Muzaffarpur: निजी अस्पताल में इलाज में गड़बड़झाला, प्रोटोकॉल के हिसाब से नहीं हो रहा इलाज

निजी अस्पताल में प्रोटोकॉल के हिसाब से नहीं हो रहा इलाज। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Muzaffarpur News कोरोना मरीज काइलाज करने वाले निजी अस्पताल में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। जिलाधिकारी की देखरेख में बनी तीन सदस्यीय टीम ने की जांच। निजी अस्पताल पहुंची टीम तो समझ में आया इलाज में गड़बड़झाला।

Murari KumarTue, 20 Apr 2021 08:42 AM (IST)

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना मरीज काइलाज करने वाले निजी अस्पताल में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। जिलाधिकारी प्रणव कुमार की देखरेख में बनी तीन सदस्यीय टीम की जांच में सोमवार को ये बात सामने आई। टीम में अपर समाहर्ता अभिजीत कुमार, प्रभारी एसीएमओ डॉ.हसीब असगर व अधीक्षक डॉ.शिवशंकर ने कोरोना इलाज करने वाले निजी अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लिया। 

जांच के बाद टीम ने पाया कि अगर मरीज की हालत सामान्य है तो ठीक, लेकिन जैसे ही वह गंभीर हुआ तो उसके मैनेजमेंट की सही व्यवस्था नहीं है। मरीज के गंभीर स्थिति में पहुंचते ही निजी अस्पताल उसे एसकेएमसीएच भेज देते हैं। इस दौरान मरीज का ऑक्सीजन लेवल काफी नीचे रहता है। ऐसे में उसे बचाना बेहद मुश्किल हो रहा है। अधिकतर निजी अस्पताल कोविड के गंभीर मरीज का बेहतर इलाज नहीं कर पा रहे हैं। वेंटीलेटर होने के बाद भी मरीज को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह भी मौत का कारण बन रहा है। सिविल सर्जन डॉ.एसके चौधरी ने कहा कि टीम की ओर से जो रिपोर्ट सामने आई है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। कोरोना का इलाज करने वाले निजी अस्पताल के साथ संवाद करके जो कमी है उसे दूर कराने का प्रयास होगा। 

अब जिले में बनेंगे कंटेनमेंट जोन, 206 नए चिह्नित 

कोरोना मरीज की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। माइक्रो की जगह बांस-बल्ला से घेरकर कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि इसके लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है। यह टीम सर्वे कर निर्णय लेगी कि कहां कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा। रविवार को जो केस मिले हैं उसमें 206 माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। इसका प्रस्ताव पूर्वी और पश्चिमी एसडीओ को भेजा गया है। जिले में अब तक 632 माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जा चुके हैं। ये सभी जोन 19 दिनों में बनाए गए हैं। इसमें सबसे अधिक शहरी क्षेत्र के हैं। ग्रामीण इलाकों में कम पॉजिटिव मरीज मिलने पर कंटेनमेंट जोन नहीं बनाए जा रहे हैं। ये सभी सक्रिय माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैैं। 

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