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बाढ़ग्रस्त रहने वाले इलाकों की रेल पटरियों व पुलों पर नजर

मुजफ्फरपुर। पूर्व-मध्य रेल के क्षेत्राधिकार में ऐसे कई रेलमार्ग हैं जहां भारी बारिश की स्थिति में रेल पटरियों अथवा रेल पुलों पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण परिचालन बाधित हो जाता है। इसके मद्देनजर रेलवे ने परिचालन कम से कम बाधित होने के लिए सभी रेलमार्गों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है।

चिह्नित रेलमार्गों के निकट पत्थरों के बोल्डर, स्टोन डस्ट, सीमेंट की खाली बोरियां, बांस-बल्ली आदि पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस क्रम में पूर्व-मध्य रेल के विभिन्न मंडलों में 19 हजार घनमीटर स्टोन बोल्डर ट्रैक के निकट रखा जा रहा है। इसके अलावा स्टोन बोल्डर के 150 वैगन भी तैयार रखे गए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन्हें उपयोग में लाया जा सके। साथ ही 27 हजार घनमीटर स्टोन डस्ट रखे गए हैं। स्टोन डस्ट के 190 वैगन भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के लिए उपलब्ध किए जा रहे हैं। रेलवे ट्रैक को बाढ़ के पानी से बचाया जा सके। इसके लिए लगभग एक लाख 25 हजार सीमेंट की खाली बोरियां रखी जा रही हैं ताकि अगर जरूरत पड़े तो इसमें स्टोन डस्ट व बालू भरकर ट्रैक के बगल में रखकर ट्रैक को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जाएगा।

इस दौरान यार्ड एवं ब्लॉक सेक्शन में जलनिकासी की व्यवस्था, समस्त रेलमार्गों में ओएचई तथा लोको पायलट को सिग्नल देखने में बाधा पहुंचाने वाले पेड़ों के डालों की छंटनी भी की गई। रेलमार्गों पर पेट्रोलिग के साथ-साथ वाचमैन भी तैनात किए जा रहे हैं जो रेलवे ट्रैक के आसपास का जलस्तर बढ़ने पर निगरानी करेगे। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि बाढ़ वाले इलाके के रेलमार्ग व पुलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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