मुजफ्फरपुर में भूजल के दोहन का स्तर नियंत्रण के बाहर, आपके यहां ऐसी स्थिति तो नहीं?

जरूरी है कि शासन-प्रशासन भूजल के अनावश्यक दोहन पर लगाम लगाए।

समाप्त हो रहा भूजल का संचित भंडार बारिश के पानी का नहीं हो रहा संचय। इसकी वजह से पूरा जिला अभी पेयजल संकट की चपेट में आ गया है। जबकि इस बार गर्मी का भीषण रूप देखने को नहीं मिला है। यह चिंता का विषय है।

Ajit KumarMon, 10 May 2021 08:07 AM (IST)

मुजफ्फरपुर, जासं। लगातार हो रहे दोहन से भूजल का संचित भंडार साल दर साल कम होते जा रहा है। इसपर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो वह समय दूर नहीं जब हम एक-एक बूंद पानी के लिए मारामारी करेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि शासन-प्रशासन भूजल के अनावश्यक दोहन पर लगाम लगाए। प्रभावशाली कानून बनाकर पानी की बर्बादी करने वालों पर कार्रवाई करे। रविवार को दैनिक जागरण के सहेज लो हर बूंद अभियान से जुड़कर शहर के बुद्धिजीवियों ने उक्त बातें कहीं। समाजसेवी बबली कुमारी ने कहा कि जबसे सबमर्सिबल पंप आया है भू-जल का अनावश्यक दोहन बढ़ा है। जिस घर में चार से पांच लोग है वह भी सबमर्सिबल लगा रहा जबकि सामान्य बोङ्क्षरग से उनका काम चल सकता था। इसलिए यह जरूरी है कि सबमर्सिबल लगाने वालों के लिए नियम कानून बनाया जाए। डॉ.राजेश कुमार ङ्क्षसह ने कहा कि हम समय रहते नही चेते ओर पानी की बर्बादी करते रहे तो आने वाले समय में हमें पेयजल संकट की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ेगा। प्रो. रेणु सिंह ने कहा कि हम बारिश के पानी को नहीं सहेज पा रहे हैं। जबकि धरती की प्यास बुझाने के लिए बारिश के पानी का सहेजना जरूरी है। इसके लिए हमें अधिक से अधिक सोख्ता का निर्माण कराना होगा। 

भूजल के उपयोग को बने निगरानी तंत्र

समाजसेवी जगन्नाथ राय ने कहा है कि एक तरफ बूंद बूंद जल बचाने की बात हो रही तो दूसरी ओर नल जल योजना के तहत हर पंचायत में 12-13 सबमर्सिबल पंप से भूजल का दोहन। कुल 8406 पंचायतें और 80 नगर पंचायतों में लाख से अधिक पंप द्वारा 400 फीट की गहराई से जल का दोहन किया जा रहा है। जबकि इसकी निगरानी का कोई पुख्ता तंत्र विकसित नहीं किया गया है। योजना की हालत यह है कि कहीं नल का टोटी नहीं होने से पानी बर्बाद हो रहा है तो कहीं खेत का पटवन हो रहा है। इस योजना से हर दिन जमीन से लाखों गैलन पानी का दोहन हो रहा है। लेकिन जितना पानी हम निकाल रहे उतना जमीन के अंदर पहुंचाने का कोई प्रयास नहीं कर रहे है। वर्षा जल संचय की योजना पर तत्परता से काम नहीं हो रहा है। सरकार भू-जल के उपयोग को निगरानी तंत्र विकसित करे अन्यथा आने वाले समय में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा।  

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