नालंदा में आजादी के दीवानों ने हिलसा थाने पर तिरंगा फहरा उतारी थी पुलिस की वर्दी

बिहारशरीफ। आने वाले 15 अगस्त को पूरा देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। उस दिन हम सभी देशवासी शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करेंगे। देश को आजाद कराने के लिए चली लंबी स्वतंत्रता आंदोलन में लाखों देशवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसमें हिलसा के वीर सपूत भी पीछे नहीं थे।

JagranFri, 06 Aug 2021 11:20 PM (IST)
नालंदा में आजादी के दीवानों ने हिलसा थाने पर तिरंगा फहरा उतारी थी पुलिस की वर्दी

बिहारशरीफ। आने वाले 15 अगस्त को पूरा देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। उस दिन हम सभी देशवासी शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करेंगे। देश को आजाद कराने के लिए चली लंबी स्वतंत्रता आंदोलन में लाखों देशवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसमें हिलसा के वीर सपूत भी पीछे नहीं थे। यहां तो अगस्त क्रांति के दौरान देश को आजाद कराने के दीवाने नौजवानों ने न केवल हिलसा थाने पर तिरंगा लहराया था बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के सिपाहियों की वर्दी भी उतरवा ली थी। इससे बौखला कर ब्रिटिश सिपाहियों द्वारा चलाई गई अंधाधुंध गोली से 11 नौजवान शहीद हो गए थे। वहीं, अनुमंडल के कई स्वतंत्रता सेनानियों की जिदगी जेल में कटी थी। उन वीर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता है। कहा जाता है कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान पटना में एक साथ सात युवा शहीद हो गए थे। 11 अगस्त 1942 को पटना से आए छात्रों ने पटना में हुए गोलीकांड में शहीद साथियों को याद करते हुए हिलसा के रामबाबू हाई स्कूल के मैदान में एकत्रित होकर हिलसा थाना पर चढ़ाई करने की योजना बनाई थी। 15 अगस्त 1942 को हिलसा के देशभक्त नौजवानों ने अंग्रेजों भारत छोड़ो के जोश पूर्ण इंकलाबी नारों के साथ विशाल जुलूस निकालकर हिलसा थाने पर धावा बोल दिया था। इसमें आजादी के दीवाने 11 छात्र नौजवान वहीं पर शहीद हो गए तथा दर्जनों जख्मी हो गए थे। उस समय की यादों को संजोए बुजुर्गो से सुनी बातों के अनुसार, संध्या समय भीड़ हटने पर 12 नौजवानों का लहूलुहान शरीर हिलसा थाने के ठीक सामने जमीन पर पड़ा था। उसी जमीन पर 12 नौजवानों का शरीर एकत्रित कर जलाने के लिए पुलिस ने पेट्रोल छिड़क दिया था। पेट्रोल की शीतलता से मियां बीघा गांव के घायल नौजवान राम बिहारी त्रिवेदी की तंद्रा भंग हुई थी। वे कराहते हुए पानी की रट लगा रहे थे। निकट के दुकानदार रामचंद्र साहब ने पहचाना था कि ये तो पोस्ट मास्टर बाबू के लड़के हैं। तब सिपाहियों ने चिता पर से उन्हें अलग कर पानी पिलाया था। पानी पीने के बाद होश आने पर उन्होंने चिता पर पड़े अपने 11 साथियों की गिनती की थी। उन्हें उपचार के लिए पटना पहुंचाया गया था। इसके बाद वही पर 11 शहीदों को आग के हवाले कर दिया गया था। इसमें हिलसा थाने के इंदौत के 20 वर्षीय भीमसेन महतो, बढ़नपुरा के 20 वर्षीय सदाशिव महतो, बनबारा के 32 वर्षीय केवल महतो, हिलसा के 18 वर्षीय सुखारी चौधरी, गन्नीपुर के 21 वर्षीय दुखन राम, बनबारीपुर के 18 वर्षीय रामचरित्रर दुसाध , हिलसा के 25 वर्षीय शिवजी राम, मलावां के 19 वर्षीय हरिनंदन सिंह, बनबारा के 21 वर्षीय भोला सिंह, कछियावां के 28 वर्षीय बालगोविद ठाकुर एवं कछियावां 18 वर्षीय नारायण पांडेय शहीद हुए थे। बताया जाता है कि उसी दिन हिलसा के श्री भगवान सिंह, जमुआरा के सहदेव सिंह एवं अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर हाजत में बंद कर रखा था। दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी राम बिहारी त्रिवेदी के परिवार के पौत्र उमाशंकर त्रिवेदी ने बताया कि दादा आजादी के समय के अपने काम को बताया करते थे। उस समय उन्हें पुलिस की गोली पैर में गोली लगी थी, जिसका निशान मरते दम तक शरीर पर था।

---------------------

अगस्त क्रांति के 11 शहीदों की स्थली उपेक्षा का शिकार

देश की आजादी दिलाने में अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले अगस्त क्रांति 1942 के हिलसा के 11 वीर शहीदों का शहीद स्थल आज भी सरकारी एवं प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। उन वीर शहीदों की सुधि लेने में सरकार ने पूरी तरह से उपेक्षा की है। शहीदों के प्रति सरकारी उपेक्षा का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है कि अंग्रेज हुकूमत की पुलिसकर्मियों की गोली से शहीद हुए 11 वीर जवानों की रक्तरंजित भूमि पर सरकार द्वारा बनाये गए भवन में हिलसा थाने के पुलिस कर्मी आज भी रह रहे हैं। हिलसा थाने के सामने पूरब स्थित उस केसरे हिद की 12 डिसमिल (खाता 507, खसरा 1996) शहीद स्थली को खाली कराने के लिए नालंदा जिले के स्वतंत्रता सेनानियों ने लंबा संघर्ष चलाया था, जो असफल ही रहा है। उस गोलीकांड में जख्मी होने के बाद किसी तरह बचे एवं कारा विभाग से उपसचिव पद से सेवानिवृत्त होने वाले हिलसा के मियां बीघा निवासी स्वतंत्रता सेनानी राम बिहारी त्रिवेदी एवं जिले के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने मिलकर शहीद स्थल की जमीन को मुक्त कराने के लिए 1982 से लंबा संघर्ष चलाया था। उन स्वतंत्रता सेनानियों के गुजर जाने के बाद शहीद स्थल को मुक्त कराने का प्रयास पूरी तरह से बंद है और अब उसकी सुधि लेने वाला भी कोई नहीं है। बस अब केवल स्थानीय पूर्व विधायक रामचरित्र प्रसाद सिंह के प्रयास से बना हुआ एक छोटा सा पिरामीडिकल स्तंभ हिलसा के उन 11 शहीदों की शहादत को याद दिला जाता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.