पश्चिम चंपारण में ‘बुझे’ चिरागों में रोशन होती है ज्ञान की लौ, दिया जाता निरोग रहने का मंत्र

तुमकड़िया गांव के पवन कुमार शशि भूषण कुमार रितेश कुमार नीतीश कुमार अनिकेत आदि गरीब बच्चों के लिए मसीहा बने है । इनका एकमात्र उद्देश्य झुग्गी झोपड़ी का प्रत्येक बच्चा शिक्षा ग्रहण करेंयोग शिक्षा में निपुण हो और देश दुनिया में अपना तथा गांव का नाम रोशन कर सके।

Ajit KumarMon, 20 Sep 2021 09:06 AM (IST)
हर रोज लगती है पाठशाला, नौनिहालों को दी जाती है योग की शिक्षा। फोटो- जागरण

पश्चिम चंपारण, जासं। जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर बैरिया प्रखंड के तुमकड़िया गांव में सामाजिक संगठन से जुड़े युवा पवन कुमार अक्षर ज्ञान के साथ योग और ध्यान की शिक्षा दे रहे हैं। विगत 5 वर्षों से योग शिक्षा की ज्योति जला, आर्थिक रूप से अक्षम, झुग्गी-झोंपडिय़ों के निरक्षर नौनिहालों का भविष्य संवार रहे हैं। तुमकड़िया गांव के पवन कुमार, शशि भूषण कुमार, रितेश कुमार, नीतीश कुमार, अनिकेत आदि गरीब बच्चों के लिए मसीहा बने है । युवाओं का एकमात्र उद्देश्य है कि गांव के झुग्गी झोपड़ी का प्रत्येक बच्चा शिक्षा ग्रहण करें,योग शिक्षा में निपुण हो और देश दुनिया में अपना तथा गांव का नाम रोशन कर सके। इस उद्देश्य को लेकर युवाओं द्वारा करीब 5 वर्ष पूर्व गांव में योग शिक्षा की शुरुआत की गई। पवन कुमार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए दरवाजे पर ही योग शिक्षा की पाठशाला लगाई। हालांकि शुरू के दिनों में ग्रामीणों का उतना सहयोह नहीं मिला, लेकिन धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया और अब तक करीब 100 से अधिक युवा योग एवं नैतिक शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 

पूरा तंत्र स्वयं के बूते चला रहे हैं युवा

गाँव के दर्जन से अधिक गरीब नौनिहालों को नि:शुल्क योग शिक्षा का ज्ञान बांटा जा रहा है। इन्हें सभ्यता, संस्कृति और नैतिकता की पाठ हर रोज पढ़ाई जाती है। हालांकि फिलहाल पाठशाला नहीं लग रही है, लेकिन कुछ दिन पहले तक इस पाठशाला से करीब 100 लोग योग की शिक्षा ले चुके हैं। इनमें 8 से 18 साल तक के बच्चे एवं युवा शामिल है। तमाम कार्य बिना किसी बाहरी आर्थिक मदद के पवन कुमार के नेतृत्व में सभी सदस्य स्वयं के खर्च से कर रहे हैं।

विद्या मंदिर में पढ़ने के दौरान 2015 में मिली थी ज्ञान

तुमकड़िया गांव निवासी पवन कुमार ने बताया कि 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग्य दिवस के अवसर पर उन्हें योग शिक्षा की ज्ञान मिली। उसी दौरान उन्हें योग के प्रति लगाव बढ़ा। इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया और पतंजलि योग समिति को ज्वाइन कर लिए। गांव- गांव में योग योग पहुंचाने की ललक ने उन्हें अपने ही गांव में योग्य पाठशाला लगाने पर मजबूर कर दिया। उनकी इस मुहिम में गांव के बच्चे एवं युवाओं का साथ मिला और धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया।  

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