मार्च में अनुबंध खत्म होने के बाद भी मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल में चलता रहा अभियान

ऐसे चार मरीज सिविल सर्जन के पास आए जिनका आपरेशन 22 नवबंर से पहले हुआ था। अब तक उनकी आंखों की रोशनी नहीं आई है। पकड़ी दयाल मोतिहारी से आए राम अवतार शर्मा ने कहा कि उसका आपरेशन 22 नवंबर को हुआ था। अब आंख में जलन है।

Ajit KumarSat, 04 Dec 2021 09:21 AM (IST)
नवंबर से पहले भी कराए गए आपरेशन में आ रही परेशानी। फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर,जासं। मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल का जिला स्वास्थ्य समिति से मार्च, 2021 में अनुबंध खत्म हो गया था। अनुबंध था नियमित शिविर लगाने तथा उसके लिए सरकारी सहायता लेने का। सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा ने बताया कि बिना सरकार की अनुमति के वहां पर नियमित आंख जांच शिविर का आयोजन चल रहा था। सिविल सर्जन ने बताया कि जितनी भी आंख के आपरेशन करने वाली संस्थाएं हैैं, उनकी जांच होगी। टीम जाकर वहां पर जांच करेगी। एसीएमओ को जिम्मेदारी दी गई है।

दूसरी ओर, शुक्रवार को ऐसे चार मरीज सिविल सर्जन के पास आए, जिनका आपरेशन 22 नवबंर से पहले हुआ था। अब तक उनकी आंखों की रोशनी नहीं आई है। पकड़ी दयाल मोतिहारी से आए राम अवतार शर्मा ने कहा कि उसका आपरेशन 22 नवंबर को हुआ था। अब आंख में जलन है। पानी भी निकल रहा है। दिखायी देना बंद हो गया है। सदर अस्पताल की सर्जन डा. नीतू कुमारी को दिखाया तो उन्होंने पटना भेजने की सलाह दी। इसके बाद उसे सदर अस्पताल के एक वार्ड में भर्ती किया गया। उन्हें शनिवार को पटना भेजा जाएगा। इधर, सूमेरा कुढऩी के अकलू राम ने कहा कि 23 नवंबर को उसका आपरेशन हुआ था। अब आंख से दिखायी देना बंद हो गया हैं। वह निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है। कांटी कोठिया के पुदेनी पासवान को भी आंख से दिखना बंद हो गया हैं। उसका आठ अक्टूबर को मोतियाबिंद का आपरेशन हुआ था। इन मरीजों को शनिवार को एसकेएमसीएच में भेज इलाज किया जाएगा।  

घटना की जांच को आइएमए ने बनाई टीम

मुूजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल में मोतियाङ्क्षबद आपरेशन के बाद आंख में संक्रमण के बाद 15 लोग की एक आंख निकालनी पड़ी है। आपरेशन में हुई चूक पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दुख जताया है। साथ ही एक जांच दल का गठन किया गया है। आइएमए की शुक्रवार शाम आपातकालीन बैठक हुई। सिविल सर्जन डा. विनय शर्मा से घटना की चर्चा की। संगठन के सदस्य जानना चाहते थे कि आखिर किस परिस्थिति में चिकित्सक पर एफआइआर दर्ज कराई गई है। उसमें भी पुलिस ने कैसे हत्या के प्रयास की धारा प्राथमिकी में जोड़ दी है। एक चिकित्सक कभी अपने मरीज की हत्या नहीं करना चाहेगा। इससे उसके भी करियर पर सवाल उठता है। आइएमए जिलाध्यक्ष डा.सीबी कुमार ने कहा कि अविलंब चिकित्सक का नाम एफआइआर से हटाया जाना चाहिए। पूरे प्रकरण में सिर्फ अस्पताल प्रबंधक दोषी है। चिकित्सक तो सिर्फ आपेरशन करता है। उसे दवाई या अन्य उपकरण तो प्रबंधक मुहैया कराते हैं। सिविल सर्जन ने कहा कि उन्हें उनका पक्ष जानने के लिए बुलाया गया था। जो भी बातें थी वो बता दी गई हंै। प्राथमिकी कैसे और क्यों दर्ज कराई गई। इससे भी अवगत करा दिया गया है। मौके पर डा.संजय कुमार, डा.एसपी सिन्हा, डा.सुनील शाही, डा.विमोहन, डा.शशि कुमार, डा.रजी अहमद आदि थे।

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