समस्तीपुर में हथिया नक्षत्र की बारिश ने दी राहत तो अब चित्रा कर रही आफत, किसानों में मायूसी

हथिया नक्षत्र में जमकर बारिश होने से खेतों में पहले से ही नमी बरकरार है। ऐसे में धान की फसलों में या तो बाली निकल गई है या फिर निकलने वाली है। कुछ खेतों में धान की फसलें काटने लायक हो गई है।

Ajit KumarWed, 20 Oct 2021 09:11 AM (IST)
खरीफ की मार से बचाने के लिए तिलहन की खेती पर जोर। फाइल फोटो

समस्तीपुर, जासं। आमतौर पर 10 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो जाती है। लेकिन इस बार 19 अक्टूबर को भी जमकर बारिश हुई। हथिया नक्षत्र की बारिश ने जहां राहत दी है वहीं समस्तीपुर में पिछले दो दिनों से चित्रा नक्षत्र में हो रही बारिश से किसानों में मायूसी देखी जा रही है। जबकि लोकोक्तियों में कहा गया है कि हथिया बरसे, चित मंडराय, घर बैठे किसान नितराय। यानि हथिया नक्षत्र की बारिश किसानों के चित्त को खुश कर देती है। वहीं चित्रा नक्षत्र में धूप-छांव का मौसम फसलों के लिए अनुकूल माना जाता है न कि बारिश। हथिया नक्षत्र में जमकर बारिश होने से खेतों में पहले से ही नमी बरकरार है। ऐसे में धान की फसलों में या तो बाली निकल गई है या फिर निकलने वाली है। कुछ खेतों में धान की फसलें काटने लायक हो गई है। कई जगहों पर तो तेज हवा या बारिश ने धान की फसलों को सुला दिया है। ऐसे में बारिश से नुकसान के अलावा और कुछ नहीं है। कुछ ही दिनों में धान की कटाई के साथ ही रबी की बोआई शुरू हो जाएगी। यूं तो रबी फसल में सबसे ज्यादा रकबा गेहूं का ही होता रहा है। लेकिन इस सीजन की मुख्य तिलहन फसल सरसों, राई व तीसी की बुआई में असमय हुई वर्षा ने खलल पैदा कर दी है। बुआई की तैयारी भी शुरू नहीं हुई है। सरसों या राई रबी तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान रखता है। इसकी खेती कम सिचाई एवं कम लागत से बेहतर लाभकारी भी है।

खेतों में पानी, कैसे पूरा होगा लक्ष्य

कृषि विभाग ने इस साल तिलहन का 8720 और दलहन का लक्ष्य 4995 हेक्टेयर तय कियाहै। विभागीय नजर में सारी तैयारी चल रही है। लेकिन जब खेतों में पानी का भराव हो तो ऐसे में कैसे लक्ष्य पूरा होगा यह भी एक अहम प्रश्न है। बताया जाता है कि अभी भी अधिकांश निचले इलाके के खेतों में जलजमाव की स्थिति है।

बारिश से खरीफ फसल को नुकसान, अब रबी फसलों का ही सहारा

ताजपुर प्रखंड के किसान ऋषभ यादव ने बताया कि इस बार लगातार बारिश के कारण खरीफ फसल का नुकसान हुआ है। इसलिए अब रबी फसल का ही सहारा है। इसकी खेती की तैयारी चल रही है। जहां पानी पहले निकल गया, वहां गेहूं के साथ तिलहन फसल की खेती होगी। खानपुर प्रखंड के बसंतपुर गांव के किसान मुख्तार झा कहते है कि मौसम की मार से लागत पूंजी भी निकालना मुश्किल हो रहा है। इसकी जगह पर मक्के की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसान बिंदेश्वर भगत ने बताया कि कृषि विभाग ससमय बीज उपलब्ध कराते हुए वैज्ञानिक तकनीक से तिलहन की खेती को बढ़ावा दे तो पुन: यहां के किसान कम लागत में अधिक मुनाफा के तौर पर इसकी खेती के तरफ रुख कर सकते हैं। वे बताते हैं कि कृषि विभाग की लचर व्यवस्था के कारण दलहन व तिलहन की खेती में किसान दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है।

कम लागत में अधिक मुनाफा के लिए तिलहन की खेती बेहतर

जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि खेतों की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए दलहन व तिलहन की खेती आवश्यक है। कम लागत में अधिक मुनाफा के लिए भी यही खेती बेहतर है। रबी फसल को बढ़ावा देने के हर स्तर पर किसानों का सहयोग किया जा रहा है। मिनी किट का वितरण व समय पर हर तरह का सुझाव मिल रहा है। 

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