया था। वही पोषक क्षेत्र के 3 वर्ष से ऊपर आयु के बच्चों में पौष्टिक लड्डुओं का वितरण भी किया गया। इसके साथ ही माताओं को लड्डू बनाने की विधि, पौष्टिक अनुपूरक आहार विधि, भोजन बनाते समय साफ सफाई रखने और गर्भवतियों में एनीमिया मुक्ति जैसे अहम मुद्दों से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी गयी।

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